दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया कि दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून को जबरन खाली नहीं कराया जाएगा। अदालत ने कहा कि कानून के अनुसार नोटिस देकर ही आगे की कार्रवाई होगी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार के उस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें कहा गया कि फिलहाल दिल्ली जिमखाना क्लब को उसकी जमीन से जबरन बेदखल नहीं किया जाएगा। केंद्र ने अदालत को भरोसा दिलाया कि यदि भविष्य में किसी कार्रवाई की जरूरत पड़ी तो वह केवल उचित नोटिस जारी करने और कानूनन प्रक्रिया अपनाने के बाद ही की जाएगी।
मामला उस सरकारी आदेश से जुड़ा है जिसमें क्लब को 5 जून तक लुटियंस दिल्ली स्थित अपना परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था।
हाई कोर्ट में केंद्र का बड़ा आश्वासन
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने अदालत को स्पष्ट किया कि 5 जून को क्लब की जमीन पर जबरन कब्जा लेने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि 22 मई को जारी नोटिस का उद्देश्य केवल स्थायी पट्टे (Perpetual Lease) को समाप्त करना और जमीन का पुनः कब्जा लेने की प्रक्रिया शुरू करना था।
मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार की ओर से तत्काल बेदखली जैसी कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है। यदि आगे कोई कदम उठाया जाता है तो वह कानूनी प्रक्रिया और उचित नोटिस के तहत ही होगा।
अंतरिम राहत की जरूरत नहीं: हाई कोर्ट
केंद्र के इस बयान के बाद न्यायमूर्ति Avnish Jhingan ने कहा कि फिलहाल किसी अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने माना कि जब केंद्र सरकार स्वयं यह कह रही है कि कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं होगी, तब तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं बनती।
हालांकि हाई कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए उनके लिखित जवाब मांगे हैं। अदालत ने क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है।
क्लब प्रबंधन ने भी उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने यह भी बताया कि क्लब का मौजूदा संचालन मंडल पहले ही अपनी शिकायतें संबंधित अधिकारियों के समक्ष रख चुका है। इस निकाय में केंद्र सरकार द्वारा नामित सदस्य भी शामिल हैं।
क्लब प्रबंधन का कहना है कि सरकार की कार्रवाई और बढ़े हुए ग्राउंड रेंट ने संस्था के संचालन पर गंभीर असर डाला है। इसी कारण क्लब ने पहले भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
क्या है दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद?
केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को रक्षा और सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए 27.3 एकड़ भूमि खाली करने का निर्देश दिया था। यह जमीन राजधानी के बेहद महत्वपूर्ण लुटियंस ज़ोन में स्थित है।
विवाद की एक बड़ी वजह क्लब के ग्राउंड रेंट में की गई भारी बढ़ोतरी भी है। क्लब के अनुसार उसका वार्षिक किराया वर्ष 2023 तक मात्र 409.50 रुपये था, जिसे बढ़ाकर 4.10 करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया। इसके बाद अप्रैल 2026 में इसे फिर बढ़ाकर 47.59 करोड़ रुपये से ज्यादा कर दिया गया।
क्लब ने अदालत में दलील दी है कि हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालय के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिसर द्वारा जारी नोटिस मनमाने और अव्यवहारिक हैं। क्लब ने इन नोटिसों को रद्द करने की मांग की है।
औपनिवेशिक दौर से जुड़ी है क्लब की विरासत
दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थानों में गिना जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1913 में “इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब” के रूप में हुई थी। ब्रिटिश शासन के दौरान यह क्लब शाही अधिकारियों और उच्च वर्ग के सामाजिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ था।
स्वतंत्रता के बाद “इंपीरियल” शब्द हटा दिया गया, लेकिन क्लब की पहचान, परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा काफी हद तक बनी रही। पिछले 113 वर्षों में यह संस्था दिल्ली के अभिजात सामाजिक जीवन का प्रतीक मानी जाती रही है।
आगे क्या?
अब इस मामले में केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन को अपना विस्तृत पक्ष अदालत के सामने रखना होगा। फिलहाल हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना कानूनन प्रक्रिया अपनाए कोई बेदखली कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला न केवल संपत्ति अधिकार बल्कि सरकारी नियंत्रण और ऐतिहासिक संस्थाओं की स्वायत्तता से जुड़े बड़े कानूनी सवाल भी खड़े कर सकता है।
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