लिव-इन पार्टनर ने शादी से किया इनकार तो आत्महत्या के लिए उकसाने का केस नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने 6 आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही रद्द की

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सुप्रीम कोर्ट: हर ब्रेकअप को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं कहा जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिव-इन पार्टनर द्वारा रिश्ता खत्म करने या शादी से इनकार करने के बाद दूसरे पार्टनर की आत्महत्या मात्र से धारा 306 IPC के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने छह आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी।

शादी से इनकार के बाद आत्महत्या, क्या पार्टनर पर बनेगा केस?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति द्वारा अपने लिव-इन पार्टनर के साथ रिश्ता खत्म करने या उससे शादी करने से इनकार करने मात्र से उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध में आरोपी नहीं बनाया जा सकता, भले ही इसके बाद दूसरा पार्टनर आत्महत्या कर ले।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने तेलंगाना से जुड़े एक मामले में यह टिप्पणी करते हुए मृतका के पार्टनर समेत छह आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आरोपियों का इरादा महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का था या उन्हें इस बात का ज्ञान था कि शादी से इनकार करने के कारण वह अपनी जान दे सकती है।

सुप्रीम कोर्ट: हर ब्रेकअप को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं कहा जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग लोग परिस्थितियों पर अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया देते हैं। केवल इस वजह से कि किसी रिश्ते के टूटने के बाद कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है, हर मामले को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं माना जा सकता।

अदालत ने टिप्पणी की:

“People react differently to situations, and if a breakup ends up with suicide, it cannot always be termed an abetment to suicide.”

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment of Suicide) के आरोप को बनाए रखने के लिए केवल घटनाओं का क्रम पर्याप्त नहीं है। आरोपों से आरोपी की ओर से उकसाने या ऐसा कृत्य करने का आवश्यक तत्व सामने आना चाहिए, जिससे आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की बात स्थापित हो सके।

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तीन महीने तक लिव-इन रिलेशनशिप में थे

मामले के अनुसार, मृतका और पहले आरोपी एक-दूसरे को बचपन से जानते थे। दोनों के बीच सहमति से संबंध थे और वे करीब तीन महीने तक साथ रहे थे।

शुरुआत में दोनों की शादी की बात भी हुई थी। हालांकि बाद में पहले आरोपी ने महिला से शादी करने से इनकार कर दिया। अभियोजन के अनुसार, ऐसा परिवार और अन्य लोगों के दबाव के बाद किया गया था।

इसके बाद महिला ने कथित तौर पर अपनी बहन से कहा कि यदि अगले दिन शादी नहीं हुई तो वह अपनी जान दे देगी।

आरोपी के घर पर विवाद के बाद महिला ने दी जान

अभियोजन के अनुसार, आरोपी के घर पर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ। इसके बाद महिला ने कथित तौर पर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और आत्महत्या कर ली।

इस घटना के बाद मृतका के पार्टनर, उसके माता-पिता, बहन और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई।

ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने कार्यवाही खत्म करने से किया था इनकार

आरोपियों ने आपराधिक कार्यवाही को खत्म कराने के लिए अदालत का रुख किया था। हालांकि ट्रायल कोर्ट और तेलंगाना हाईकोर्ट ने कार्यवाही समाप्त करने से इनकार कर दिया था।

मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि अभियोजन की ओर से लगाए गए आरोपों को पूरी तरह सही भी मान लिया जाए, तब भी वे उकसावे (Instigation) के आवश्यक तत्वों को स्थापित नहीं करते।

‘अधिक से अधिक शादी से इनकार की बात सामने आती है’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा:

“At worst, even if we fully believe what has been stated by the first informant, there was a refusal of marriage, which led to the woman committing suicide.”

अदालत ने माना कि आरोपों को उनके सर्वोत्तम रूप में स्वीकार करने पर भी अधिक से अधिक यह सामने आता है कि आरोपी ने महिला से शादी करने से इनकार किया और उसके बाद महिला ने आत्महत्या कर ली।

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लेकिन केवल इस घटनाक्रम से धारा 306 IPC के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध स्थापित नहीं होता।

छह आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई material नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि आरोपियों ने महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने का इरादा रखा था या उन्हें यह जानकारी थी कि शादी से इनकार करने पर महिला आत्महत्या कर सकती है।

इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने छहों आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

धारा 306 IPC के तहत क्या जरूरी है?

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अप्रत्यक्ष रूप से यह स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की आत्महत्या और आरोपी के किसी व्यवहार के बीच केवल घटनात्मक संबंध (Causal Sequence) होना पर्याप्त नहीं है।

आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में अभियोजन को ऐसे तथ्य सामने रखने होते हैं जो आरोपी की ओर से उकसावे या आत्महत्या के लिए प्रेरित करने वाले कृत्य की ओर संकेत करें।

इस मामले में अदालत को केवल रिश्ते का टूटना और शादी से इनकार मिला, लेकिन आरोपियों की ओर से महिला को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आवश्यक तत्व सामने नहीं आया।

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