सुप्रीम कोर्ट ने बृंदा करात की पुनर्विचार याचिका खारिज की, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ हेट स्पीच मामले में राहत बरकरार

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सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े कथित हेट स्पीच मामले में CPI(M) नेता बृंदा करात की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के भाषणों से कोई संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया नहीं बनता।


सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के दौरान कथित हेट स्पीच मामले में भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को मिली राहत बरकरार रखते हुए CPI(M) नेता बृंदा करात की पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसके 29 अप्रैल के फैसले में ऐसा कोई स्पष्ट त्रुटि (error apparent) नहीं है, जिसके आधार पर उस पर दोबारा विचार किया जाए।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने 29 जुलाई को चैंबर में सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने बृंदा करात की उस अर्जी को भी खारिज कर दिया, जिसमें रिव्यू याचिका पर खुली अदालत (ओपन कोर्ट) में सुनवाई की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

पीठ ने अपने आदेश में कहा,

“रिव्यू याचिका को ओपन कोर्ट में सूचीबद्ध करने का आवेदन खारिज किया जाता है। हमने रिव्यू याचिका और उसके समर्थन में दिए गए आधारों का अवलोकन किया है। हमें चुनौती दिए गए फैसले में ऐसी कोई त्रुटि, विशेषकर कोई स्पष्ट त्रुटि, नहीं मिली जो पुनर्विचार को उचित ठहराए।”

29 अप्रैल के फैसले में क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट ने 29 अप्रैल के अपने फैसले में बृंदा करात की अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा था कि मजिस्ट्रेट द्वारा जांच का आदेश देने के पूर्व-संज्ञान (pre-cognisance) चरण में अभियोजन स्वीकृति (Sanction) आवश्यक नहीं होती।

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हालांकि, अदालत ने अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के भाषणों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण करने के बाद निष्कर्ष निकाला था कि उनसे कोई संज्ञेय अपराध (Cognisable Offence) प्रथम दृष्टया नहीं बनता। इसलिए एफआईआर दर्ज कराने का कोई आधार नहीं है।

मामला क्या है?

CPI(M) नेताओं बृंदा करात और के.एम. तिवारी ने दिल्ली हाई कोर्ट के 13 जून 2022 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था, जिसमें अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ कथित भड़काऊ भाषणों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने से मना कर दिया गया था।

हाई कोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामले में कानून के अनुसार सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक स्वीकृति जरूरी है। साथ ही, दिल्ली पुलिस की प्रारंभिक जांच में भी प्रथम दृष्टया कोई संज्ञेय अपराध नहीं पाया गया था।

किन बयानों पर विवाद हुआ था?

यह मामला 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव और उस दौरान चल रहे नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोध प्रदर्शनों के समय दिए गए भाषणों से जुड़ा है।

बृंदा करात ने आरोप लगाया था कि:

  • अनुराग ठाकुर ने 27 जनवरी 2020 की एक चुनावी रैली में “देश के गद्दारों को, गोली मारो…” का नारा लगाया था।
  • प्रवेश वर्मा ने शाहीन बाग प्रदर्शनकारियों को “घुसपैठिया” बताते हुए कहा था कि वे “घरों में घुसकर बेटियों और बहनों के साथ दुष्कर्म करेंगे और लोगों की हत्या करेंगे।”
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इन्हीं बयानों को आधार बनाकर दोनों नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार स्तर पर भी अस्वीकार कर दिया।

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