‘हवाई यात्रा नहीं करनी है तो मत कीजिए’, 700% तक किराया बढ़ने की याचिका पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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ईरान संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों का हवाई किराए पर असर

दिवाली के दौरान घरेलू हवाई किराए में 700 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का दावा करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, “हवाई यात्रा न करें।” इस बीच केंद्र ने नए विमानन नियम अधिसूचित किए हैं, जिनके तहत असाधारण परिस्थितियों में हवाई किराए में हस्तक्षेप किया जा सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के त्योहारी मौसम में घरेलू हवाई किराए में कथित भारी बढ़ोतरी के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ ने याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें सुनने के बाद संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा, “हवाई यात्रा न करें।” इसके बाद उन्होंने पीठ के समक्ष अगला मामला पेश करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि दिवाली के दौरान हवाई किराए में सामान्य दरों की तुलना में 700 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने दलील दी कि हवाई यात्रा अब एक आवश्यक सेवा बन चुकी है और किराए में इस तरह की अत्यधिक वृद्धि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है।

त्योहारों और आपात स्थितियों में किराया नियंत्रण की मांग

यह याचिका जनहित याचिका (PIL) के रूप में दाखिल की गई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट से निर्देश देने की मांग की गई थी कि निजी एयरलाइंस त्योहारों, छुट्टियों और आपात स्थितियों के दौरान मनमाने तथा अत्यधिक हवाई किराए न वसूलें।

याचिकाकर्ता ने घरेलू हवाई किराए पर सीमा निर्धारित करने और यात्रियों को अचानक होने वाली भारी मूल्यवृद्धि से राहत देने के लिए अदालत के हस्तक्षेप की मांग की थी।

हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील तत्काल सुनवाई चाहते थे, लेकिन जस्टिस विक्रम नाथ ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।

केंद्र ने नए विमानन नियमों की जानकारी दी थी

इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत हवाई किराए के नियमन से संबंधित नए विमानन नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है। सरकार ने इन्हें निर्धारित समय में अधिसूचित करने की बात कही थी।

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पीठ ने केंद्र से कहा था कि अगली सुनवाई से पहले संबंधित नियम अदालत के समक्ष रखे जाएं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले में अगली सुनवाई की तारीख 16 नवंबर निर्धारित की गई थी।

इस बीच केंद्र सरकार ने नए विमानन नियम अधिसूचित कर दिए हैं। भारतीय वायुयान नियम, 2026 के तहत असाधारण परिस्थितियों में और जनहित में केंद्र सरकार को हवाई किराए के संबंध में हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया गया है। ये नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।

नए नियमों में सामान्य परिस्थितियों में हवाई किराए पर नियमित सरकारी नियंत्रण या प्रत्येक टिकट की कीमत के लिए पूर्व अनुमति की व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि, असाधारण स्थिति में सरकार निर्धारित शर्तों के अनुसार एयरलाइंस को निर्देश दे सकती है।

ईरान संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों का हवाई किराए पर असर

हवाई किराए में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव को भी एक महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान की आशंकाओं ने कच्चे तेल तथा विमानन ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।

विमानन कंपनियों के परिचालन खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बड़ी हिस्सेदारी होती है। इसलिए ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर एयरलाइंस के खर्च और अंततः टिकटों के किराए पर पड़ सकता है।

IndiGo CEO ने भी किराए बढ़ने की आशंका जताई

IndiGo के CEO विली वॉल्श ने 2 नवंबर को कहा कि ATF की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के कारण हवाई किराए में और वृद्धि हो सकती है।

उन्होंने कहा कि एयरलाइन बढ़ी हुई लागत का अधिकतम हिस्सा स्वयं वहन करने की कोशिश कर रही है, लेकिन कंपनी की वित्तीय स्थिरता का ध्यान रखना भी जरूरी है।

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वॉल्श के मुताबिक, ईंधन की कीमतें एयरलाइन के परिचालन खर्च का लगभग 32 प्रतिशत हिस्सा होती हैं। उन्होंने हवाई अड्डों के अधिक शुल्क और करों को भी विमानन उद्योग पर बढ़ते आर्थिक दबाव का कारण बताया।

उन्होंने कहा कि यदि कर और एयरपोर्ट शुल्क कम किए जाएं तो एयरलाइंस को राहत मिल सकती है।

नए नियमों से असाधारण परिस्थितियों में सरकार कर सकेगी हस्तक्षेप

केंद्र द्वारा अधिसूचित नए नियमों के तहत सामान्य परिस्थितियों में एयरलाइंस परिचालन लागत और अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखकर किराया निर्धारित करती रहेंगी। उन्हें किराए से संबंधित जानकारी DGCA को उपलब्ध करानी होगी और यात्रियों के लिए किराए की जानकारी प्रकाशित करनी होगी।

हालांकि, यदि सरकार को लगता है कि कोई असाधारण परिस्थिति पैदा हुई है और जनहित में हस्तक्षेप जरूरी है, तो वह एयरलाइंस को लिखित निर्देश जारी कर सकती है। ऐसे निर्देश परिस्थितियों के अनुपात में और निर्धारित अवधि के लिए ही प्रभावी रहेंगे।

इस तरह एक ओर सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए से संबंधित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने असाधारण परिस्थितियों में किराया नियंत्रण के लिए नया नियामक ढांचा अधिसूचित किया है।

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