शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के शिंदे गुट में विलय पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, लोकसभा अध्यक्ष से मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय को मान्यता देने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। अदालत ने फिलहाल विलय पर रोक लगाने से इनकार करते हुए दो सप्ताह में जवाब मांगा।


सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) [UBT] की उस याचिका पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, लोकसभा सचिवालय और शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों को नोटिस जारी किया, जिसमें उनके विलय को मान्यता देने के फैसले को चुनौती दी गई है।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की खंडपीठ ने फिलहाल विलय पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए सभी प्रतिवादियों से जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।


क्या है पूरा मामला?

18 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मान्यता दे दी थी।

मान्यता मिलने के बाद—

  • शिंदे गुट के लोकसभा सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई।
  • वहीं शिवसेना (UBT) की लोकसभा में संख्या घटकर 3 सांसद रह गई।

किन सांसदों के विलय को मिली मान्यता?

लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार निम्न छह सांसदों के विलय को मान्यता दी गई—

  • संजय जाधव
  • संजय पाटिल
  • संजय देशमुख
  • ओमराजे निंबालकर
  • नागेश पाटिल अष्टीकर
  • भाऊसाहेब वाकचौरे
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UBT की ओर से क्या दलील दी गई?

शिवसेना (UBT) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मामला संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) और संवैधानिक शुचिता (Constitutional Propriety) से जुड़ा है।

उन्होंने अदालत से कहा—

  • ये छह सांसद शिवसेना (UBT) के चुनाव चिन्ह पर निर्वाचित हुए थे।
  • उनके विरुद्ध कोई अयोग्यता (Disqualification) की कार्यवाही लंबित नहीं है।
  • ऐसे में विलय का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता।

लोकसभा अध्यक्ष के आदेश पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि—

  • विलय संबंधी सूचना केवल लोकसभा सचिवालय के एक संयुक्त सचिव (Joint Secretary) द्वारा हस्ताक्षरित परिपत्र के माध्यम से जारी की गई।
  • यह स्पष्ट नहीं है कि स्वयं लोकसभा अध्यक्ष ने कोई औपचारिक आदेश पारित किया था या नहीं।

इस आधार पर याचिका में विलय की वैधता पर प्रश्न उठाया गया है।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने—

  • लोकसभा अध्यक्ष,
  • लोकसभा सचिवालय,
  • तथा शिंदे गुट में शामिल छह सांसदों

को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

हालांकि, अदालत ने इस चरण पर विलय पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया और मामले को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।


अभी अंतिम फैसला नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।

अदालत ने केवल याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। छह सांसदों के विलय की वैधता पर अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई के बाद किया जाएगा।

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