ट्विशा शर्मा मौत मामला: पिता ने लीगल एड वकीलों की भूमिका पर उठाए सवाल, हाईकोर्ट और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से जांच की मांग
ट्विशा शर्मा मौत मामले में नया मोड़। पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से लीगल एड डिफेंस काउंसिल स्कीम से जुड़े वकीलों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की। सीबीआई जांच जारी, समर्थ सिंह और उनकी मां की न्यायिक हिरासत 16 जून तक।
ट्विशा शर्मा मौत मामले में नया विवाद
बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच जारी है। इसी बीच, मृतका के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (MPSLSA) के समक्ष शिकायत दाखिल कर मामले में एक नया आयाम जोड़ दिया है।
शिकायत में उन्होंने लीगल एड डिफेंस काउंसिल स्कीम से जुड़े कुछ वकीलों और एक अधिकारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नियुक्त कुछ वकील आरोपी पक्ष के समर्थन में सक्रिय दिखाई दिए।
किन लोगों की भूमिका पर उठाए गए सवाल?
नवनिधि शर्मा ने अपनी शिकायत में कुछ लीगल एड वकीलों के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार, इन वकीलों की नियुक्ति उस समय हुई थी जब गिरिबाला सिंह भोपाल में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनी सहायता व्यवस्था से जुड़े कुछ अधिवक्ताओं का व्यवहार निष्पक्षता के मानकों के अनुरूप प्रतीत नहीं होता और इस संबंध में स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
शादी की तस्वीर को बनाया शिकायत का आधार
शिकायत के साथ एक तस्वीर भी प्रस्तुत की गई है, जिसमें असिस्टेंट एडवोकेट श्रेयस सक्सेना कथित तौर पर समर्थ सिंह के विवाह समारोह में नृत्य करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
शिकायत में दावा किया गया है कि 15 मई को अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान भी श्रेयस सक्सेना अदालत में आरोपी पक्ष के निजी अधिवक्ता के साथ उपस्थित थे।
ट्विशा के पिता का कहना है कि यदि आरोपी के पास पहले से निजी वकील मौजूद था, तो लीगल एड व्यवस्था से जुड़े अधिवक्ताओं की सक्रिय भूमिका पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल का भी उल्लेख
शिकायत में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल रीना वर्मा का नाम भी शामिल किया गया है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले में शामिल सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि क्या लीगल एड प्रणाली का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप किया गया था।
रहस्यमयी व्यक्ति की पहचान पर भी सवाल
नवनिधि शर्मा ने अपनी शिकायत में एक अज्ञात व्यक्ति का भी उल्लेख किया है, जिसे कथित तौर पर पहले एक ब्यूटी पार्लर और बाद में विवाह समारोह में देखा गया था।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से उस व्यक्ति की पहचान तथा पूरे घटनाक्रम में उसकी संभावित भूमिका को स्पष्ट करने की मांग की है।
परिवार के वकील ने क्या कहा?
ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे ने बताया कि शिकायत संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है।
उन्होंने कहा कि अब परिवार को अधिकारियों द्वारा उचित कार्रवाई और निष्पक्ष जांच का इंतजार है।
पांडे के अनुसार, शिकायत में लीगल एड वकीलों और आरोपी पक्ष के बीच कथित संबंधों की स्वतंत्र जांच तथा अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान हुए कानूनी प्रतिनिधित्व की समीक्षा की मांग की गई है।
सीबीआई जांच जारी
इस मामले की जांच वर्तमान में सीबीआई कर रही है। एजेंसी मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच में जुटी हुई है और अदालत को पहले ही संकेत दे चुकी है कि आवश्यकता पड़ने पर आगे रिमांड की मांग की जा सकती है।
हालांकि, 2 जून को भोपाल सेंट्रल जेल भेजे जाने के बाद से अब तक सीबीआई ने अतिरिक्त पुलिस रिमांड की मांग नहीं की है।
16 जून को होगी अगली महत्वपूर्ण सुनवाई
मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह तथा उनके पुत्र समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत 16 जून को समाप्त हो रही है।
सीबीआई दोनों को उस दिन सक्षम अदालत के समक्ष पेश करेगी। सुनवाई के दौरान अदालत यह तय करेगी कि न्यायिक हिरासत आगे बढ़ाई जाए या जांच एजेंसी को अतिरिक्त पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड प्रदान किया जाए।
मामले की प्रमुख बातें
- ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई जांच जारी।
- पिता नवनिधि शर्मा ने हाईकोर्ट और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से शिकायत की।
- लीगल एड डिफेंस काउंसिल स्कीम से जुड़े कुछ वकीलों की भूमिका पर सवाल।
- असिस्टेंट एडवोकेट श्रेयस सक्सेना की कथित उपस्थिति और विवाह समारोह की तस्वीर का उल्लेख।
- चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल रीना वर्मा का नाम भी शिकायत में शामिल।
- एक अज्ञात व्यक्ति की पहचान और भूमिका की जांच की मांग।
- समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत 16 जून तक।
- अगली सुनवाई में हिरासत बढ़ाने या रिमांड पर निर्णय संभव।
कानूनी स्थिति
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों द्वारा इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। मामले की जांच और शिकायत पर विचार प्रक्रिया जारी है।
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