पश्चिम बंगाल मदरसा कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं: नियमितीकरण और अनुदान भुगतान की मांग वाली 360 से अधिक याचिकाएं खारिज

Like to Share

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने सुनाया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मदरसों के 360 से अधिक शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियमितीकरण और अनुदान भुगतान की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि परीक्षण के लिए चुने गए 13 याचिकाकर्ता भी राहत का आधार स्थापित नहीं कर सके।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के मदरसों में कार्यरत लगभग 360 शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों द्वारा दायर याचिकाओं के समूह को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में राज्य सरकार की अनुदान सहायता (Grant-in-Aid) योजना के तहत नियमितीकरण (Regularisation) तथा वेतन एवं अन्य वित्तीय लाभ देने से इनकार किए जाने को चुनौती दी गई थी।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ ने की।

सुनवाई के दौरान पीठ ने 350 से अधिक याचिकाकर्ताओं के मामलों में से 13 याचिकाकर्ताओं के मामलों को प्रतिनिधि (Lead Cases) के रूप में पहले परखा, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि राहत प्रदान करने का कोई कानूनी आधार बनता है या नहीं।

13 याचिकाकर्ता भी अदालत को संतुष्ट नहीं कर सके

फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा कि अदालत ने यह दृष्टिकोण अपनाया था कि यदि चयनित 13 याचिकाकर्ताओं में से कोई भी अपने पक्ष में राहत का पर्याप्त आधार स्थापित कर देता, तो शेष सभी याचिकाओं पर भी उसी आधार पर विचार किया जा सकता था।

Must Read -  हाई कोर्ट से आदेश वापस लेने की जिद, याची पर एक लाख रूपये का जुर्माना, वकील पर भी गिरी गाज-

हालांकि, पीठ ने कहा कि कोई भी याचिकाकर्ता अदालत को यह विश्वास दिलाने में सफल नहीं हुआ कि उसके पक्ष में हस्तक्षेप किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा:

“हमने इस आधार पर कार्यवाही की कि यदि इन 13 याचिकाकर्ताओं में से कोई भी हमें अपने पक्ष में निर्णय देने के लिए संतुष्ट कर देता, तो हम शेष मामलों की भी जांच करते। दुर्भाग्यवश, इन 13 याचिकाकर्ताओं में से कोई भी हमें प्रभावित नहीं कर सका।”

सभी संबंधित याचिकाएं हुईं खारिज

चूंकि प्रतिनिधि मामलों में ही राहत का कोई आधार नहीं पाया गया, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने नियमितीकरण और अनुदान सहायता योजना के तहत भुगतान की मांग से संबंधित सभी संबद्ध याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।


Tags

#SupremeCourt #WestBengal #Madrasa #GrantInAid #Regularisation #JusticeDipankarDatta #JusticeAGMasih #LegalNews #HindiLegalNews #सुप्रीमकोर्ट #पश्चिमबंगाल #मदरसा #नियमितीकरण #अनुदानसहायता #कानूनीसमाचार

Leave a Comment