पत्नी की टिप्पणी को माना ‘गंभीर और अचानक उकसावा’, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उम्रकैद घटाकर 7 साल की सजा की

Like to Share

“मैं तुम्हारे जैसे हजारों पति रख सकती हूं।”

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट हत्या मामला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सात महीने की गर्भवती पत्नी की हत्या के मामले में आरोपी की उम्रकैद की सजा घटाकर 7 साल के कठोर कारावास में बदल दी। अदालत ने कहा कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी और पत्नी की टिप्पणी से आरोपी को गंभीर एवं अचानक उकसावा मिला था।


पत्नी की हत्या के मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने सात महीने की गर्भवती पत्नी की हत्या के मामले में दोषी पति को दी गई उम्रकैद की सजा घटाकर सात वर्ष के कठोर कारावास में बदल दी।

अदालत ने माना कि यह घटना पूर्व नियोजित हत्या नहीं थी, बल्कि पति-पत्नी के बीच हुए विवाद के दौरान गंभीर और अचानक उकसावे (Grave and Sudden Provocation) के कारण हुई थी।


किन जजों ने सुनाया फैसला?

18 जून को न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।

पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी ने हत्या की कोई पूर्व योजना नहीं बनाई थी।


पत्नी की टिप्पणी को माना गंभीर उकसावा

अदालत ने घटना के दौरान पत्नी द्वारा कही गई उस टिप्पणी पर विशेष ध्यान दिया, जिसमें उसने कथित तौर पर अपने पति से कहा था—

“मैं तुम्हारे जैसे हजारों पति रख सकती हूं।”

हाईकोर्ट ने कहा कि यह कथन पति के सम्मान और गरिमा पर सीधा प्रहार था। अदालत के अनुसार, इस प्रकार की टिप्पणी को कानून की दृष्टि में “गंभीर और अचानक उकसावा” माना जा सकता है।

Must Read -  किसी तीसरे पक्ष को ARTICLE 136 के तहत आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने को चुनौती देने के लिए विशेष अनुमति याचिका दायर करने का अधिकार - SUPREME COURT

पीठ ने कहा कि यह कथन पति की क्षमता और सम्मान पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी करता है, जिससे तत्काल उकसावे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।


घटना पूर्व नियोजित नहीं थी

अदालत ने पाया कि आरोपी ने घटना को पहले से योजनाबद्ध तरीके से अंजाम नहीं दिया था।

फैसले के अनुसार, विवाद के दौरान उसने मौके पर पड़ा पत्थर उठाकर वार किया। घटना के बाद उसने स्वयं अपने ससुर को इसकी जानकारी दी और पुलिस को भी सूचना दी।

पीठ ने कहा कि ये परिस्थितियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि अपराध पूर्व नियोजित नहीं था।


क्या है पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 18 सितंबर 2021 को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के चौरई ब्लॉक निवासी शिव कहार ने अपनी पत्नी किरण की पत्थर से सिर पर वार कर हत्या कर दी थी।

घटना के समय किरण सात महीने की गर्भवती थीं।


आरोपी ने क्या बताया?

अपने बयान में शिव कहार ने कहा कि घटना वाले दिन पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था।

उसका कहना था कि विवाद के दौरान पत्नी ने कथित रूप से कहा—

“मैं तुम्हारे जैसे हजार पति रख सकती हूं।”

इस टिप्पणी से आक्रोशित होकर उसने पास पड़ा पत्थर उठाकर पत्नी के सिर पर वार कर दिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।


निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद

छिंदवाड़ा की ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

Must Read -  वकीलों में सजा के निलंबन के लिए आवेदन पर जोर देने और गुण-दोष के आधार पर अपील पर बहस करने से बचने की प्रवृत्ति: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में सजा निलंबित करने से किया इनकार

हालांकि, हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए माना कि यह मामला पूर्व नियोजित हत्या का नहीं है और भारतीय दंड कानून में गंभीर एवं अचानक उकसावे के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए सजा में संशोधन किया जाना उचित है।


हाईकोर्ट का निष्कर्ष

हाईकोर्ट ने आरोपी की अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि उसने पूर्व नियोजित तरीके से हत्या करने का इरादा बनाया था।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उसकी उम्रकैद की सजा को घटाकर सात वर्ष के कठोर कारावास में परिवर्तित कर दिया।


Tags

#MadhyaPradeshHighCourt #JabalpurHighCourt #MurderCase #GraveAndSuddenProvocation #CriminalLaw #Chhindwara #LegalNews #मध्यप्रदेश_हाईकोर्ट #जबलपुर_हाईकोर्ट #हत्या_मामला #गंभीर_और_अचानक_उकसावा #आपराधिक_कानून #छिंदवाड़ा #कानूनी_समाचार

Leave a Comment