क्या गलत कानूनी सलाह देने पर वकील के खिलाफ आपराधिक मामला बन सकता है? बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत

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वकील की कानूनी राय पर आपराधिक जिम्मेदारी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अधिवक्ता को अंतरिम राहत देते हुए कहा कि केवल कथित गलत कानूनी सलाह या राय देने के आधार पर किसी वकील पर आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। अदालत ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।


मामले की पृष्ठभूमि

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक प्रैक्टिसिंग अधिवक्ता द्वारा दायर आपराधिक आवेदन पर सुनवाई करते हुए धोखाधड़ी (Cheating), जालसाजी (Forgery) और आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy) से संबंधित आपराधिक कार्यवाही के विरुद्ध अंतरिम राहत प्रदान की।

न्यायमूर्ति संदेश डी. पाटिल की एकलपीठ ने अधिवक्ता की इस दलील को रिकॉर्ड पर लिया कि सिर्फ कथित रूप से गलत कानूनी सलाह (Legal Advice) या कानूनी राय (Legal Opinion) देने के आधार पर किसी अधिवक्ता पर आपराधिक जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती।


अधिवक्ता की क्या दलील थी?

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि—

  • वह एक प्रैक्टिसिंग अधिवक्ता हैं।
  • उन्होंने संबंधित मामले में केवल कानूनी राय (Legal Opinion) दी थी।
  • उनके विरुद्ध केवल इस आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया कि उनकी कानूनी राय कथित रूप से गलत थी।

अधिवक्ता ने तर्क दिया कि किसी वकील को उसके पेशेवर दायित्वों के तहत दी गई कानूनी राय के लिए स्वतः आपराधिक रूप से उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।


किन सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला?

याचिकाकर्ता ने अपनी दलील के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के दो महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया—

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इन निर्णयों में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल पेशेवर कानूनी सलाह देने के कारण, जब तक किसी आपराधिक षड्यंत्र या धोखाधड़ी में अधिवक्ता की सक्रिय भूमिका का प्रथम दृष्टया प्रमाण न हो, तब तक उसके विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।


राज्य का पक्ष

राज्य की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने मामले में जवाबी हलफनामा (Affidavit-in-Reply) दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा।


बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश

दोनों पक्षों को सुनने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने—

  • मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 के लिए निर्धारित की।
  • तब तक याचिकाकर्ता अधिवक्ता को प्रार्थना खंड ‘बी’ (Prayer Clause ‘B’) के अनुसार अंतरिम (Ad-Interim) राहत प्रदान की।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम राहत केवल याचिकाकर्ता अधिवक्ता तक सीमित रहेगी।


अदालत ने अंतिम फैसला नहीं दिया

यह ध्यान देने योग्य है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस चरण पर यह अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है कि अधिवक्ता पर आपराधिक मामला बनता है या नहीं।

अदालत ने फिलहाल केवल याचिकाकर्ता की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए और राज्य को जवाब दाखिल करने का अवसर देते हुए अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। मामले का अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई के बाद किया जाएगा।


मामले का महत्व

यह मामला अधिवक्ताओं की पेशेवर जवाबदेही (Professional Liability) और आपराधिक उत्तरदायित्व (Criminal Liability) के बीच अंतर को लेकर महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों के अनुसार, केवल किसी कानूनी राय के गलत साबित हो जाने से किसी अधिवक्ता के विरुद्ध स्वतः आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, जब तक उसके विरुद्ध किसी आपराधिक साजिश या धोखाधड़ी में संलिप्तता के पर्याप्त प्रथम दृष्टया साक्ष्य न हों।

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