दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस कोर्स मस्जिद की बिजली-पानी बहाली की याचिका खारिज की, इमाम के अधिकार पर उठाए सवाल

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रेस कोर्स क्लब परिसर में स्थित है मस्जिद

दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस कोर्स मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इमाम की नियुक्ति मात्र से परिसर पर उनका व्यक्तिगत अधिकार स्थापित नहीं होता। कोर्ट ने संपत्ति पर अधिकार और 25 अगस्त के फैसले के दायरे से जुड़े विवादित सवालों पर भी विचार किया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर को रेस कोर्स मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून ने बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जाने के बाद अदालत का रुख किया था। ये कनेक्शन 7 अक्टूबर को काटे गए थे।

जस्टिस सौरभ बनर्जी ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मोहम्मद हारून को दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इमाम नियुक्त किया है। केवल इस नियुक्ति के आधार पर परिसर पर उनका व्यक्तिगत अधिकार, मालिकाना हक या कानूनी हित स्थापित नहीं होता। अदालत ने यह भी गौर किया कि वक्फ बोर्ड, जिसे परिसर का मूल कब्जाधारी बताया गया, ने बिजली कनेक्शन काटे जाने के फैसले को स्वयं चुनौती नहीं दी थी।

रेस कोर्स क्लब परिसर में स्थित है मस्जिद

रेस कोर्स मस्जिद, रेस कोर्स क्लब के परिसर में स्थित है। करीब 53 एकड़ में फैला यह क्लब प्रधानमंत्री आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग के पास है।

मस्जिद को वक्फ के तहत अधिसूचित संपत्ति बताया गया है। इसके अलावा, वर्ष 2009 में इसे ग्रेड-2 विरासत भवन के रूप में भी अधिसूचित किया गया था।

इस इलाके में क्लब परिसर और आसपास की झुग्गी बस्तियों से लोगों को हटाने की कार्रवाई को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। केंद्र सरकार ने क्षेत्र का कब्जा लेने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया है। हालांकि, सरकार के सूत्रों के अनुसार, मस्जिद को हटाने के लिए कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था।

मोहम्मद हारून परिसर में बने एक छोटे कमरे, जिसे ‘हुजरा’ कहा जाता है, में रहते हैं। बिजली और पानी की आपूर्ति बंद होने के बाद उन्होंने 12 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

दिल्ली वक्फ बोर्ड ने NDMC को लिखा था पत्र

बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जाने के बाद दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 8 अक्टूबर को नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के कार्यकारी अभियंता को पत्र लिखकर आपूर्ति बहाल करने की मांग की थी।

बोर्ड ने दावा किया था कि सभी बकाया बिलों का भुगतान किया जा चुका था, इसके बावजूद बिना पूर्व सूचना और स्पष्ट वैध कारण के कनेक्शन काट दिए गए। बोर्ड के अनुसार, इन सुविधाओं की आपूर्ति कई दशकों से जारी थी।

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हालांकि, 15 अक्टूबर को NDMC ने बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने से इनकार कर दिया। परिषद की ओर से कहा गया कि क्षेत्र में तोड़फोड़ की कार्रवाई जारी है और झुग्गियां गिराई जा रही हैं। ऐसे में बिजली की आपूर्ति बहाल करने से लोगों को नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है।

NDMC ने यह भी दलील दी कि भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है। यह विभाग संबंधित भूमि पर कब्जा लेने और इलाके में चल रही कार्रवाई से जुड़ा है।

25 अगस्त के फैसले का भी दिया गया हवाला

रेस कोर्स क्लब और आसपास की झुग्गियों से लोगों को हटाने से संबंधित मुकदमे में मस्जिद पक्षकार नहीं थी। इसके बावजूद NDMC के वकील ने अदालत में मौखिक रूप से दलील दी कि मस्जिद का परिसर भी हाईकोर्ट के 25 अगस्त के फैसले के दायरे में आता है।

इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री आवास के पास रेस कोर्स रोड पर रहने वाले झुग्गीवासियों को हटाने की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, वहां से हटाए गए लोगों को करीब 50 किलोमीटर दूर सावदा घेवरा में बसाया गया।

मस्जिद की बिजली-पानी आपूर्ति बहाल करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान इस पुराने फैसले का दायरा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर सामने आया।

इमाम के व्यक्तिगत अधिकार पर अदालत की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि मोहम्मद हारून को वक्फ बोर्ड ने इमाम नियुक्त किया था। अदालत के अनुसार, केवल इस नियुक्ति के आधार पर उन्हें परिसर पर स्वतंत्र मालिकाना हक या ऐसा व्यक्तिगत अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता, जिसके आधार पर वे बिजली कनेक्शन काटे जाने को अपने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताकर राहत मांग सकें।

अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि परिसर के मूल कब्जाधारी के रूप में बताए गए वक्फ बोर्ड ने स्वयं कनेक्शन काटे जाने की कार्रवाई को चुनौती नहीं दी थी।

इस टिप्पणी के जरिए अदालत ने याचिकाकर्ता के व्यक्तिगत अधिकार और संपत्ति पर वक्फ बोर्ड की स्थिति के बीच अंतर को रेखांकित किया।

संपत्ति पर अधिकार और पुराने फैसले का दायरा भी विवादित

याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि मामले में कई गंभीर तथ्यात्मक विवाद हैं। इनमें प्रमुख सवाल यह है कि क्या याचिकाकर्ता का संबंधित परिसर पर कोई अधिकार, मालिकाना हक या कानूनी हित है। दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या मस्जिद का परिसर 25 अगस्त के फैसले के दायरे से बाहर है।

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अदालत ने माना कि इन सवालों का अंतिम निर्धारण मौजूदा रिट याचिका की सीमाओं और सुनवाई के दायरे में नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।

दिल्ली वक्फ बोर्ड की स्थिति भी चर्चा में

दिल्ली वक्फ बोर्ड के गठन और प्रशासनिक व्यवस्था का मुद्दा भी इस मामले की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अगस्त 2023 में निर्वाचित बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नया बोर्ड गठित नहीं हुआ था। जनवरी 2024 में उपराज्यपाल की ओर से नियुक्त अधिकारियों ने बोर्ड का कामकाज संभाल लिया था।

इस प्रशासनिक स्थिति के कारण बोर्ड की ओर से संपत्ति संबंधी अधिकारों और कानूनी कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

फैसले का कानूनी महत्व

इस मामले में हाईकोर्ट ने बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत की टिप्पणियां यह स्पष्ट करती हैं कि किसी धार्मिक स्थल में इमाम के रूप में नियुक्त होना और उस परिसर पर व्यक्तिगत संपत्ति-अधिकार होना अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं।

साथ ही, अदालत ने संबंधित संपत्ति पर अधिकार और 25 अगस्त के फैसले के दायरे से जुड़े विवादों का अंतिम निर्णय इस रिट याचिका में नहीं किया।

निष्कर्ष: दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस कोर्स मस्जिद की बिजली-पानी आपूर्ति बहाल करने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने याचिकाकर्ता के व्यक्तिगत अधिकार पर सवाल उठाए और कहा कि संपत्ति पर अधिकार तथा पुराने फैसले के दायरे से जुड़े विवादित प्रश्नों का निर्णय इस कार्यवाही में नहीं किया जा सकता।

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