Telangana High Court में ‘पहचान’ पर बड़ा सवाल: पाकिस्तानी नागरिक बताने वाला शख्स अचानक भारतीय पासपोर्ट के साथ पहुंचा

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कोर्ट की मुख्य हैरानी इस बात पर थी कि याचिकाकर्ता पहले स्वयं को पाकिस्तानी नागरिक बता चुका था और वीजा के लिए आवेदन भी कर चुका था, लेकिन सुनवाई के दौरान अचानक भारतीय पासपोर्ट पेश कर दिया गया।

तेलंगाना हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने भारतीय पासपोर्ट पेश किया, जबकि रिकॉर्ड में वह पहले खुद को पाकिस्तानी नागरिक बता चुका था। कोर्ट ने विरोधाभासों पर सख्त टिप्पणी करते हुए जांच एजेंसियों को कानून के तहत कार्रवाई की छूट दी।

हैदराबाद के याकूतपुरा निवासी 33 वर्षीय सैयद अली हुसैन इमरान की याचिका पर सुनवाई के दौरान एक ऐसा मोड़ आया जिसने अदालत को भी चौंका दिया। इमरान ने पुलिस पूछताछ पर रोक की मांग की थी और दावा किया था कि उनका जन्म भारत में हुआ और वे यहीं पले-बढ़े।

लेकिन सरकारी रिकॉर्ड अलग तस्वीर पेश कर रहे थे। सुनवाई के बीच उनके वकील ने 2022 में जारी एक भारतीय पासपोर्ट कोर्ट में पेश कर दिया। यहीं से मामला और उलझ गया, क्योंकि सरकारी पक्ष के अनुसार गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड में ऐसे किसी पासपोर्ट का उल्लेख नहीं मिला।


क्या है पूरा विवाद?

सरकार की ओर से कहा गया कि:

  • इमरान का जन्म पाकिस्तान के कराची में हुआ।
  • उनकी मां के पाकिस्तानी पासपोर्ट में उनका नाम ‘इमरान आबिद उर्फ इमरान हुसैन’ दर्ज था।
  • वर्ष 2025 में लॉन्ग-टर्म वीजा के लिए आवेदन करते समय इमरान ने स्वयं को पाकिस्तानी नागरिक बताया था।
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दूसरी ओर, इमरान का कहना था कि पुलिस ने उन पर वीजा आवेदन करने का दबाव बनाया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई अहम सवाल उठाए:

  • यदि उनके पास पहले से भारतीय पासपोर्ट था, तो जांच के दौरान वह दस्तावेज क्यों नहीं दिखाया गया?
  • पासपोर्ट में दर्ज नाम और उनकी मां के दस्तावेजों में दर्ज नाम अलग-अलग क्यों हैं?
  • सरकारी रिकॉर्ड में पासपोर्ट का उल्लेख क्यों नहीं है?

बेंच ने टिप्पणी की कि हर सुनवाई में नए तथ्य सामने आना मामले को और उलझा रहा है।


कोर्ट सबसे ज्यादा किस बात से हैरान हुई?

कोर्ट की मुख्य हैरानी इस बात पर थी कि याचिकाकर्ता पहले स्वयं को पाकिस्तानी नागरिक बता चुका था और वीजा के लिए आवेदन भी कर चुका था, लेकिन सुनवाई के दौरान अचानक भारतीय पासपोर्ट पेश कर दिया गया।

साथ ही:

इन विसंगतियों ने कोर्ट को मामले को गंभीरता से लेने पर मजबूर किया।


अंतिम आदेश में कोर्ट ने क्या कहा?

Telangana High Court ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट की प्रामाणिकता की जांच करना अदालत का काम नहीं है। यह संबंधित सरकारी एजेंसियों का अधिकार क्षेत्र है।

याचिकाकर्ता के वकील ने रिट अपील वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। साथ ही प्रशासन को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की छूट दे दी गई।

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कोर्ट ने संकेत दिया कि अब दस्तावेजों की सत्यता और नागरिकता से जुड़े सवालों पर अंतिम निर्णय जांच एजेंसियां करेंगी।


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