498A का दुरुपयोग रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के “कूलिंग पीरियड” दिशानिर्देशों को पूरे भारत में लागू करने का आदेश दिया

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To prevent misuse of 498A, Supreme Court orders implementation of Allahabad High Court’s “cooling period” guidelines across India

IPS अधिकारी के तलाक मामले में अनुच्छेद 142 के तहत वैवाहिक संबंध समाप्त, सभी आपराधिक और दीवानी मामले रद्द


नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला IPS अधिकारी के तलाक प्रकरण की सुनवाई करते हुए न केवल वैवाहिक संबंधों को समाप्त किया, बल्कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के दुरुपयोग को रोकने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2022 में जारी दिशानिर्देशों को राष्ट्रव्यापी तौर पर लागू करने का आदेश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।


⚖️ मामले की पृष्ठभूमि

  • विवाह वर्ष: 2015
  • पार्टियों के बीच अलगाव: 2018
  • संतान: एक 8 वर्षीय बेटी
  • दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के विरुद्ध घरेलू हिंसा, 498A, आईपीसी, हिंदू विवाह अधिनियम इत्यादि के तहत कई मुकदमे दायर किए थे, जिनमें से कई अब भी लंबित हैं।

पति और उसके पिता को हुई जेल: 109 व 103 दिन की हिरासत

कोर्ट ने यह पाया कि पत्नी की ओर से दर्ज मामलों के कारण पति को 109 दिन और उसके पिता को 103 दिन जेल में रहना पड़ा।
पीठ ने कहा:

“जो कष्ट उन्होंने झेले, उसकी भरपाई किसी भी रूप में नहीं की जा सकती।”


📰 सार्वजनिक माफीनामा और सोशल मीडिया पर प्रसारण का आदेश

कोर्ट ने निर्देश दिया कि महिला और उसके माता-पिता को बिना शर्त माफीनामा पति व उसके परिवार से करना होगा और यह माफीनामा:

  • एक राष्ट्रीय अंग्रेजी अखबार
  • एक राष्ट्रीय हिंदी अखबार
  • Facebook, Instagram, YouTube जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स
    पर प्रसारित किया जाएगा।
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🔒 पति को पुलिस सुरक्षा, पत्नी को शक्तियों के दुरुपयोग से रोका गया

कोर्ट ने पति और उसके परिवार को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया, साथ ही यह सख्त आदेश भी पारित किया कि:

“पत्नी IPS अधिकारी होने के नाते अपने पद, अधिकारियों या परिचितों की शक्ति का किसी प्रकार से पति या उसके परिवार के खिलाफ दुरुपयोग नहीं करेगी।”


⚖️ अनुच्छेद 142 के तहत विवाह विच्छेद और मुकदमों की समाप्ति

संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने असाधारण अधिकारों का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने:

  • वैवाहिक संबंध समाप्त कर दिए
  • दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के विरुद्ध दायर सभी आपराधिक व दीवानी मामलों को निरस्त कर दिया

📜 498A से जुड़ी पुलिस कार्रवाई पर “कूलिंग पीरियड” अनिवार्य

कोर्ट ने आदेश दिया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश दिनांक 13.06.2022 (क्रिमिनल रिवीजन 1126/2022) के पैरा 32 से 38 तक जारी दिशानिर्देश अब पूरे देश में लागू होंगे

“498A में FIR दर्ज होने के बाद 2 महीने का ‘कूलिंग पीरियड’ अनिवार्य होगा। इस अवधि में:

  • कोई गिरफ्तारी नहीं होगी
  • मामला फैमिली वेलफेयर कमेटी को सौंपा जाएगा
  • कमेटी की रिपोर्ट मिलने पर ही आगे की पुलिस कार्रवाई संभव होगी”

🧑‍⚖️ महत्वपूर्ण निर्देशों की झलक

  • सभी जिलों में फैमिली वेलफेयर कमेटी गठित की जाएगी
  • इन कमेटियों में स्वतंत्र सामाजिक कार्यकर्ता/एनजीओ प्रतिनिधि होंगे
  • FIR या शिकायत दर्ज होने के बाद, तुरंत मामला कमेटी को भेजा जाएगा
  • कूलिंग पीरियड के पहले कोई गिरफ्तारी या चार्जशीट नहीं होगी
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📝 न्यायालय की टिप्पणी: “अब न्यायिक प्रक्रिया में संतुलन ज़रूरी है”

सुप्रीम कोर्ट ने यह संकेत दिया कि अब समय आ गया है जब वैवाहिक अपराधों की जांच में संयम और संतुलन ज़रूरी हो गया है, ताकि निर्दोष पक्षों को प्रताड़ित होने से बचाया जा सके।


🔚 फैसले का प्रभाव

यह आदेश न केवल संबंधित पक्षों के लिए न्याय लाता है, बल्कि भविष्य में 498A के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए एक बड़ी कानूनी मिसाल के रूप में देखा जाएगा।


मामला: A v. B
Neutral Citation: 2025 INSC 883

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