हाईकोर्ट सख्त: दो वकीलों की जांच, पुलिस को FIR पर फैसला लेने का निर्देश

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हाईकोर्ट सख्त: अवैध निर्माण के नाम पर कथित उगाही मामले में दो वकीलों की जांच

दिल्ली हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण मामलों में अदालत की प्रक्रिया का कथित दुरुपयोग कर संपत्ति मालिकों से उगाही के आरोपों पर दो वकीलों के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को जांच और दिल्ली पुलिस को आवश्यक होने पर FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया।


दो अवमानना याचिकाओं पर जाली हस्ताक्षर बनाने का मामलादिल्ली हाईकोर्ट वकीलों की जांच आदेश


अवैध निर्माण मामलों में अदालत की प्रक्रिया के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट सख्त

दिल्ली हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग और संपत्ति मालिकों से उगाही के आरोपों को गंभीर मानते हुए बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को दो वकीलों के आचरण की जांच करने का निर्देश दिया है।

साथ ही अदालत ने दक्षिण जिला के पुलिस उपायुक्त (DCP) को कानून के अनुसार जांच करने और आवश्यकता पड़ने पर एफआईआर दर्ज कर उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया।


अन्य लोगों की संलिप्तता मिलने पर भी होगी कार्रवाई

न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने निर्देश दिया कि यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

अदालत ने यह भी कहा कि जांच निष्पक्ष और व्यापक होनी चाहिए ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।


बार काउंसिल को फर्जी हस्ताक्षर के आरोपों की भी जांच का निर्देश

हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को उस व्यक्ति के दावे की भी जांच करने का निर्देश दिया, जिसने पहले दायर जनहित याचिका (PIL) पर हस्ताक्षर किए थे।

उस व्यक्ति ने अदालत को बताया कि उसने केवल मूल जनहित याचिका पर हस्ताक्षर किए थे। उसका दावा है कि बाद में दायर की गई दो अवमानना याचिकाओं (Contempt Petitions) और उनसे जुड़े शपथपत्रों पर उसके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए तथा उसने कभी वे कार्यवाहियां शुरू नहीं की थीं।

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अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई न होने पर दायर हुई थीं अवमानना याचिकाएं

ये अवमानना याचिकाएं इस आरोप के साथ दायर की गई थीं कि दिल्ली नगर निगम (MCD) ने दक्षिण दिल्ली के पंचशील विहार, शेख सराय और खिड़की गांव स्थित अवैध निर्माणों के खिलाफ अदालत के पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया।


सुनवाई के दौरान सामने आए ‘बेहद चौंकाने वाले तथ्य’

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर “बेहद चौंकाने वाले तथ्य” सामने आए हैं।

मालवीय नगर थाना प्रभारी (SHO) द्वारा दाखिल अनुपालन रिपोर्ट और अदालत में प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर अदालत ने प्रथमदृष्टया पाया कि कुछ लोगों के बीच ऐसा गठजोड़ (Nexus) हो सकता है, जिन्होंने अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया।


ध्वस्तीकरण के आदेश लेकर संपत्ति मालिकों से कथित उगाही का आरोप

अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से प्रथमदृष्टया यह संकेत मिलता है कि कुछ लोगों ने अवैध निर्माणों को गिराने संबंधी न्यायालयी आदेश प्राप्त करने के बाद संबंधित संपत्ति मालिकों पर दबाव बनाया और उनसे अवैध रूप से धन वसूलने (Extortion) का प्रयास किया।

अदालत के अनुसार यदि ऐसा हुआ है तो यह न्यायिक प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग है।


अदालत की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल बेहद गंभीर मामला

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथमदृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि अदालत की प्रक्रिया का उपयोग अवैध निर्माण वाले संपत्ति मालिकों पर दबाव बनाने और गैरकानूनी आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए किया गया।

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अदालत ने माना कि यदि न्यायिक प्रक्रिया का इस प्रकार दुरुपयोग होता है तो यह न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रभाव डालता है।


तीनों अवमानना याचिकाओं का निस्तारण

इन निर्देशों के साथ दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित तीनों अवमानना याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल और दिल्ली पुलिस द्वारा की जाने वाली जांच कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ेगी।


फैसले का महत्व

यह आदेश स्पष्ट करता है कि अदालतें न्यायिक प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगी। यदि किसी व्यक्ति या पेशेवर द्वारा न्यायालयी आदेशों का इस्तेमाल दबाव बनाने या कथित उगाही के लिए किया जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक और आपराधिक दोनों प्रकार की कार्रवाई हो सकती है।

साथ ही यह फैसला अधिवक्ताओं की पेशेवर जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर देता है।


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