सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने 10 जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी, जिनमें 7 महिलाएं शामिल; हाईकोर्ट्स में बढ़ती लैंगिक प्रतिनिधित्व की दिशा में बड़ा कदम।
न्यायपालिका में लैंगिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Supreme Court Collegium ने 14 अप्रैल 2026 को चार हाईकोर्ट्स में कुल 10 न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी, जिनमें 7 महिलाएं शामिल हैं। यह निर्णय उच्च न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है।
🔹 किन-किन हाईकोर्ट्स में हुई नियुक्तियां
कोलेजियम की सिफारिशें निम्नलिखित हाईकोर्ट्स से संबंधित हैं:
इन सभी में नई नियुक्तियों और पदोन्नतियों को मंजूरी दी गई है।
🔹 केरल हाईकोर्ट: दो महिला वकीलों का उत्थान
Kerala High Court के लिए कोलेजियम ने दो अधिवक्ताओं को जज नियुक्त करने की सिफारिश की:
- Preeta Aravindan Krishnamma
- Liz Mathew Anthraper
दोनों की नियुक्ति से बार से बेंच में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलेगा।
🔹 कर्नाटक हाईकोर्ट: तीन न्यायिक अधिकारियों को मंजूरी
Karnataka High Court के लिए तीन न्यायिक अधिकारियों को जज नियुक्त करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया:
- Rajeshwari Narayana Hegde
- Kedambadi Ganesh Shanthi
- Mahadevappa Brungesh
🔹 तेलंगाना हाईकोर्ट: चार अतिरिक्त जज बने स्थायी
Telangana High Court में चार अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी जज नियुक्त करने की मंजूरी दी गई:
- Yara Renuka
- Nandikonda Narsing Rao
- E. Tirumala Devi
- B. R. Madhusudhan Rao
🔹 बॉम्बे हाईकोर्ट: स्थायी जज की नियुक्ति
Bombay High Court में:
- Manjusha Ajay Deshpande
को अतिरिक्त न्यायाधीश से स्थायी न्यायाधीश बनाने की मंजूरी दी गई।
🔹 लैंगिक प्रतिनिधित्व पर जोर
इन नियुक्तियों में 10 में से 7 महिलाएं होना एक महत्वपूर्ण संकेत है कि:
- न्यायपालिका में लैंगिक संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है
- महिलाओं की भागीदारी धीरे-धीरे बढ़ रही है
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी भी उच्च न्यायपालिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सीमित है और इसे और बढ़ाने की आवश्यकता है।
🔹 न्यायिक सुधार की दिशा में कदम
कोलेजियम के इस फैसले को व्यापक न्यायिक सुधारों के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां:
- विविधता (diversity)
- समावेशन (inclusion)
पर जोर बढ़ रहा है।
महिला जजों की संख्या बढ़ने से न्यायिक दृष्टिकोण में विविधता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
🔹 निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम का यह निर्णय न केवल नियुक्तियों का एक सामान्य दौर है, बल्कि यह न्यायपालिका में समान अवसर और प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह रुझान स्थायी बदलाव में तब्दील होता है।
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