NEET-UG पेपर लीक के विरोध में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने ‘Save Democracy, Save Constitution’ प्रदर्शन किया। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया। केंद्र सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत का निमंत्रण दोहराया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने की घोषणा की।
सुप्रीम कोर्ट परिसर में वकीलों का प्रदर्शन
NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के कई अधिवक्ताओं ने “Save Democracy, Save Constitution” अभियान के तहत प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन जंतर-मंतर पर छात्रों के समर्थन में आयोजित विरोध कार्यक्रम के समर्थन में किया गया।
प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट परिसर के लॉन में भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का सामूहिक पाठ किया गया।
इंदिरा जयसिंह ने क्या कहा?
मीडिया से बातचीत में वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि वकील छात्रों के अधिकारों और न्याय की मांग के समर्थन में खड़े हैं।
उन्होंने कहा,
“हम यहां छात्रों के साथ खड़े होने, न्याय की मांग करने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आए हैं। यह हमारा व्यक्तिगत आंदोलन नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों और न्याय के पक्ष में वकीलों का कर्तव्य है।”
पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस. मुरलीधर भी हुए शामिल
उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।
उन्होंने कहा,
“हम उन सभी छात्रों के साथ खड़े हैं जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और हम सभी के लिए न्याय चाहते हैं।”
देशभर में जारी हैं प्रदर्शन
यह प्रदर्शन 20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों की कड़ी में हुआ।
दिल्ली सहित कई शहरों में छात्रों और समर्थकों द्वारा प्रदर्शन किए गए। इस दौरान पुलिस कार्रवाई भी हुई और पुलिस के अनुसार कई एफआईआर दर्ज की गईं।
नोट: उपलब्ध रिपोर्टों में जिस संगठन का नाम “Cockroach Janata Party (CJP)” बताया गया है, उसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस नाम का उल्लेख केवल रिपोर्टों में किए गए दावे के आधार पर किया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने बातचीत का निमंत्रण दोहराया
इस बीच केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए चार बार औपचारिक प्रस्ताव भेजे हैं।
जितेंद्र सिंह ने कहा,
“सरकार प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बना रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और मैं स्वयं चर्चा के लिए उपलब्ध रहेंगे। सरकार सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है।”
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के लिए आगे आएं।
छात्र पक्ष का जवाब
रिपोर्ट के अनुसार, छात्र आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें सरकार की ओर से बातचीत का कोई औपचारिक संदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत के लिए तैयार हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें (Fast-Track Courts) स्थापित की जाएंगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक में शामिल दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मामले का महत्व
NEET-UG पेपर लीक विवाद अब केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों से जुड़े व्यापक सार्वजनिक विमर्श का विषय बन चुका है। एक ओर छात्र न्याय और परीक्षा सुधार की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार ने संवाद और कानूनी कार्रवाई दोनों का आश्वासन दिया है।
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