सुप्रीम कोर्ट: दिव्यांग अभ्यर्थियों को 3 साल की प्रैक्टिस नियम में राहत पर अंतरिम आदेश जारी रहेगा
Supreme Court of India ने एंट्री-लेवल न्यायिक सेवा भर्ती में 3 वर्ष की अनिवार्य वकालत प्रैक्टिस की शर्त से दिव्यांग अभ्यर्थियों को छूट देने की मांग वाली याचिका में महत्वपूर्ण अंतरिम राहत जारी रखी है।
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant, J. Joymalya Bagchi और J. Vipul M. Pancholi की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने निर्देश दिया कि 13 अप्रैल 2026 का अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा। इस आदेश के तहत न्यायिक अधिकारियों की भर्ती के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाई गई थी।
मामला क्या है?
याचिका Bhumika Trust द्वारा दाखिल की गई है, जो सैकड़ों दिव्यांग अभ्यर्थियों का प्रतिनिधित्व कर रहा है। याचिका में मांग की गई है कि एंट्री-लेवल ज्यूडिशियल सर्विसेज परीक्षा में बैठने के लिए 3 साल की अनिवार्य प्रैक्टिस की शर्त से विशेष रूप से दिव्यांग उम्मीदवारों को छूट दी जाए।
यह विवाद दो अहम फैसलों के बाद सामने आया:
- Recruitment of Visually Impaired in Judicial Services, In re में सुप्रीम कोर्ट ने दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए न्यायिक सेवाओं में उपयुक्त संशोधन करने का निर्देश दिया था।
- इसके बाद All India Judges Association v. Union of India में कोर्ट ने एंट्री-लेवल ज्यूडिशियल सर्विस भर्ती परीक्षा के लिए 3 साल की वकालत प्रैक्टिस को अनिवार्य पात्रता शर्त घोषित किया।
कोर्ट की पहले की टिप्पणियां
15 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रथमदृष्टया कहा था कि न्यायिक सेवाओं की पात्रता शर्तें सभी उम्मीदवारों के लिए समान होनी चाहिए और अलग-अलग वर्गों के लिए अलग मानदंड नहीं होने चाहिए।
हालांकि, व्यापक दृष्टिकोण अपनाने से पहले कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट और लॉ यूनिवर्सिटीज से सुझाव मांगे थे। कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया था कि वे इस मुद्दे को संबंधित मुख्य न्यायाधीशों के समक्ष रखें और अपने अधिकार क्षेत्र की लॉ यूनिवर्सिटीज एवं नेशनल लॉ स्कूल्स से राय प्राप्त करें।
आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी रहेगी
बाद में, जब 3 साल की प्रैक्टिस की शर्त पर विचार जारी था, सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट और राज्य लोक सेवा आयोगों को निर्देश दिया था कि जहां भर्ती विज्ञापन जारी हो चुके हैं वहां आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई जाए।
22 मई 2026 को मामले का पुनः उल्लेख होने पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम व्यवस्था अगले आदेश तक जारी रहेगी। इसका अर्थ है कि न्यायिक सेवा भर्ती के लिए आवेदन की समयसीमा फिलहाल बढ़ी हुई रहेगी।
मामला: Bhumika Trust v. Union of India (आदेश दिनांक 22-05-2026)।
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