महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने मतदाता सूची में नाम बहाल करने या स्थानांतरित करने की याचिकाकर्ताओं की मांग स्वीकार नहीं की
दिल्ली हाईकोर्ट ने SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद Form 6 भरने को लेकर याचिकाकर्ता की आशंका को निराधार बताया। चुनाव आयोग के आश्वासन के आधार पर अदालत ने याचिका का निपटारा किया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद दोबारा नाम शामिल कराने के लिए Form 6 भरने पर गलत घोषणा करने के आरोप का डर निराधार है। अदालत ने यह टिप्पणी चुनाव आयोग (ECI) की ओर से दिए गए आश्वासन के मद्देनजर की।
न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति अदिति चौधरी की खंडपीठ ने नीलोत्पल दत्ता और एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका का निपटारा कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने मौजूदा मतदाता प्रविष्टियों की बहाली और स्थानांतरण के बजाय नए सिरे से नाम शामिल कराने के लिए आवेदन देने की प्रक्रिया को चुनौती दी थी।
14 अक्टूबर को पारित आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता चाहें तो Form 6 जमा कर सकते हैं। उनके आवेदन पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।
क्या था पूरा मामला?
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान वे गणना प्रपत्र (Enumeration Form) नहीं भर सके, क्योंकि वे अपने पहले के आवासीय पते से दूसरी जगह स्थानांतरित हो गए थे। इसके परिणामस्वरूप उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
उन्होंने चुनाव आयोग के 24 जून, 2025 के आदेश के एक प्रावधान को चुनौती दी थी, जिसे 14 मई, 2026 के एक पत्र के माध्यम से दिल्ली में लागू किया गया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि अपनाई गई प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 और संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों के अनुरूप नहीं है।
चुनाव आयोग ने Form 6 भरने का दिया था सुझाव
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के स्थायी अधिवक्ता संजय वशिष्ठ ने कहा कि याचिकाकर्ता निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत Form 6 देकर अपनी शिकायत का समाधान करा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछली सुनवाई में भी यही सुझाव दिया गया था। साथ ही, पहले याचिकाकर्ता को आश्वासन दिया गया था कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (Electoral Registration Officer—ERO) आवेदन की प्रक्रिया में उनकी सहायता करेंगे। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने उस समय Form 6 जमा करने का विकल्प नहीं चुना था।
याचिकाकर्ता ने जताई गलत घोषणा के आरोप की आशंका
पहले याचिकाकर्ता ने स्वयं अदालत में पेश होकर Form 6 भरने के सुझाव का विरोध किया। उनका तर्क था कि ऐसा करने से उन्हें गलत घोषणा करने का आरोप झेलना पड़ सकता है।
खंडपीठ ने चुनाव आयोग की ओर से दिए गए आश्वासन पर विचार करने के बाद इस आशंका को निराधार बताया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अपनी इच्छा से Form 6 जमा करने की अनुमति दी और कहा कि आवेदन पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
Rule 21 और Form 8 के तहत भी मांगी थी राहत
याचिकाकर्ताओं ने केवल Form 6 की प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी थी, बल्कि कई अन्य राहतें भी मांगी थीं।
उन्होंने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के Rule 21 के तहत मतदाता सूची में अपनी पुरानी प्रविष्टियों को बहाल करने का निर्देश देने की मांग की थी। इसके अलावा, उन्होंने Form 8 के माध्यम से अपनी प्रविष्टियों में सुधार और उन्हें वर्तमान सामान्य निवास स्थान से संबंधित मतदाता सूची में स्थानांतरित करने की अनुमति भी मांगी थी।
याचिकाकर्ताओं ने यह निर्देश देने की भी मांग की थी कि बहाल और स्थानांतरित की गई प्रविष्टियां नियमों के Rule 22 के अनुसार अंतिम रूप से प्रकाशित मतदाता सूची में दर्ज हों।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन मांगों पर याचिकाकर्ताओं के पक्ष में कोई निर्देश जारी नहीं किया और कार्यवाही समाप्त कर दी। लंबित आवेदनों का भी निपटारा कर दिया गया।
फैसले का कानूनी महत्व
यह आदेश SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने और दोबारा नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया से जुड़े विवाद को रेखांकित करता है। अदालत ने चुनाव आयोग के आश्वासन के आधार पर याचिकाकर्ताओं को Form 6 जमा करने का विकल्प दिया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने मतदाता सूची में नाम बहाल करने या स्थानांतरित करने की याचिकाकर्ताओं की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने केवल यह स्पष्ट किया कि वे चाहें तो Form 6 जमा कर सकते हैं और उनके आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
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