कानूनी पेशेवरों के अलावा अन्य पेशेवरों को शामिल करने के सवालों पर विचार किया जा सकता – सर्वोच्च न्यायालय

supreme c of india

सर्वोच्च न्यायालय Supreme Court ने आज चिकित्सा पेशेवरों को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 Consumer Protection Act, 1986 (सीपीए) के दायरे में रखने वाले अपने फैसले को बड़ी पीठ के पास भेजने से इनकार कर दिया और कहा कि अधिनियम के तहत कानूनी पेशेवरों Legal Professionals के अलावा अन्य पेशेवरों को शामिल करने के सवालों पर … Read more

POCSO ACT का मुकदमा आपसी समझौते से खत्म नहीं किया जा सकता, शीर्ष अदालत ने राजस्थान HC के आदेश को खारिज करते हुए FIR को किया बहाल

pocso-act-ON-sc

POCSO ACT: दलित नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के आरोपी शिक्षक को अब मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। 2022 के इस मामले में राजस्थान हाई कोर्ट RAJUSTHAN HIGH COURT ने दोनों पक्षों में समझौते को आधार बना कर केस रद्द कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को गलत बताते हुए निरस्त कर दिया … Read more

अचानक झगड़े के बाद आवेश में लड़ाई में बिना किसी पूर्व विचार के अपराध : सुप्रीम कोर्ट ने IPC SEC 302 के तहत दोषसिद्धि को IPC SEC 304 में बदला

सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 302 के तहत एक व्यक्ति की दोषसिद्धि को धारा 304 आईपीसी के भाग 1 के तहत बदल दिया, जबकि यह देखा कि अपीलकर्ताओं द्वारा अचानक झगड़े के बाद आवेश में अचानक लड़ाई में बिना सोचे-समझे अपराध किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह अपील छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय … Read more

ऐतहासिक निर्णय: LMV लाइसेंस धारक भी 7500 किलोग्राम तक के परिवहन वाहनों को चला सकते हैं, सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसले में लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) लाइसेंस धारकों को अब कानूनी तौर पर 7,500 किलोग्राम तक के बिना लदे वजन वाले परिवहन वाहन चलाने की अनुमति है। अपने लैंडमार्क निर्णय में कोर्ट ने “यह कानूनी सवाल दुर्घटना मामलों में बीमा कंपनियों की तरफ से … Read more

सार्वजनिक क्षेत्रों में महिलाओं की तस्वीरें लेना, ताक-झांक करना IPC Sec 354C के तहत अपराध नहीं: केरल हाईकोर्ट

kerala-high-court

केरल उच्च न्यायालय ने कानून के अनुसार ताक-झांक की सीमाओं को स्पष्ट करते हुए कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्रों में महिलाओं की तस्वीरें लेना, जहाँ वे उचित रूप से गोपनीयता की अपेक्षा नहीं करती हैं, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354सी के तहत अपराध नहीं माना जाता है, जो ताक-झांक से संबंधित है। मामला … Read more

किसी व्यक्ति को निशाना बनाए बिना, धमकाने के लिए बंदूक चलना, हत्या का प्रयास नहीं – हाई कोर्ट

धोखाधड़ी और जालसाजी के एक कथित मामले में 4 डॉक्टरों को बरी करते हुए HC ने कहा कि जांच की डिग्री और मूल्यांकन की प्रक्रिया उच्च स्तर पर होनी चाहिए

राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने फैसला सुनाया है कि किसी व्यक्ति को निशाना बनाए बिना, धमकाने के लिए बंदूक चलाने की घटना हत्या के प्रयास के रूप में योग्य नहीं है। न्यायालय ने अपीलकर्ता के खिलाफ हत्या के प्रयास के आरोप तय करने को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। … Read more

सौ करोड़ के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का जनता को मिले पूरा लाभ, हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले मुख्य सचिव को दिया ये निर्देश

himanchal p hc

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिमला जिले के चमियाना अस्पताल के उपयोग से संबंधित मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायालय ने मुख्य सचिव को अस्पताल के भविष्य पर चर्चा करने के लिए 11 नवंबर, 2024 को सभी हितधारकों की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सत्येन … Read more

8 साल में 9 व्यक्तियों के खिलाफ बलात्कार के लिए 7 एफआईआर : सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैन्य अधिकारी की याचिका पर जारी किया नोटिस

Supreme-Court

अभियोजन पक्ष की शिकायत पर 8 साल में 9 व्यक्तियों के खिलाफ बलात्कार के लिए 7 एफआईआर: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैन्य अधिकारी की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें कथित ‘सेक्सटॉर्शन रैकेट’ द्वारा बलात्कार के मामले को खारिज करने की मांग की गई थी सुप्रीम कोर्ट ने आज सेवानिवृत्त सेना अधिकारी कैप्टन राकेश वालिया … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी मदरसा बोर्ड एक्ट – 2004 को संवैधानिक घोषित किया, हाई कोर्ट का निर्णय निरस्त

Supreme court of india

सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया है कि संविधान के मूल ढांचे के उल्लंघन के लिए किसी क़ानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती नहीं दी जा सकती। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2004 को इस आधार पर असंवैधानिक माना है कि यह धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21ए … Read more

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा की ‘हिंदू विवाह अधिनियम’ के अनुसार पति को बच्चे को देखने का पूरा अधिकार, भले ही वो अलग-अलग रह रहे हों

मद्रास हाईकोर्ट का फैसला: हिंदू और ईसाई के बीच हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह वैध नहीं

मद्रास हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद के मामले में अलग रह रहे पति जो बच्ची का पिता है को राहत प्रदान की. हाई कोर्ट ने पिता को अपनी बच्ची से मिलने का मौका प्रदान किया. पति-पत्नि विवाद के बाद अलग रह रहे हैं. इस मामले में बच्ची अपनी मां के साथ रह रही है और … Read more