शादी का झांसा देकर 22 वर्षीय महिला से बार-बार यौन उत्पीड़न का आरोप, GRPF कर्मियों समेत छह आरोपियों की जमानत खारिज

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कर्नाटक के यादगीर की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 22 वर्षीय महिला से शादी का झांसा देकर कथित बार-बार यौन उत्पीड़न के मामले में GRPF कर्मियों समेत छह आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका और जारी जांच को ध्यान में रखा।

कर्नाटक के यादगीर की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 22 वर्षीय महिला के कथित बार-बार यौन उत्पीड़न के मामले में सरकारी रेलवे पुलिस बल (GRPF) के कर्मियों सहित छह आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

न्यायाधीश ए. ईरन्ना ने आरोपियों की जमानत अर्जियों को अस्वीकार किया। सरकारी अभियोजक गुरुलिंगप्पा श्रीमंत तेली ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और महत्वपूर्ण साक्ष्यों तथा दस्तावेजों का संकलन पूरा नहीं हुआ है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट भी आनी बाकी है।

साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका

अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदालत ने इस आशंका को ध्यान में रखा कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं या उन्हें नष्ट करने का प्रयास कर सकते हैं।

सरकारी अभियोजक ने बताया कि छह आरोपियों में से आरोपी नंबर एक, तीन और चार हिरासत में हैं, जबकि आरोपी नंबर दो, पांच और छह फरार हैं। जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से उन्होंने पैरवी की।

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रेलवे स्टेशन पर हुई थी महिला से मुलाकात

शिकायत के अनुसार, महिला की मुलाकात यादगीर रेलवे स्टेशन पर मल्लप्पा नामक व्यक्ति से हुई थी। आरोप है कि मल्लप्पा ने उससे शादी करने का वादा किया और उसे अलग-अलग स्थानों पर ले गया।

महिला ने आरोप लगाया कि बाद में मल्लप्पा और अन्य आरोपियों, जिनमें GRPF का एक कर्मी भी शामिल बताया गया है, ने उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और उसका कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया।

ये आरोप शिकायत और अभियोजन पक्ष के कथन पर आधारित हैं। मामले में आरोपियों के दोषी होने का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद होगा।

बस में रोती मिली महिला, 112 पर दी गई सूचना

घटना से संबंधित पूर्व विवरण के अनुसार, अगस्त में यात्रा के दौरान एक व्यक्ति ने महिला को बस में रोते हुए देखा। उसने आपातकालीन सेवा नंबर 112 पर फोन कर सूचना दी।

मौके पर पहुंचे कर्मियों ने महिला को सहायता प्रदान की और उसे संकटग्रस्त महिलाओं के लिए संचालित सहायता केंद्र ‘शक्ति सदन’ पहुंचाया।

इसके बाद महिला की शिकायत के आधार पर 16 सितंबर को यादगीर महिला पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।

जांच जारी, फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले में जांच अभी पूरी नहीं हुई है। साक्ष्यों और दस्तावेजों का संग्रह जारी है तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने का इंतजार किया जा रहा है।

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अदालत द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने का प्रमुख आधार अभियोजन के अनुसार, जांच की मौजूदा स्थिति और साक्ष्यों से छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट किए जाने की आशंका रहा।

कानूनी महत्व: जमानत पर निर्णय लेते समय अदालत मामले की परिस्थितियों, जांच की स्थिति और साक्ष्यों की सुरक्षा जैसे पहलुओं पर विचार कर सकती है। जमानत याचिका खारिज होना अपने आप में आरोपियों को दोषी ठहराने के समान नहीं है।

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