वकीलों के बहिष्कार से सुनवाई ठप: High Court में 39 जज बैठे, नहीं पहुंचा कोई वकील

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Supreme Court of India पहले ही स्पष्ट दिशा निर्देश – न्यायिक कार्य को बाधित नहीं किया जाना चाहिए

राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों के बहिष्कार के चलते असामान्य स्थिति। 39 जज सुनवाई को तैयार, लेकिन एक भी वकील पेश नहीं हुआ—कोर्ट ने जताई नाराजगी।


हाईकोर्ट में असामान्य स्थिति

Rajasthan High Court में शनिवार को अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली, जब 39 जज सुनवाई के लिए अदालत में मौजूद रहे, लेकिन पैरवी के लिए एक भी वकील कोर्ट नहीं पहुंचा।

बहिष्कार के कारण ठप हुई कार्यवाही

यह स्थिति बार एसोसिएशन द्वारा किए गए न्यायिक कार्य के बहिष्कार के कारण उत्पन्न हुई। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश के जयपुर दौरे के चलते जोधपुर के जज भी जयपुर बेंच में बैठे, जिससे बड़ी संख्या में बेंच गठित हुईं।

कोर्ट की कड़ी नाराजगी

मामले को गंभीरता से लेते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट कहा कि वकीलों को हड़ताल के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि न्यायिक कार्य से दूरी बनाना न्याय व्यवस्था के हित में नहीं है।

‘न्यायिक काम से दूरी ठीक नहीं’

पीठ ने टिप्पणी की कि अदालतें मामलों की सुनवाई के लिए तैयार बैठी हैं, लेकिन वकीलों की अनुपस्थिति न्याय वितरण प्रणाली को प्रभावित कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि वकीलों द्वारा हड़ताल या बहिष्कार को लेकर Supreme Court of India पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश दे चुका है कि न्यायिक कार्य को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

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बार से सहयोग की अपील

अदालत ने बार पदाधिकारियों से अपील की कि वे बहिष्कार के फैसले पर पुनर्विचार करें और न्यायिक कार्य सुचारू रूप से चलाने में सहयोग दें।

विवाद की पृष्ठभूमि

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष लिए गए एक प्रशासनिक निर्णय के विरोध में यह बहिष्कार किया जा रहा है। 2026 से हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को कार्य दिवस घोषित किए जाने के फैसले के खिलाफ वकील विरोध कर रहे हैं।

व्यापक प्रभाव

इस बहिष्कार का सीधा असर न्यायिक कार्यवाही पर पड़ा, जिससे लंबित मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई और न्याय पाने की प्रक्रिया में देरी हुई।

निष्कर्ष

यह घटनाक्रम न्यायपालिका और बार के बीच संतुलन और सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक कार्य को बाधित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।


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