ताजमहल-तेजो महालय विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र और ASI से मांगा जवाब, सर्वे की मांग पर नोटिस जारी

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ताजमहल तेजो महालय विवाद

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल को ‘तेजो महालय’ मंदिर बताए जाने संबंधी मामले में केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जवाब मांगा है। अदालत ने परिसर के वैज्ञानिक सर्वे और फोटोग्राफी की मांग से जुड़ी याचिका पर नोटिस जारी करते हुए काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया।


ताजमहल-तेजो महालय विवाद में हाईकोर्ट की दखल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल परिसर में कथित ‘तेजो महालय’ मंदिर के दावे से जुड़े लंबे समय से लंबित कानूनी विवाद में हस्तक्षेप करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें निचली अदालतों द्वारा परिसर के सर्वेक्षण और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने से इनकार किए जाने को चुनौती दी गई है।


प्रतिवादी को भी जारी किया नोटिस

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI के अलावा मामले के प्रतिवादी पंकज कुमार वर्मा को भी औपचारिक नोटिस जारी किया है और संबंधित पक्षों से काउंटर एफिडेविट दाखिल करने को कहा है।


क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद वर्ष 2015 में आगरा की सिविल अदालत में दायर एक घोषणात्मक वाद (Declaratory Suit) से जुड़ा है।

वाद में याचिकाकर्ताओं, जो स्वयं को ‘भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर’ का प्रतिनिधि बताते हैं, ने अदालत से ताजमहल परिसर को मंदिर स्थल के रूप में कानूनी मान्यता देने की मांग की है।

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सर्वे और फोटोग्राफी की मांग क्यों की गई?

आगरा की अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने एक आवेदन दाखिल कर परिसर का सर्वेक्षण कराने तथा उसकी वैज्ञानिक फोटोग्राफी के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने का अनुरोध किया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इससे विवादित संरचना की ऐतिहासिक प्रकृति का पता लगाने में सहायता मिलेगी।


निचली अदालतों ने याचिका क्यों खारिज की?

ट्रायल कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग को खारिज कर दिया था।

इसके बाद दायर पुनरीक्षण याचिका (Revision) को भी अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने विचारणीय (Maintainable) न मानते हुए खारिज कर दिया।

इन्हीं आदेशों को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।


याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में दलील दी कि निचली अदालतों ने उनकी मांग को खारिज कर कानूनी त्रुटि की है।

उन्होंने कहा कि विवाद के निष्पक्ष और अंतिम समाधान के लिए परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण और फोटोग्राफिक रिकॉर्ड अत्यंत आवश्यक है।


हाईकोर्ट के आदेश का महत्व

इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब मामले में अगला चरण केंद्र सरकार और ASI की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब पर केंद्रित होगा।

अदालत द्वारा काउंटर एफिडेविट तलब किए जाने के साथ ही प्रस्तावित सर्वेक्षण की मांग पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।


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