शिवसेना विवाद: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, ‘विधायक दल नहीं, राजनीतिक दल सर्वोपरि’

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  • “किसी राजनीतिक दल की स्थिरता लोकतंत्र की परिपक्वता पर निर्भर करती है।”
  • ‘राजनीतिक दल का नियंत्रण विधायक दल पर रहता है’

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (UBT) की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि राजनीतिक दल का नियंत्रण विधायक दल पर रहता है और पार्टी का वैध निर्णय बहुमत वाले विधायक दल पर भी प्रभावी होगा। मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।


शिवसेना चुनाव चिन्ह विवाद: सुप्रीम कोर्ट बोला- विधायक दल नहीं, राजनीतिक दल का निर्णय सर्वोपरि

शिवसेना (UBT) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उद्धव बालासाहेब ठाकरे (UBT) गुट की उस याचिका पर सुनवाई शुरू की, जिसमें चुनाव आयोग (ECI) द्वारा एकनाथ शिंदे गुट को वास्तविक शिवसेना के रूप में मान्यता देने और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह आवंटित करने के फैसले को चुनौती दी गई है।

मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कर रही है।

‘राजनीतिक दल का नियंत्रण विधायक दल पर रहता है’

सुनवाई के दौरान पीठ ने महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल का नियंत्रण उसके विधायक दल (Legislature Party) पर होता है।

अदालत ने कहा,

“राजनीतिक दल का वैध निर्णय, विधायक दल के बहुमत की इच्छा पर भी प्राथमिकता रखेगा।”

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संसदीय लोकतंत्र में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को कुछ असाधारण परिस्थितियों में राजनीतिक निर्णय लेने की सीमित स्वतंत्रता (Elbow Room) भी मिलनी चाहिए।

कपिल सिब्बल ने उठाया मूल कानूनी सवाल

उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस मामले का मूल प्रश्न यह है कि क्या विधायक दल राजनीतिक दल पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है?

उन्होंने कहा कि कानून ऐसी किसी व्यवस्था की अनुमति नहीं देता।

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सिब्बल ने तर्क दिया कि हाल के वर्षों में दलबदल की घटनाओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित किया है, क्योंकि जनता जिस राजनीतिक दल को चुनती है, उसके विधायक बाद में अपना समर्थन बदलकर सरकार की दिशा बदल देते हैं।

जस्टिस बागची बोले- लोकतंत्र की परिपक्वता से तय होती है पार्टी की स्थिरता

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि राजनीतिक दल का संगठनात्मक ढांचा ही उसके विधायक दल पर नियंत्रण रखता है और पार्टी के वैध निर्णयों का पालन होना चाहिए।

उन्होंने कहा,

“किसी राजनीतिक दल की स्थिरता लोकतंत्र की परिपक्वता पर निर्भर करती है।”

उन्होंने ब्रिटेन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पिछले आठ वर्षों में सात प्रधानमंत्री बदले, लेकिन दो प्रमुख राजनीतिक दलों में कभी विभाजन नहीं हुआ।

चुनाव चिन्ह किसका— पार्टी का या विधायक दल के नेता का?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव चिन्ह का अधिकार राजनीतिक दल का होता है या विधायक दल के नेता का।

इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव चिन्ह राजनीतिक दल की पहचान का अभिन्न हिस्सा है और इसे विधायक दल से अलग नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि चाहे विधायकों की संख्या कितनी भी हो, वे संगठन से अलग होकर राजनीतिक दल पर स्वामित्व का दावा नहीं कर सकते।

‘चुनाव आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसला दिया’

सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव प्रतीक (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश के तहत चुनाव आयोग को किसी राजनीतिक दल के संविधान की वैधता तय करने का अधिकार नहीं है।

उनका कहना था कि आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से आगे बढ़कर निर्णय दिया।

CJI बोले- ऐसे विवाद रोकने के लिए स्पष्ट मानदंड जरूरी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विवादों के समाधान के लिए स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ मानदंड (Defined Criteria) होने चाहिए।

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उन्होंने कहा,

“यदि स्पष्ट मानदंड तय हों तो ऐसे विवाद काफी हद तक रोके जा सकते हैं।”

इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि इस विषय पर न्यायालय पहले ही कानूनी सिद्धांत तय कर चुका है और प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।

2022 में हुआ था शिवसेना का विभाजन

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी। एक गुट का नेतृत्व उद्धव ठाकरे ने किया, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व एकनाथ शिंदे ने संभाला।

इसके बाद शिंदे गुट ने चुनाव आयोग से स्वयं को वास्तविक शिवसेना घोषित करने और पार्टी का नाम तथा ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह देने की मांग की थी।

चुनाव आयोग ने 17 फरवरी 2023 को मुख्य रूप से विधायक दल की संख्यात्मक ताकत के आधार पर शिंदे गुट को वास्तविक शिवसेना मानते हुए उसे पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया था। इसी फैसले को उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।


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