सुप्रीम कोर्ट का संकेत: APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक रहे, CBSE डेटा सुरक्षा और निजता संबंधी चिंताओं की जांच करे

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सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को APAAR ID योजना में डेटा सुरक्षा और निजता संबंधी चिंताओं की जांच करने तथा ओडिशा हाईकोर्ट के उस फैसले को देशभर में लागू करने का संकेत दिया, जिसमें APAAR ID को पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) रखने का निर्देश दिया गया था।


मामले की पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संकेत दिया कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को APAAR ID योजना से जुड़े डेटा सुरक्षा (Data Protection) और निजता (Privacy) संबंधी मुद्दों की जांच करने का निर्देश देगा।

अदालत ने यह भी कहा कि ओडिशा हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उस निर्देश को देशभर में लागू किया जाना चाहिए, जिसके अनुसार APAAR ID का निर्माण पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) रहेगा।


क्या है मामला?

यह सुनवाई अभिषेक बक्सी द्वारा दायर याचिका पर हुई, जिसमें आधार (Aadhaar) से जुड़ी APAAR ID व्यवस्था को चुनौती दी गई है।

याचिका में दावा किया गया है कि यह व्यवस्था—

  • निजता के मौलिक अधिकार (Right to Privacy),
  • भूल जाने के अधिकार (Right to be Forgotten),

का उल्लंघन करती है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने की।


याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि यद्यपि APAAR योजना को स्वैच्छिक बताया गया है, लेकिन व्यवहार में छात्रों को इसमें शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

उन्होंने तर्क दिया कि—

  • APAAR योजना केवल शिक्षा मंत्रालय के परिपत्रों (Circulars) के माध्यम से लागू की गई है।
  • इसके लिए कोई विधायी कानून (Statute) नहीं बनाया गया।
  • जबकि यह योजना बड़ी मात्रा में बच्चों का व्यक्तिगत डेटा एकत्र करती है।

उन्होंने कहा—

“डेटा संग्रह करने वाली योजनाओं के लिए कानून होना चाहिए। यहां कोई वैधानिक कानून नहीं है। योजना केवल मंत्रालय के परिपत्रों के आधार पर लागू की गई है।”


DPDP Act का भी किया उल्लेख

इंदिरा जयसिंह ने कहा कि यह योजना डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम (Digital Personal Data Protection Act – DPDP Act) के अनुरूप नहीं है।

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उन्होंने तर्क दिया कि—

  • सहमति (Consent) सूचित (Informed Consent) होनी चाहिए।
  • उसे कभी भी वापस लेने (Withdraw) का अधिकार भी होना चाहिए।
  • वर्तमान सहमति फॉर्म इन कानूनी मानकों को पूरा नहीं करता।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि DPDP Act की धारा 6 के प्रावधानों को APAAR सहमति फॉर्म में स्पष्ट रूप से शामिल करने का निर्देश दिया जाए।


APAAR ID व्यवहार में कैसे अनिवार्य बन रही है?

याचिकाकर्ता का कहना था कि यद्यपि योजना को स्वैच्छिक बताया जाता है, लेकिन कक्षा 11 और 12 के CBSE रिकॉर्ड में छात्रों का विवरण दर्ज करने के लिए आधार से जुड़ी APAAR ID की आवश्यकता पड़ रही है।

इस कारण व्यवहार में यह योजना अनिवार्य (Mandatory) बन गई है।


ओडिशा हाईकोर्ट के फैसले का हवाला

याचिकाकर्ता ने ओडिशा हाईकोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि—

  • सहमति फॉर्म में स्पष्ट ‘इंकार करने’ (Refusal/Opt-Out) का विकल्प दिया जाए।
  • APAAR ID पूरी तरह स्वैच्छिक रहे।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ओडिशा हाईकोर्ट द्वारा दिए गए इस स्पष्टीकरण को पूरे देश में लागू करने का निर्देश दे सकता है।

उन्होंने कहा—

“क्या यह उचित होगा कि हम कहें कि हाईकोर्ट द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण पूरे देश में लागू किया जाए?”

अदालत ने संकेत दिया कि वह CBSE को इसी संबंध में उपयुक्त निर्देश जारी करेगी।


डेटा सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि APAAR डेटाबेस का उपयोग निगरानी (Surveillance) के लिए किया जा सकता है और छात्रों के डेटा को कितने समय तक रखा जाएगा, इसका उद्देश्य स्पष्ट नहीं है।

इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि—

  • CBSE इस डेटा का उपयोग केवल संस्थागत उद्देश्यों (Institutional Purposes) के लिए कर सकता है।
  • डेटा संग्रह और भंडारण के लिए बहु-स्तरीय सहमति (Layered Consent) की व्यवस्था मौजूद है।

मुख्य न्यायाधीश ने भी कहा—

“अब हमारे देश में डेटा संरक्षण का कानून है। कोई भी संस्था उस कानून का उल्लंघन नहीं कर सकती।”


APAAR योजना के उद्देश्य पर अदालत की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि APAAR प्रणाली के कुछ वैध प्रशासनिक उद्देश्य हैं, जैसे—

  • माता-पिता के स्थानांतरण पर छात्रों का स्कूल बदलना आसान बनाना।
  • छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड का सुरक्षित डिजिटल संरक्षण।
  • शिक्षक-छात्र अनुपात जैसी शैक्षणिक योजनाओं के लिए डेटा उपलब्ध कराना।
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APAAR ID क्या है?

APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) शिक्षा मंत्रालय की “One Nation, One Student ID” पहल के तहत शुरू की गई योजना है।

इसके अंतर्गत प्रत्येक छात्र को 12 अंकों की आजीवन शैक्षणिक पहचान संख्या (12-Digit Lifelong Academic ID) दी जाती है।

यह पहचान संख्या आधार से जुड़ी होती है और इसके माध्यम से छात्रों की—

  • अंकतालिकाएं (Marksheets),
  • प्रमाणपत्र (Certificates),
  • सह-पाठ्यक्रम उपलब्धियां (Co-curricular Achievements)

जैसी जानकारी DigiLocker तथा अन्य सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखी जाती है।


फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है।

फिलहाल अदालत ने संकेत दिया है कि वह—

  • CBSE को डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताओं की जांच करने,
  • तथा ओडिशा हाईकोर्ट के स्वैच्छिक APAAR ID संबंधी निर्देशों को पूरे देश में लागू करने

के संबंध में उपयुक्त आदेश पारित करेगी।


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