चार्जशीट में मृत व्यक्ति का बयान कैसे दर्ज हुआ? पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस से मांगी जवाबदेही, CBI जांच के दिए संकेत

Like to Share

चार्जशीट में मृत व्यक्ति का बयान

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चार्जशीट में मृत व्यक्ति का बयान शामिल किए जाने के मामले में जांच अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। अदालत ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त से हलफनामा मांगा और चेतावनी दी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है।


मामला क्या है?

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले की जांच में सामने आई गंभीर अनियमितता पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।

मामले में आरोप है कि चार्जशीट में ऐसे व्यक्ति का बयान शामिल किया गया, जिसकी कथित बयान दर्ज होने की तारीख से कई महीने पहले ही मृत्यु हो चुकी थी।

न्यायमूर्ति सुमीत गोयल की एकलपीठ ने इस मामले को गंभीर मानते हुए जांच और उसकी निगरानी करने वाले अधिकारियों का पूरा विवरण मांगा है।


हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद लुधियाना के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (IPS) रूपिंदर सिंह को निर्देश दिया गया कि वे शपथपत्र (हलफनामा) दाखिल कर बताएं—

  • संबंधित एफआईआर की जांच किन अधिकारियों ने की,
  • जांच की निगरानी किन-किन अधिकारियों ने की,
  • और इस पूरी जांच प्रक्रिया के लिए कौन-कौन जिम्मेदार था।

चार्जशीट में क्या गंभीर विसंगति मिली?

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि—

  • पुलिस ने चालान (चार्जशीट) में 19 सितंबर 2025 का एक बयान शामिल किया।
  • जबकि जिस व्यक्ति का यह बयान बताया गया, उसकी मृत्यु 29 मई 2025 को ही हो चुकी थी।
Must Read -  SUPREME COURT ने अवैध लौह अयस्क निर्यात के खिलाफ CBI के मामले को रद्द करने के कर्नाटक HC के आदेश को खारिज कर दिया

यानी कथित बयान दर्ज होने की तारीख से लगभग चार महीने पहले ही उस व्यक्ति का निधन हो चुका था।


हाईकोर्ट ने क्या टिप्पणी की?

इससे पहले सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस विसंगति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा था कि—

चार्जशीट में ऐसे व्यक्ति का बयान शामिल किया जाना, जिसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी, पूरी तरह समझ से परे है।

अदालत ने इस मामले में पुलिस से स्पष्ट और संतोषजनक स्पष्टीकरण मांगा है।


CBI जांच की संभावना भी जताई

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य पुलिस इस गंभीर विसंगति का संतोषजनक जवाब देने में विफल रहती है, तो अदालत मामले की आगे की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने पर भी विचार कर सकती है।


पुलिस ने क्या कदम उठाया?

अदालत को बताया गया कि मामले में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद—

  • लुधियाना पुलिस आयुक्त ने 6 मई को
  • डीआईजी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में
  • चार सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

यह एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है।


अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं

हाईकोर्ट ने अभी इस मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है।

फिलहाल अदालत ने जांच अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए विस्तृत हलफनामा मांगा है। राज्य पुलिस के जवाब के आधार पर अदालत यह तय करेगी कि मामले की जांच पुलिस के पास रहेगी या इसे सीबीआई को सौंपने की आवश्यकता है।

Must Read -  अस्थायी नियुक्ति को स्थायी बनाया जा सकता है परन्तु एक बार चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद: सुप्रीम कोर्ट

Tags

#PunjabAndHaryanaHighCourt #Chargesheet #CBI #PoliceInvestigation #MurderCase #SIT #CriminalLaw #LegalNews #पंजाबहरियाणाहाईकोर्ट #चार्जशीट #मृतव्यक्तिकाबयान #सीबीआई #पुलिसजांच #हत्यामामला #एसआईटी #आपराधिककानून #कानूनीसमाचार

Leave a Comment