इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहमति से साथ रह रहे जोड़े को परेशान करने पर पुलिस को फटकार लगाई। कहा—यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर हमला है।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
Allahabad High Court ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस का काम अपराधों की जांच करना है, न कि सहमति से साथ रह रहे जोड़ों का पीछा करना।
‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला’
अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की कार्रवाई नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर हमला है, जिसे संविधान द्वारा संरक्षित किया गया है।
क्या है मामला
मामला सहारनपुर निवासी एक युवक की याचिका से जुड़ा है, जिसने अपनी प्राथमिकी (FIR) को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि वह एक महिला के साथ सहमति से रह रहा है, लेकिन पुलिस उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर रही है और अनावश्यक हस्तक्षेप कर रही है।
पुलिस को फटकार
कोर्ट ने कहा कि पुलिस को अपनी सीमाओं में रहकर काम करना चाहिए और ऐसे मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, जहां दो वयस्क अपनी इच्छा से साथ रह रहे हों।
डीजीपी को निर्देश
अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सभी जिलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें।
‘जीवनसाथी चुनना मौलिक अधिकार’
कोर्ट ने दोहराया कि किसी व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने और उसके साथ रहने का अधिकार मौलिक अधिकारों के दायरे में आता है।
कानूनी स्थिति स्पष्ट
अदालत ने कहा कि जब तक कोई आपराधिक तत्व सामने न आए, पुलिस को ऐसे निजी मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।
व्यापक प्रभाव
यह आदेश पुलिस की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा को भी मजबूत करता है।
निष्कर्ष
हाईकोर्ट का यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर नागरिकों की निजी जिंदगी में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।
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