सुप्रीम कोर्ट ने कहा: इलेक्शन कमिश्नर और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्तियों के लिए देश में 72 साल बाद भी कोई कानून नहीं-

सर्वोच्च अदालत Supreme Court सीईसी Chief Election Commissioner की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम Collegium जैसी प्रणाली की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। संविधान पीठ में न्यायमूर्ति के एम जोसेफ, न्यायमूर्ति जय रस्तोगी, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार भी शामिल हैं। देश के सर्वोच्च न्यायलय ने भारत … Read more

न्यायालय का कर्तव्य है कि वह अनुबंध की व्याख्या करते हुए पक्षों के वास्तविक और सही अर्थ को समझे और अनुबंध से उत्पन्न होने वाले अधिकारों को लागू करे – SC

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अनुबंध की शर्तों की व्याख्या करते समय यह अदालत का कर्तव्य है कि वह ऐसे किसी भी विवेक के प्रयोग को अस्वीकार करे जो पूरी तरह से अनुबंध के दायरे से बाहर हो। यह देखते हुए कि अनुबंध के पक्षकारों के अधिकार और कर्तव्य … Read more

CrPC u/s 428 के तहत ‘सेट ऑफ’ का लाभ उठाने के लिए, दोषी की हिरासत ‘एक ही मामले’ में होनी चाहिए – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट की अवमानना ​​​​से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 428 के तहत सेट ऑफ का लाभ उठाने के लिए दोषी द्वारा हिरासत में लिया जाना उसी मामले में होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट खंडपीठ में न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय ने कहा – “जहां … Read more

CrPC की ये धारा महिलाओं के साथ भेदभाद करती है, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल PIL पर सरकार को नोटिस –

आज सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन PIL पर सुनवाई की गई जिसमें CrPC की धारा 64 को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि CrPC की धारा 64 महिलाओं के साथ भेदभाव करती है। सुप्रीम कोर्ट Supreme Court में सोमवार को एक जनहित याचिका पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन PIL … Read more

Supreme Court of INDIA: हिंदी में बहस कर रहे शख्स को माननीय न्यायमूर्तियों ने टोका, कहा ‘हमें समझ नहीं आ रहा, आप क्या बोल रहे हैं’-

भारत की उच्चतम अदालत में आज एक अलग ही तरह का वाक्या देखने को मिला जब हिंदी भाषा में बहस कर रहे एक शख्स को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के माननीय दो न्यायमूर्ति ने टोक दिया। मामला देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में आज एक अलग ही तरह का मामला देखने को मिला जहां … Read more

Cheque Bounce Case: Sec 142 NI Act के तहत सीमा अवधि समाप्त होने के बाद अतिरिक्त आरोपी को आरोपित नहीं किया जा सकता है – सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने एक चेक बाउंस मामले में कहा है कि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 142 के तहत संज्ञान लेने के लिए एक बार सीमा अवधि समाप्त हो जाने के बाद एक अतिरिक्त आरोपी को आरोपी के रूप में आरोपित नहीं किया जा सकता है। न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी … Read more

CJI डॉ चंद्रचूड़ ने वकील पर की टिप्पणी, कहा की ‘बिना ब्रीफ वाला वकील, बिना बल्ले के सचिन तेंडुलकर’ जैसा होता है

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉक्टर डी वाई चंद्रचूड़ ने एक वाद की सुनवाई के दौरान वकीलों के लिए एक बड़ी तल्ख़ टिप्पणी की। उन्होंने पीठ के सामने केस वकीलों को केस की जानकारी न होने पर नसीहत देते हुए कहा कि ‘बिना ब्रीफ वाला वकील, बिना बल्ले के सचिन तेंडुलकर’ की तरह होता है। … Read more

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम प्रणाली पर पुनर्विचार करने और NJAC को पुनर्जीवित करने की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत

COLLEGIUM SYSTEM: “भाई-भतीजावाद और पक्षपात का पर्यायवाची” भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय SUPREME COURT और उच्च न्यायालयों HIGH COURTS में न्यायिक नियुक्तियों की कॉलेजियम प्रणाली COLLEGIUM SYSTEM पर उचित समय पर पुनर्विचार करने के लिए एक रिट याचिका सूचीबद्ध करने पर सहमत हुए। याचिका में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग, या … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में एक नाबालिग के साथ बलात्कार और हत्या के दोषी व्यक्ति की मौत की सजा के निष्पादन पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने 10 नवंबर, 2022 को उस व्यक्ति को दी गई मौत की सजा के अमल पर रोक लगा दी, जिसे 2013 में केवल 3 साल की एक नाबालिग लड़की से बलात्कार और उसकी हत्या करने का दोषी ठहराया गया था। अभियुक्तों के मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन का निर्देश दिया ताकि अदालत को यह आकलन करने … Read more

SC ने IPC 498A के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए सजा अवधि को कम किया क्योंकि उसकी पत्नी वैवाहिक जीवन को पुनर्जीवित करना चाहती थी

सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध एक पति द्वारा दायर अपील में अपीलकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए अर्थात ‘क्रूरता’ के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन इस तथ्य पर विचार करने के बाद उस पर लगाई गई सजा को कम कर दिया कि उसकी पत्न्नी वैवाहिक जीवन को … Read more