GST अपील दाखिल करना हुआ आसान, क्या था 20 जनवरी 2026 का आदेश?
GSTAT अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा ने GST अपील फाइलिंग में राहत देते हुए 31 दिसंबर 2026 तक ‘लेनिएंट स्क्रूटनी’ व्यवस्था बढ़ा दी है। अब केवल गंभीर त्रुटियों पर ही आपत्तियां उठेंगी और डिजिटल दस्तावेजों के लिए भौतिक प्रमाणन जरूरी नहीं होगा।
GST अपील दाखिल करना हुआ आसान, GSTAT ने बढ़ाई राहत अवधि
GSTAT ने बढ़ाई ‘लेनिएंट स्क्रूटनी’ व्यवस्था
वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण (GSTAT) ने करदाताओं और टैक्स प्रोफेशनल्स को बड़ी राहत देते हुए अपील दाखिल करने की प्रक्रिया में लागू आसान स्क्रूटनी व्यवस्था को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है।
GSTAT के अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा ने 14 मई 2026 को जारी आदेश के जरिए यह निर्देश दिया। यह आदेश पहले जारी ऑफिस ऑर्डर संख्या 16/2026 दिनांक 20 जनवरी 2026 और 10 मार्च 2026 के निर्देशों के क्रम में जारी किया गया है।
यह फैसला GST अपीलीय अधिकरण (प्रक्रिया) नियम, 2025 के नियम 123 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लिया गया है।
क्या था 20 जनवरी 2026 का आदेश?
GSTAT ने 20 जनवरी 2026 को जारी अपने आदेश में कहा था कि शुरुआती छह महीनों तक प्रत्येक पीठ की रजिस्ट्री अपीलों की जांच के दौरान उदार दृष्टिकोण अपनाएगी।
निर्देश में स्पष्ट किया गया था कि केवल “गंभीर त्रुटियों” (Defects of Substance) पर ही आपत्ति उठाई जाएगी, जबकि केवल तकनीकी या औपचारिक कमियों (Defects of Form) को आधार बनाकर आपत्तियां नहीं लगाई जाएंगी।
इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि GSTN सिस्टम से डिजिटल रूप से उत्पन्न दस्तावेजों के लिए अलग से प्रमाणन (Certification) की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, स्कैन की गई भौतिक प्रतियों पर हस्ताक्षर आवश्यक होंगे।
31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेंगी ये राहतें
14 मई 2026 के नए आदेश में GSTAT अध्यक्ष ने कहा कि 20 जनवरी 2026 के आदेश और 10 मार्च 2026 के निर्देशों का पालन अब 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगा।
इसका उद्देश्य GSTAT पोर्टल पर अपील दाखिल करने की प्रक्रिया को अधिक सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है।
स्क्रूटनी अधिकारियों के लिए नए निर्देश
GSTAT ने स्क्रूटनी अधिकारियों के लिए भी विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं।
APL-05 में इन दस्तावेजों पर नहीं लगेगी आपत्ति
रजिस्ट्रार, संयुक्त रजिस्ट्रार, उप रजिस्ट्रार और सहायक रजिस्ट्रार को निर्देश दिया गया है कि यदि APL-05 फॉर्म में निम्न दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी अपलोड है, तो सामान्यतः कोई “डिफेक्ट फ्लैग” नहीं लगाया जाएगा:
- शो कॉज नोटिस (SCN)
- ऑर्डर-इन-ओरिजिनल (OIO)
- ऑर्डर-इन-अपील (OIA)
- स्टेटमेंट ऑफ फैक्ट्स
- ग्राउंड्स ऑफ अपील
- प्री-डिपॉजिट
- कोर्ट फीस
यदि किसी उच्च न्यायालय ने कोर्ट फीस या प्री-डिपॉजिट से छूट दी है, तब भी आपत्ति दर्ज नहीं की जाएगी।
प्रमाणित प्रतियों को लेकर भी राहत
GSTAT ने स्पष्ट किया है कि यदि अपीलकर्ता धारा 112(1) के तहत प्रमाणित OIO या OIA की स्कैन कॉपी अपलोड करता है और उस पर जारीकर्ता प्राधिकारी का प्रमाणन स्पष्ट है, तो अलग से कोई आपत्ति नहीं उठाई जाएगी।
वकालतनामा और प्राधिकरण पत्र जरूरी
अधिकरण ने यह भी कहा है कि अपीलकर्ता को टैक्स प्रोफेशनल के पक्ष में जारी प्राधिकरण पत्र या अधिवक्ता के नाम निष्पादित वकालतनामा भी अपलोड करना होगा।
विभागीय अपीलों के लिए अलग व्यवस्था
धारा 112(3) के तहत विभाग (Revenue) द्वारा दाखिल अपीलों के लिए भी आवश्यक दस्तावेजों की सूची निर्धारित की गई है। इनमें शामिल हैं:
- शो कॉज नोटिस
- ऑर्डर-इन-ओरिजिनल
- ऑर्डर-इन-अपील
- आयुक्त की राय
- स्टेटमेंट ऑफ फैक्ट्स
- ग्राउंड्स ऑफ अपील
GSTAT ने स्पष्ट किया है कि विभागीय अपीलों में कोर्ट फीस या प्री-डिपॉजिट की आवश्यकता नहीं होगी।
करदाताओं और पेशेवरों को बड़ी राहत
विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय GST अपील प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक और करदाता-अनुकूल बनाएगा।
तकनीकी कमियों के कारण अनावश्यक डिफेक्ट मेमो जारी होने की समस्या कम होगी और अपीलों की सुनवाई में तेजी आएगी। इससे करदाताओं, टैक्स प्रोफेशनल्स और विभागीय अधिकारियों—तीनों को लाभ मिलने की संभावना है।
यह आदेश GSTAT के सभी राज्य पीठों के उपाध्यक्षों, सदस्यों और रजिस्ट्रारों को अनुपालन के लिए भेज दिया गया है।
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