श्री हनुमद जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी गोविंदानंद सरस्वती का कहना है कि वाल्मीकि रामायण के विवरण के अनुसार भगवान हनुमान का जन्म किष्किंधा क्षेत्र में हुआ था।
हनुमान जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि किसी देवता का जन्मस्थान तय करना अदालत का काम नहीं है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को कर्नाटक हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।
हनुमान जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान
भगवान हनुमान की जन्मस्थली को लेकर आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि किसी देवता का जन्म कहां हुआ, यह निर्धारित करना अदालत का कार्य नहीं है।
पीठ ने याचिकाकर्ता को कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह देते हुए कहा कि वहां “बीइंग स्पोकन टू” की प्रक्रिया उपलब्ध है, जिसके तहत आवश्यक होने पर आदेश में स्पष्टीकरण या सुधार किया जा सकता है।
अदालत धार्मिक आस्था की प्रमाणिकता तय करने का मंच नहीं
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में विभिन्न धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं समानांतर रूप से अस्तित्व में हैं और प्रत्येक का अपना महत्व है। अदालत किसी एक मान्यता को अंतिम सत्य घोषित नहीं कर सकती।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे विवादों को अदालतों में लाने से बचना चाहिए। इनका समाधान आपसी संवाद और सामाजिक स्तर पर होना अधिक उपयुक्त है।
कोर्ट ने कहा कि आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन न्यायालय धार्मिक विश्वासों की प्रामाणिकता तय करने का मंच नहीं हैं। ऐतिहासिक, पुरातात्विक और धार्मिक दावों पर अंतिम न्यायिक घोषणा करना व्यावहारिक भी नहीं है।
क्या है हनुमान जन्मभूमि विवाद?
यह विवाद दो अलग-अलग धर्मों के बीच नहीं, बल्कि दो हिंदू धार्मिक संस्थाओं के बीच है।
एक ओर आंध्र प्रदेश का तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) है, जो दावा करता है कि तिरुमला के पास स्थित अंजनाद्रि पर्वत भगवान हनुमान की वास्तविक जन्मस्थली है।
दूसरी ओर कर्नाटक स्थित श्री हनुमद जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि वाल्मीकि रामायण के अनुसार किष्किंधा क्षेत्र में स्थित अंजनाहल्ली, जो वर्तमान में हम्पी और तुंगभद्रा नदी के आसपास का इलाका माना जाता है, भगवान हनुमान की जन्मभूमि है।
किसने दायर की थी याचिका?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आंध्र प्रदेश निवासी पी.वी. कृष्णा रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि तिरुमला के निकट स्थित अंजनाद्रि पहाड़ी ही भगवान हनुमान की वास्तविक जन्मस्थली है। उन्होंने इस संबंध में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी।
TTD ने किन साक्ष्यों का दिया हवाला?
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने अपने दावे के समर्थन में पुराणों, प्राचीन ताम्रपत्रों, साहित्यिक संदर्भों और भौगोलिक साक्ष्यों का उल्लेख किया है।
साल 2020 में गठित आठ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी, जिसके आधार पर अप्रैल 2026 में टीटीडी ने एक पुस्तिका प्रकाशित कर अंजनाद्रि को हनुमान जन्मभूमि बताया।
टीटीडी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जवाहर रेड्डी का कहना है कि उनके पास ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक प्रमाण हैं, जो अंजनाद्रि को भगवान हनुमान की जन्मस्थली सिद्ध करते हैं। उन्होंने चित्रकूट के एक दृष्टिबाधित संत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का भी उल्लेख किया है।
कर्नाटक ट्रस्ट के क्या हैं तर्क?
श्री हनुमद जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी गोविंदानंद सरस्वती का कहना है कि वाल्मीकि रामायण के विवरण के अनुसार भगवान हनुमान का जन्म किष्किंधा क्षेत्र में हुआ था। ट्रस्ट ने टीटीडी के दावों का विरोध करते हुए छह पन्नों का विस्तृत जवाब भी भेजा था।
अब कर्नाटक हाईकोर्ट में ही आगे बढ़ेगा मामला
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद फिलहाल यह विवाद कर्नाटक हाईकोर्ट में ही आगे बढ़ेगा। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया है कि यदि किसी आदेश को लेकर तकनीकी या कानूनी आपत्ति है, तो पहले हाईकोर्ट ही उस पर विचार करेगा।
कोर्ट ने यह भी दोहराया कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता में अनेक कथाएं और परंपराएं समान रूप से विद्यमान हैं और सभी का सम्मान किया जाना चाहिए।
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