विवादित शंकराचार्य पदनाम मामले में सिविल कोर्ट की बड़ी अनुमति, यूपी सरकार समेत अन्य होंगे पक्षकार

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यूपी सरकार, जिला प्रशासन और मेला प्राधिकरण बनाए गए प्रतिवादी

विवादित शंकराचार्य पदनाम मामला

प्रयागराज की सिविल कोर्ट ने ज्योतिषपीठ जोशीमठ की ओर से दायर विवादित शंकराचार्य पदनाम मामले में उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और अन्य के खिलाफ सिविल वाद चलाने की अनुमति दे दी है। जानिए पूरा मामला।


विवादित शंकराचार्य पदनाम मामले में वाद चलाने की अनुमति, यूपी सरकार समेत अन्य होंगे पक्षकार

प्रयागराज। प्रयागराज की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने ज्योतिषपीठ जोशीमठ बदरिकाश्रम एवं भगवान श्री बद्रीनारायण की ओर से दायर सिविल वाद में उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति प्रदान कर दी है। यह मामला विवादित शंकराचार्य पदनाम के उपयोग और उससे जुड़ी प्रशासनिक मान्यता से संबंधित है।


यूपी सरकार, जिला प्रशासन और मेला प्राधिकरण बनाए गए प्रतिवादी

अदालत के समक्ष दायर वाद में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख गृह सचिव, जिलाधिकारी प्रयागराज, महाकुंभ/माघ मेला प्राधिकरण के मेला अधिकारी तथा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रतिवादी बनाया गया है।


क्या है पूरा विवाद?

वादियों का कहना है कि उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों के बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य बताकर प्रशासनिक मान्यता प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह कदम पूर्व न्यायिक आदेशों की भावना के विपरीत है और इससे धार्मिक एवं प्रशासनिक विवाद उत्पन्न हो रहा है।

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अदालत ने वाद चलाने की दी अनुमति

सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को सुनवाई योग्य मानते हुए वाद चलाने की अनुमति प्रदान कर दी है।

इसके साथ ही अदालत ने अधिवक्ता आशुतोष ब्रह्मचारी और ठाकुर सुधांशु सोम को वाद में पैरवी करने की अनुमति भी दी है।


अब आगे क्या होगा?

वाद स्वीकार होने के बाद अब अदालत संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुनेगी। इसके बाद न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर मामले में आगे की सुनवाई करेगा।


फैसले का महत्व

यह मामला धार्मिक संस्थाओं की वैधानिक मान्यता, शंकराचार्य पद के अधिकार और प्रशासनिक स्वीकृति से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों से संबंधित है। अदालत द्वारा वाद स्वीकार किए जाने के बाद इस विवाद पर न्यायिक प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगी।


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