मुस्लिम बहुविवाह पर सुप्रीम कोर्ट नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह (पॉलिगैमी) पर पूर्ण प्रतिबंध और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। जानिए याचिका की चार प्रमुख मांगें और कोर्ट की टिप्पणी।
मुस्लिम बहुविवाह पर रोक की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया
मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह पर प्रतिबंध की मांग वाली याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह (पॉलिगैमी) की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कानूनी सुधारों की भी मांग की गई है।
याचिका किसने दायर की?
यह याचिका महिला अधिकार कार्यकर्ता जाकिया सोमन द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं में भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (BMMA) के साथ कुछ शिक्षाविद और पत्रकार भी शामिल हैं।
सुनवाई के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता श्रिया मैनी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में उठाई गई चार प्रमुख मांगों पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
याचिका में उठाई गई चार प्रमुख मांगें
याचिका में निम्नलिखित प्रमुख मांगें की गई हैं—
1. मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बहुविवाह की प्रथा मुस्लिम महिलाओं के साथ असमानता और अन्याय को बढ़ावा देती है। इसलिए इस प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए।
2. BNS की धारा 82 के तहत बहुविवाह को अवैध घोषित किया जाए
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 82 के तहत मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह को भी अवैध घोषित किया जाए।
3. प्रभावित पत्नियों के लिए विशेष सहायता कोष का गठन
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि बहुविवाह से प्रभावित पहली और दूसरी पत्नी के लिए एक विशेष राहत कोष बनाया जाए, जिससे उन्हें आर्थिक सहायता और अंतरिम राहत उपलब्ध कराई जा सके।
4. मुस्लिम विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण
याचिका में मुस्लिम विवाह और तलाक के लिए भी हिंदू विवाह की तरह अनिवार्य वैधानिक पंजीकरण व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे महिलाओं के भरण-पोषण, उत्तराधिकार, आवास और अन्य वैधानिक अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। केंद्र का पक्ष आने के बाद अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी।
केरल हाई कोर्ट की हालिया टिप्पणी का भी उल्लेख
इस मुद्दे से जुड़े एक अन्य मामले में केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी की थी कि यदि कोई मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है, तो वह बहुविवाह नहीं कर सकता। अदालत ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की थी, जिसमें एक महिला ने भीख मांगकर जीवनयापन करने वाले अपने पति से ₹10,000 प्रतिमाह गुजारा भत्ता मांगा था।
क्या है इस मामले का महत्व?
यह मामला मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों, लैंगिक समानता, बहुविवाह की संवैधानिक वैधता और व्यक्तिगत कानूनों में सुधार जैसे महत्वपूर्ण कानूनी एवं सामाजिक प्रश्नों से जुड़ा है। अब केंद्र सरकार के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर आगे की सुनवाई करेगा।
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