Supreme Court में रजिस्ट्री पर ‘डीप-प्रोब’ के संकेत, CJI सूर्यकांत सख्त

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“रजिस्ट्री में कुछ अधिकारी 20–30 वर्षों से कार्यरत हैं। उन्हें लगता है कि हम (न्यायाधीश) अस्थायी हैं और वे स्थायी। यदि मैं अपने कार्यकाल में इसे ठीक नहीं कर पाया, तो यह मेरे कर्तव्य का निर्वहन न करना होगा।”

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर गहरी जांच के संकेत दिए। साथ ही, कक्षा 8 की NCERT किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ उप-शीर्षक पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए शो-कॉज नोटिस जारी किए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) Surya Kant ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि वे इसकी “डीप-प्रोब” (गहन जांच) का आदेश देंगे।

CJI ने कहा कि उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि एक याचिका, जिसे तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने खारिज कर दिया था, बाद में दूसरी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध कर दी गई।

उन्होंने टिप्पणी की:

“रजिस्ट्री में कुछ अधिकारी 20–30 वर्षों से कार्यरत हैं। उन्हें लगता है कि हम (न्यायाधीश) अस्थायी हैं और वे स्थायी। यदि मैं अपने कार्यकाल में इसे ठीक नहीं कर पाया, तो यह मेरे कर्तव्य का निर्वहन न करना होगा।”

रजिस्ट्री पर सवाल क्यों गंभीर हैं?

CJI की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि:

  • केस लिस्टिंग की प्रक्रिया में स्थापित प्रोटोकॉल से विचलन हुआ हो सकता है।
  • कुछ वरिष्ठ अधिकारी प्रशासनिक सुधारों के बावजूद अपने विवेक से काम कर रहे हैं।
  • न्यायिक आदेशों के बाद पुनः सूचीबद्ध करना न्यायिक अनुशासन पर प्रश्न उठा सकता है।
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हाल के महीनों में रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के प्रयास किए गए हैं। ऐसे में यह बयान न्यायालय के प्रशासनिक ढांचे को लेकर असाधारण महत्व रखता है।


NCERT पाठ्यपुस्तक विवाद पर कड़ा रुख

इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में “Corruption in the Judiciary” शीर्षक उप-अध्याय शामिल करने पर कड़ा रुख अपनाया है।

पीठ, जिसमें CJI सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल थे, ने:

  • शिक्षा और साक्षरता विभाग (शिक्षा मंत्रालय) के सचिव को
  • तथा Dinesh Prashad Saklani, निदेशक, National Council of Educational Research and Training (NCERT)

को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

कोर्ट ने पूछा कि अवमानना या अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।

कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

  • संबंधित अध्याय/उप-अध्याय पर तत्काल प्रभाव से रोक (blanket ban)।
  • NCERT से Teaching-Learning Materials Committee के विस्तृत रिकॉर्ड मांगे गए — जिसमें सदस्यों के नाम, योग्यता और क्रेडेंशियल शामिल हैं।
  • चेतावनी दी गई कि आदेश को दरकिनार करने का कोई भी प्रयास न्याय प्रशासन में सीधा हस्तक्षेप माना जाएगा और अवमानना कार्रवाई हो सकती है।

CJI की तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा:

“उन्होंने बंदूक चला दी है और आज न्यायपालिका लहूलुहान है… यह एक सोची-समझी, गहरी और संगठित साजिश प्रतीत होती है… जब आप देखते हैं कि भारतीय न्यायपालिका को किस तरह भ्रष्ट दिखाया जा रहा है, तो स्पष्ट हो जाता है कि क्या संदेश दिया जा रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका पर निरंतर हमले हो रहे हैं और अदालत इस स्थिति से अवगत है।

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NCERT का रुख

NCERT ने पहले ही माफी जारी करते हुए कहा था कि वह अध्याय की समीक्षा करेगा और उचित परामर्श के बाद संशोधन करेगा। संस्था ने स्वीकार किया कि “भ्रष्टाचार” संबंधी संदर्भ अनुचित था।


व्यापक प्रभाव

यह घटनाक्रम दो स्तरों पर महत्वपूर्ण है:

  1. न्यायिक प्रशासन: रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर संभावित गहन जांच सुप्रीम कोर्ट के आंतरिक प्रशासन में बड़े सुधारों का संकेत हो सकती है।
  2. न्यायपालिका की छवि: पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका को लेकर प्रस्तुत सामग्री पर सख्त रुख न्यायिक संस्थानों की संस्थागत गरिमा की रक्षा के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रजिस्ट्री जांच और NCERT मामले में कोर्ट के आगे के निर्देश क्या दिशा लेते हैं।


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