कोर्ट में बैग से दो अवैध पिस्टल और कारतूस मिलने पर वकील गिरफ्तार, आपराधिक इतिहास नहीं मिली-जमानत

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कोर्ट परिसर में बैग से पिस्टल मिलने पर गिरफ्तार वकील को जमानत, ट्रायल का विषय बताया ‘सचेत कब्जे’ का सवाल

दिल्ली की तिस हजारी कोर्ट ने कोर्ट परिसर में बैग से दो अवैध पिस्टल और कारतूस मिलने के मामले में गिरफ्तार अधिवक्ता हर्ष को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि ‘सचेत कब्जे’ और जानकारी का सवाल ट्रायल में तय होगा।

दिल्ली की तिस हजारी अदालत ने कोर्ट परिसर में बैग की स्कैनिंग के दौरान दो अवैध पिस्टल और कारतूस बरामद होने के मामले में गिरफ्तार अधिवक्ता हर्ष को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि आरोपी की ओर से उठाया गया यह तर्क कि उसे हथियारों की जानकारी नहीं थी, फिलहाल ट्रायल का विषय है, लेकिन जमानत पर विचार करते समय परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) प्रीति राजोरिया ने 23 मई 2026 को पारित आदेश में आरोपी को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर राहत प्रदान की।

कोर्ट एंट्री गेट पर स्कैनिंग में मिली थीं पिस्टल

मामला 20 मई 2026 का है, जब अधिवक्ता हर्ष तिस हजारी कोर्ट परिसर में प्रवेश कर रहे थे। सुरक्षा जांच के दौरान उनके ट्रॉली बैग की स्कैनिंग की गई, जिसमें दो अवैध पिस्टल और कारतूस बरामद हुए। इसके बाद सब्जी मंडी थाना पुलिस ने FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आरोपी को दो दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की और बाद में न्यायिक हिरासत की मांग करते हुए अदालत में पेश किया। इसी दौरान आरोपी की ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई।

‘अगर जानकारी होती तो स्कैनिंग नहीं करवाते’ — बचाव पक्ष

आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ताओं आर.एस. मलिक, डी.के. शर्मा, साहिल मलिक और विजय मलिक ने अदालत को बताया कि हर्ष के पास हथियारों का “सचेत कब्जा” नहीं था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि यदि आरोपी को बैग में हथियार होने की जानकारी होती, तो वह कभी भी कोर्ट के प्रवेश द्वार पर बैग को स्कैनिंग मशीन से गुजरने नहीं देता।

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वकीलों ने यह भी कहा कि आरोपी ने जांच में पूरा सहयोग किया है और जांच अधिकारी के साथ अन्य सह-आरोपी राम सिंह से जुड़े विभिन्न स्थानों पर भी गया। बचाव पक्ष के अनुसार आरोपी पेशे से अधिवक्ता है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

पुलिस ने कहा— जांच शुरुआती चरण में

वहीं, अतिरिक्त लोक अभियोजक अमन गौरव ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी को हथियारों की जानकारी थी या नहीं, यह तथ्य ट्रायल के दौरान ही तय किया जा सकता है।

अभियोजन ने अदालत को बताया कि जांच अभी शुरुआती अवस्था में है और सह-आरोपी की गिरफ्तारी के बाद आरोपी की आगे भी जरूरत पड़ सकती है।

अदालत ने किन आधारों पर दी राहत?

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह निर्विवाद है कि हथियारों की बरामदगी हो चुकी है और आरोपी पुलिस हिरासत में रहकर जांच में सहयोग कर चुका है। अदालत ने यह भी नोट किया कि जांच अधिकारी ने आगे की पुलिस रिमांड की मांग नहीं की, बल्कि न्यायिक हिरासत की प्रार्थना की थी।

कोर्ट ने कहा कि आरोपी की ओर से उठाया गया यह तर्क कि उसके पास हथियारों का सचेत कब्जा नहीं था, इस स्तर पर निर्णायक रूप से तय नहीं किया जा सकता क्योंकि यह ट्रायल का विषय है। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि आरोपी ने स्वयं बैग को स्कैनिंग के लिए जाने दिया, जो जमानत पर विचार करते समय एक प्रासंगिक परिस्थिति है।

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अदालत ने कहा:

“बचाव पक्ष द्वारा बताई गई परिस्थितियां, विशेष रूप से यह तथ्य कि आरोपी ने ट्रॉली बैग को कोर्ट के प्रवेश द्वार पर स्कैनिंग से गुजरने दिया, इस स्तर पर पूरी तरह नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं।”

बिना मेरिट पर टिप्पणी किए जमानत मंजूर

अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले के मेरिट पर कोई टिप्पणी किए बिना आरोपी को जमानत दी जा रही है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी पेशे से अधिवक्ता है, उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और फिलहाल आगे की पुलिस हिरासत की मांग नहीं की गई है।

इस प्रकार अदालत ने आरोपी हर्ष को शर्तों सहित जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया।

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