अगस्ता वेस्टलैंड केस में क्रिश्चियन मिशेल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

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अगस्ता वेस्टलैंड VVIP चॉपर घोटाले केस में क्रिश्चियन मिशेल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

अगस्ता वेस्टलैंड VVIP चॉपर घोटाले में आरोपी क्रिश्चियन मिशेल की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। जानिए मामले की पूरी कानूनी पृष्ठभूमि।


🔴 सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अगस्ता वेस्टलैंड VVIP हेलीकॉप्टर घोटाले के आरोपी ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र और अन्य पक्षों से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।


⚖️ हिरासत को दी चुनौती, रिहाई की मांग

मिशेल ने अपनी याचिका में दलील दी है कि वह उन अपराधों के लिए अधिकतम निर्धारित सजा से अधिक समय जेल में बिता चुका है, जिनके लिए उसे प्रत्यर्पित (extradite) किया गया था।

उन्होंने कहा कि 2018 में दुबई से भारत लाए जाने के बाद से वह सात साल से अधिक समय से हिरासत में हैं, जो कथित अपराधों के लिए तय अधिकतम सजा से ज्यादा है।


📜 प्रत्यर्पण संधि और ‘डॉक्ट्रिन ऑफ स्पेशियलिटी’ पर विवाद

याचिका में मिशेल ने भारत-यूएई प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 17 को चुनौती दी है। यह प्रावधान “संबद्ध अपराधों” (connected offences) के लिए अभियोजन की अनुमति देता है।

मिशेल का तर्क है कि यह प्रावधान प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 की धारा 21 में निहित ‘डॉक्ट्रिन ऑफ स्पेशियलिटी’ के खिलाफ है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को केवल उन्हीं अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है, जिनके लिए उसे प्रत्यर्पित किया गया हो।

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⏳ अधिकतम सजा से ज्यादा हिरासत का दावा

मिशेल ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जो आरोप हैं, उनमें अधिकतम सजा पांच वर्ष है, जबकि वह इससे अधिक समय जेल में बिता चुके हैं।

उनका कहना है कि प्रत्यर्पण संधि के प्रावधानों के कारण उनकी हिरासत अनावश्यक रूप से लंबी हो गई है।


🏛️ दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती

इससे पहले, 8 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट ने मिशेल की रिहाई की याचिका खारिज कर दी थी और भारत-यूएई प्रत्यर्पण संधि के संबंधित प्रावधान को वैध ठहराया था। अब मिशेल ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।


🚁 3600 करोड़ के वीवीआईपी चॉपर घोटाले का मामला

क्रिश्चियन मिशेल को 2018 में दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था। वह 3,600 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड VVIP हेलीकॉप्टर सौदे में कथित बिचौलिये के रूप में आरोपी हैं।

सीबीआई के अनुसार, 2010 में हुए इस सौदे में सरकारी खजाने को लगभग 398.21 मिलियन यूरो (करीब 2666 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ।

बाद में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2016 में दाखिल आरोपपत्र में आरोप लगाया कि मिशेल को इस सौदे में लगभग 30 मिलियन यूरो (करीब 225 करोड़ रुपये) की कथित रिश्वत मिली।


📊 सुप्रीम कोर्ट में उठे अहम कानूनी सवाल

यह मामला कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों को सामने लाता है—

  • क्या प्रत्यर्पण के बाद आरोपी को “संबद्ध अपराधों” में भी अभियोजित किया जा सकता है?
  • क्या अधिकतम सजा अवधि पूरी होने के बाद भी हिरासत जारी रह सकती है?
  • क्या अंतरराष्ट्रीय संधियां घरेलू कानून के सिद्धांतों से ऊपर हो सकती हैं?
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इन सवालों पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय भविष्य के प्रत्यर्पण मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।


🌐 आगे क्या?

अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है, जहां केंद्र सरकार अपना पक्ष रखेगी। यह मामला न केवल एक हाई-प्रोफाइल घोटाले से जुड़ा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है।


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