विश्वास मत से रोक पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची TVK, मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को दी चुनौती

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तमिलनाडु के तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव परिणाम से जुड़ा है, जहां श्रीनिवास सेतुपति ने कथित रूप से केवल एक वोट के अंतर से जीत हासिल की

तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने अपने विधायक श्रीनिवास सेतुपति को विश्वास मत में भाग लेने से रोकने वाले मद्रास हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामला डाक मतपत्र में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है।

Supreme Court of India में मंगलवार को Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने मद्रास हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी, जिसमें पार्टी विधायक Srinivasa Sethupathi को विधानसभा के विश्वास मत में भाग लेने से रोक दिया गया था।

TVK का नेतृत्व मुख्यमंत्री C Joseph Vijay कर रहे हैं। पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Abhishek Manu Singhvi ने दोपहर करीब 2:45 बजे मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया।

पीठ ने मामले को 13 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

डाक मतपत्र में गड़बड़ी के आरोप से जुड़ा विवाद

मामला तमिलनाडु के तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव परिणाम से जुड़ा है, जहां श्रीनिवास सेतुपति ने कथित रूप से केवल एक वोट के अंतर से जीत हासिल की थी।

पूर्व DMK मंत्री KR Periyakaruppan ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि डाक मतपत्र (postal ballot) के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुईं।

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याचिका में दावा किया गया कि तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 185 के लिए डाला गया एक डाक मतपत्र कथित रूप से वेल्लोर जिले के तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 50 में ट्रांसफर कर दिया गया।

चुनाव आयोग पर कार्रवाई न करने का आरोप

पेरियाकरुप्पन ने अदालत को बताया कि उन्होंने इस कथित गड़बड़ी की शिकायत Election Commission of India से की थी, लेकिन आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट में कहा कि मतगणना शुरू होने के बाद यदि डाक मतपत्र से संबंधित शिकायत प्राप्त होती है, तो नियमों के अनुसार कोई कार्रवाई आवश्यक नहीं होती।

आयोग ने यह भी कहा कि किसी भी डाक मतपत्र को एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित नहीं किया गया।

हाईकोर्ट ने कहा- शिकायत के समर्थन में पर्याप्त सामग्री

हालांकि Madras High Court ने माना कि शिकायत के समर्थन में पर्याप्त प्रथमदृष्टया सामग्री मौजूद है।

इसके बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए श्रीनिवास सेतुपति को आगामी विश्वास मत में विधायक के रूप में भाग लेने से रोक दिया।

अदालत ने सभी डाक मतपत्रों को सुरक्षित रखने और संबंधित वीडियो फुटेज संरक्षित करने का भी निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट में TVK की चुनौती

TVK ने अब हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पार्टी का तर्क है कि किसी निर्वाचित विधायक को विश्वास मत जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया में भाग लेने से रोकना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

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याचिका अधिवक्ता Dixita Gohil, Pranjal Agarwal, Rupali Samuel और Yash S Vijay के माध्यम से दायर की गई है।

राजनीतिक और संवैधानिक महत्व का मामला

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला केवल चुनावी विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकार, डाक मतपत्रों की पारदर्शिता और विश्वास मत जैसी संवैधानिक प्रक्रियाओं पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि श्रीनिवास सेतुपति विश्वास मत में भाग ले पाएंगे या नहीं।

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