नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 147 के तहत
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 147 के तहत दोषसिद्धि के बाद भी चेक बाउंस का अपराध कंपाउंड किया जा सकता है। बैंक के साथ One Time Settlement के तहत भुगतान के बाद कोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि रद्द कर उसे बरी कर दिया।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 147 के तहत दोषसिद्धि दर्ज होने के बाद भी अपराध का समझौता (Compounding) किया जा सकता है।
जस्टिस संदीप शर्मा ने आरोपी और शिकायतकर्ता बैंक के बीच One Time Settlement (OTS) के तहत समझौता होने तथा पूरी राशि का भुगतान किए जाने के बाद आरोपी के खिलाफ दर्ज दोषसिद्धि और सजा के आदेश रद्द कर दिए। कोर्ट ने आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के आरोप से बरी कर दिया।
हालांकि, कोर्ट ने आरोपी को मुकदमे के खर्च के रूप में बैंक को 10,000 रुपये देने और चेक की राशि का 5 प्रतिशत हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में कंपाउंडिंग फीस के रूप में जमा करने का निर्देश भी दिया।
चेक बाउंस होने पर ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी एक साल की सजा
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता बैंक ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि आरोपी ने अपनी देनदारी चुकाने के लिए 7,35,375 रुपये का चेक जारी किया था, लेकिन बैंक खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित हो गया।
कानूनी नोटिस मिलने के बावजूद आरोपी ने निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं किया। इसके बाद बैंक ने आरोपी के खिलाफ धारा 138 के तहत न्यायिक कार्यवाही शुरू की।
ट्रायल कोर्ट ने 25 अप्रैल 2023 को आरोपी को दोषी ठहराया और 12 मई 2023 को सजा सुनाते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास के साथ शिकायतकर्ता को 8,70,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
आरोपी ने इस फैसले को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, रोहड़ू के समक्ष चुनौती दी। हालांकि, 19 दिसंबर 2023 को अपील खारिज कर दी गई और ट्रायल कोर्ट की दोषसिद्धि बरकरार रखी गई।
इसके बाद आरोपी ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।
OTS के तहत बैंक को भुगतान, दोनों पक्षों में हुआ समझौता
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पक्षकारों के बीच समझौता हो गया। आरोपी की ओर से अदालत को बताया गया कि शिकायतकर्ता बैंक ने उसके मामले को One Time Settlement Scheme के तहत स्वीकार कर लिया है और उसने समझौते के अनुसार पूरी राशि का भुगतान कर दिया है।
बैंक की ओर से पेश अधिवक्ता सुरेंद्र के. शर्मा ने भी अदालत को बताया कि बैंक ने आरोपी के साथ समझौता कर लिया है और OTS के तहत संबंधित राशि प्राप्त कर ली है। बैंक को आरोपी की दोषसिद्धि और सजा के आदेश रद्द किए जाने तथा उसे बरी किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।
भुगतान की पुष्टि के लिए आरोपी ने बैंक द्वारा 2 सितंबर 2024 को जारी प्रमाणपत्र भी अदालत के रिकॉर्ड पर रखा।
धारा 147 के तहत दोषसिद्धि के बाद भी अपराध कंपाउंड हो सकता है
हाईकोर्ट ने पक्षकारों के बीच हुए समझौते और बैंक की सहमति को ध्यान में रखते हुए कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 147 के तहत अपराध को कंपाउंड करने में कोई बाधा नहीं है।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Damodar S. Prabhu v. Sayed Babalal H. (2010) का भी उल्लेख किया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि धारा 147 के तहत अदालत दोषसिद्धि दर्ज होने के बाद भी चेक बाउंस के अपराध को कंपाउंड कर सकती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब आरोपी ने OTS के तहत पूरी राशि का भुगतान कर दिया है और शिकायतकर्ता बैंक को अपराध कंपाउंड करने पर कोई आपत्ति नहीं है, तो आरोपी की ओर से की गई प्रार्थना स्वीकार की जा सकती है।
दोषसिद्धि और सजा के आदेश रद्द, आरोपी बरी
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत द्वारा पारित दोषसिद्धि एवं सजा के आदेशों को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत लगाए गए आरोप से बरी कर दिया। साथ ही, अंतरिम आदेश, यदि कोई हो, समाप्त कर दिए और जमानत बांड मुक्त कर दिए।
आरोपी को 10,000 रुपये मुकदमे का खर्च और 5% कंपाउंडिंग फीस देनी होगी
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि चूंकि शिकायतकर्ता बैंक को अपनी ही राशि की वसूली के लिए अनावश्यक मुकदमेबाजी करनी पड़ी, इसलिए आरोपी छह सप्ताह के भीतर बैंक को 10,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में अदा करे।
इसके अतिरिक्त, आरोपी को चेक की राशि का 5 प्रतिशत हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में कंपाउंडिंग फीस के रूप में जमा करना होगा। ऐसा निर्धारित अवधि में नहीं करने पर आरोपी को दंडात्मक परिणामों और अदालत की अवमानना की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी द्वारा हाईकोर्ट या ट्रायल कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा की गई कोई भी अतिरिक्त राशि, यदि शेष हो, तो उसके बचत बैंक खाते में वापस भेजी जाए। इसके लिए आरोपी को एक सप्ताह के भीतर बैंक खाते का विवरण उपलब्ध कराना होगा।
मामले का महत्व: यह निर्णय स्पष्ट करता है कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 147 के तहत चेक बाउंस का अपराध दोषसिद्धि के बाद भी कंपाउंड किया जा सकता है। हालांकि, समझौते के साथ कंपाउंडिंग फीस और अन्य लागत संबंधी शर्तों का पालन भी आवश्यक हो सकता है।
#HimachalPradeshHighCourt #हिमाचलप्रदेशहाईकोर्ट #ChequeBounce #चेकबाउंस #Section138NIAct #Section147NIAct #CompoundingOfOffence #OneTimeSettlement #OTS #DamodarSPrabhu #LegalNews #कानूनीखबर
