दिल्ली विरोध प्रदर्शनों में पुलिस ज्यादती की जांच: सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी को एक महीने में प्रारंभिक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती की जांच कर रही हाई-पावर्ड कमेटी को एक महीने में प्रारंभिक तथ्य-जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि कमेटी शिकायतों का इंतजार करते हुए जांच अनिश्चितकाल तक लंबित न रखे।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती की जांच कर रही हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर अपनी प्रारंभिक तथ्य-जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि कमेटी शिकायतों का इंतजार करते हुए अपनी जांच को अनिश्चितकाल तक टाल नहीं सकती। वह अब तक उपलब्ध सामग्री के आधार पर जांच आगे बढ़ा सकती है, संबंधित अधिकारियों से जवाब मांग सकती है और अदालत द्वारा प्राथमिकता के तौर पर पहचाने गए दो मुद्दों पर अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करना शुरू कर सकती है।

उपलब्ध सामग्री के आधार पर जांच आगे बढ़ाए कमेटी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई-पावर्ड कमेटी के पास पहले से उपलब्ध सामग्री के आधार पर जांच शुरू करने में कोई बाधा नहीं है।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं और अन्य संबंधित व्यक्तियों की ओर से पेश वकीलों को भी निर्देश दिया कि उनके पास मौजूद शिकायतें, वीडियो और अन्य साक्ष्य कमेटी को उपलब्ध कराएं।

कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि याचिकाकर्ताओं की ओर से जमा कराई गई सामग्री और वास्तव में कमेटी तक पहुंची सामग्री के बीच अंतर है। कमेटी के पोर्टल और भौतिक माध्यम से बहुत कम शिकायतें प्राप्त हुई थीं।

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पीड़ितों की ओर से वकीलों द्वारा दी गई शिकायतों पर भी विचार हो

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वकील या जनहित से जुड़े व्यक्ति पीड़ितों की ओर से शिकायतें और साक्ष्य कमेटी को उपलब्ध कराते हैं, तो उनकी भी जांच की जानी चाहिए।

इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि प्रत्येक पीड़ित स्वयं कमेटी के समक्ष उपस्थित होकर शिकायत दर्ज कराए।

इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल औपचारिक रूप से प्राप्त शिकायतों की कमी के कारण कथित पुलिस ज्यादती से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों की अनदेखी न हो।

31 अक्टूबर की रिपोर्ट केवल स्टेटस रिपोर्ट थी

पीठ ने कहा कि कमेटी की ओर से 31 अक्टूबर को प्रस्तुत रिपोर्ट केवल जांच की स्थिति बताने वाली रिपोर्ट थी। उसमें आरोपों के संबंध में कोई वास्तविक तथ्यात्मक निष्कर्ष दर्ज नहीं किया गया था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि सामान्य परिस्थितियों में कमेटी को अपने प्रासंगिक निष्कर्ष संबंधित पक्षों के साथ साझा करने चाहिए। हालांकि, असाधारण परिस्थितियों में गोपनीयता बनाए रखने के कारण हो सकते हैं।

दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी को उपलब्ध सामग्री के आधार पर जांच आगे बढ़ाने और एक महीने के भीतर प्रारंभिक तथ्य-जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

मामले को आगे की सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध किया गया है।

मामले का महत्व: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से स्पष्ट है कि कथित पुलिस ज्यादती की जांच केवल शिकायतों की प्रतीक्षा में नहीं रुकेगी। कमेटी को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सक्रिय रूप से जांच करनी होगी और अपने प्रारंभिक निष्कर्ष समयबद्ध तरीके से अदालत के समक्ष रखने होंगे।

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