बांग्लादेश हाईकोर्ट से चिन्मय कृष्ण दास को झटका, जमानत याचिका खारिज

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बांग्लादेश हाईकोर्ट ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका खारिज की। वकील हत्या और राजद्रोह मामले में चल रहे ट्रायल का हवाला दिया गया।


हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को हाईकोर्ट से राहत नहीं

High Court Division of the Supreme Court of Bangladesh ने हिंदू संत Chinmoy Krishna Das की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ निचली अदालत में गंभीर आपराधिक मुकदमे की सुनवाई जारी है, इसलिए फिलहाल राहत नहीं दी जा सकती।


वकील की हत्या मामले में चल रहा ट्रायल

चिन्मय कृष्ण दास पर 2024 में चटगांव में हुए एक वकील की हत्या मामले में आरोप तय किए जा चुके हैं। अदालत ने इसी लंबित ट्रायल का हवाला देते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज की।

दास के साथ इस मामले में 38 अन्य लोगों पर भी मुकदमा चल रहा है। जनवरी 2026 में Chattogram Divisional Speedy Trial Tribunal ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया था।


राजद्रोह मामले में हुई थी गिरफ्तारी

चिन्मय कृष्ण दास, जो Bangladesh Sammilita Sanatani Jagran Jote के प्रवक्ता हैं, को 25 नवंबर 2024 को ढाका के Hazrat Shahjalal International Airport से गिरफ्तार किया गया था।

उन पर कथित तौर पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के अपमान और राजद्रोह से जुड़े आरोप लगाए गए थे।


जमानत खारिज होने के बाद भड़की थी हिंसा

गिरफ्तारी के बाद चटगांव की एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके विरोध में उनके समर्थकों ने ढाका और अन्य हिस्सों में प्रदर्शन किए। अगले दिन चटगांव में हिंसा भड़क गई, जिसमें जूनियर सरकारी वकील Saiful Islam Alif की मौत हो गई।

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पहले मिली थी राहत, फिर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

इससे पहले अप्रैल 2025 में हाईकोर्ट ने राजद्रोह मामले में चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दे दी थी। हालांकि बाद में Appellate Division of the Supreme Court of Bangladesh ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी।


ISKCON से जुड़ा रहा है नाम

चिन्मय कृष्ण दास पहले International Society for Krishna Consciousness से जुड़े रहे हैं। बाद में उन्होंने अलग संगठन के जरिए हिंदू समुदाय के मुद्दों को लेकर आंदोलन शुरू किया।


शेख हसीना सरकार हटने के बाद तेज हुए प्रदर्शन

2024 में पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina के सत्ता से हटने के बाद दास के संगठन ने कई रैलियां आयोजित की थीं। इन प्रदर्शनों में हिंदू समुदाय पर कथित हमलों और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई गई थी।


भारत-बांग्लादेश संबंधों में भी उठा मुद्दा

चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और हिरासत का मुद्दा भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों में भी चर्चा का विषय बना। India ने पहले उनकी सुरक्षा और हिरासत को लेकर चिंता जताई थी।


बांग्लादेश में हिंदू आबादी

2022 के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 17 करोड़ आबादी वाले Bangladesh में हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत है।


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