जस्टिस के.एम. जोसेफ की केंद्र को दो टूक: कॉलेजियम की दोहराई गई सिफारिशें लंबित न रखें, नियुक्ति से इनकार के लिए ठोस कारण जरूरी

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दोहराई गई कॉलेजियम सिफारिश पर क्या बोले जस्टिस जोसेफ?

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस के.एम. जोसेफ ने कहा कि कॉलेजियम द्वारा दोहराई गई जजों की नियुक्ति संबंधी सिफारिशें केंद्र सरकार पर बाध्यकारी हैं। उन्होंने न्यायपालिका-कार्यपालिका के टकराव को खत्म करने, निडर जजों की नियुक्ति और सुप्रीम कोर्ट में स्थायी संविधान पीठ बनाने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस के.एम. जोसेफ ने न्यायिक नियुक्तियों को लेकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के बीच जारी मतभेद पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जब कॉलेजियम किसी न्यायिक नियुक्ति की सिफारिश को दोबारा दोहराता है, तो केंद्र सरकार को उसे अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखना चाहिए। ऐसी सिफारिशों पर नियुक्ति की जानी चाहिए, जब तक कि उसके खिलाफ कोई मजबूत, प्रासंगिक और न्यायिक नियुक्ति से संबंधित ठोस कारण मौजूद न हो।

केरल हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस जोसेफ ने कहा कि Second Judges Case और Third Judges Case का मूल उद्देश्य न्यायपालिका को कार्यपालिका के नियंत्रण से मुक्त रखना और ऐसे न्यायाधीशों की नियुक्ति सुनिश्चित करना था जो स्वतंत्र, निष्पक्ष और निडर हों।

दोहराई गई कॉलेजियम सिफारिश पर क्या बोले जस्टिस जोसेफ?

जस्टिस जोसेफ ने कहा कि यदि कॉलेजियम किसी नाम की सिफारिश करता है और बाद में उसे फिर से दोहराता है, तो सरकार को ऐसी सिफारिश को केवल लंबित नहीं रखना चाहिए। उनके मुताबिक, नियुक्ति से इनकार तभी उचित हो सकता है जब उसके पीछे वास्तव में मजबूत और प्रासंगिक कारण हो।

उनका यह बयान न्यायिक नियुक्तियों की उस संवैधानिक व्यवस्था की ओर ध्यान आकर्षित करता है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने Second Judges Case और Third Judges Case में विकसित किया था।

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‘सिर्फ कानून का ज्ञान पर्याप्त नहीं’

जस्टिस जोसेफ ने कहा कि देश को “सबसे अच्छे न्यायाधीश” देने का मतलब केवल ऐसे व्यक्ति का चयन करना नहीं है जिसे कानून का गहरा ज्ञान हो। एक अच्छे जज में नैतिकता, निष्पक्षता, स्वतंत्र सोच और साहस जैसे गुण भी होने चाहिए।

उन्होंने सरकारों को आगाह करते हुए कहा कि यह सोचना अल्पकालिक और अविवेकपूर्ण होगा कि ऐसे न्यायाधीशों की नियुक्ति सरकार के लिए फायदेमंद है जो जरूरत पड़ने पर सरकार से सवाल न करें।

उनके अनुसार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ ही यह है कि न्यायाधीश संस्थागत दबाव से मुक्त होकर कानून और संविधान के आधार पर निर्णय ले सकें।

न्यायपालिका-कार्यपालिका के टकराव को खत्म करने की अपील

जस्टिस जोसेफ ने केंद्र और न्यायपालिका के बीच जजों की नियुक्ति को लेकर जारी असहमति को जल्द समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थाओं के बीच टकराव और असामंजस्य समाप्त होना जरूरी है, क्योंकि तभी देश को योग्य और स्वतंत्र न्यायाधीश मिल सकेंगे।

उनकी टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब न्यायिक नियुक्तियों को लेकर कॉलेजियम की सिफारिशों पर केंद्र की कार्रवाई लंबे समय से न्यायपालिका-कार्यपालिका संबंधों का संवेदनशील मुद्दा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में स्थायी संविधान पीठ की मांग

जस्टिस के.एम. जोसेफ ने सुप्रीम कोर्ट में स्थायी पांच सदस्यीय संविधान पीठ बनाने का भी सुझाव दिया।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि केवल न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना इसका स्थायी समाधान नहीं है। उनके अनुसार, नए मामलों की लगातार बढ़ती संख्या को नियंत्रित किए बिना लंबित मामलों का बोझ कम करना मुश्किल होगा।

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उन्होंने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट में एक स्थायी संविधान पीठ संविधान से जुड़े महत्वपूर्ण और लंबित प्रश्नों की नियमित सुनवाई करे। इससे संवैधानिक मामलों के निपटारे में तेजी आ सकती है और अन्य पीठों को भी सामान्य मामलों पर अधिक समय मिल सकेगा।

क्या है Second और Third Judges Case का महत्व?

भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति और कॉलेजियम व्यवस्था के विकास में Second Judges Case और Third Judges Case बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं। इन फैसलों ने न्यायपालिका की संस्थागत स्वतंत्रता और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की भूमिका को प्रमुखता दी।

जस्टिस जोसेफ का ताजा बयान इसी संवैधानिक ढांचे की मूल भावना पर जोर देता है—न्यायिक नियुक्तियों में स्वतंत्रता, योग्य उम्मीदवारों का चयन और कार्यपालिका के अनुचित प्रभाव से न्यायपालिका की सुरक्षा।

निष्कर्ष: जस्टिस के.एम. जोसेफ की टिप्पणियां केवल कॉलेजियम की लंबित सिफारिशों तक सीमित नहीं हैं। उनका व्यापक संदेश यह है कि स्वतंत्र और निडर न्यायपालिका लोकतांत्रिक संविधान की बुनियादी शर्त है, और न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को इसी उद्देश्य के अनुरूप संचालित किया जाना चाहिए।

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