राम मंदिर कथित दान गबन मामला: अयोध्या कोर्ट ने आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ाई, सुप्रीम कोर्ट ने मांगी SIT रिपोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को जारी किया नोटिस

अयोध्या राम मंदिर कथित दान गबन मामले में अयोध्या की अदालत ने सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ा दी है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर SIT से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित दान गबन मामले में अयोध्या की एक अदालत ने सोमवार को सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए और बढ़ा दी। आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश हुए। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।

रिमांड अवधि के दौरान जुटाए गए साक्ष्य अदालत में पेश

सूत्रों के अनुसार, मामले के जांच अधिकारी आशीष तिवारी ने तीन आरोपियों की रिमांड अवधि के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य और दस्तावेज अयोध्या स्थित भ्रष्टाचार निरोधक (Anti-Corruption) अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को जारी किया नोटिस

इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने कथित दान गबन मामले की स्वतंत्र एवं न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने संबंधित पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा है।

SIT से मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को मामले की प्रगति संबंधी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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पीठ ने कहा कि SIT अपनी रिपोर्ट में जांच की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ टीम की संरचना (Composition) का भी उल्लेख करे।

अदालत ने निर्देश दिया,

“उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा गठित SIT को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है। मामले को अगले सोमवार आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। स्टेटस रिपोर्ट में SIT की संरचना का भी उल्लेख किया जाए।”

यूपी सरकार ने नोटिस जारी करने का किया विरोध

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि नोटिस जारी करना आवश्यक नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार पहले ही SIT का गठन कर चुकी है और जांच जारी है।

उन्होंने अदालत से कहा कि मामले में जांच प्रक्रिया चल रही है, इसलिए फिलहाल नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- फिलहाल आरोपों के गुण-दोष पर विचार नहीं

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस चरण में वह आरोपों के गुण-दोष (Merits) पर विचार नहीं कर रहा है। अदालत ने कहा कि वह केवल यह जानना चाहती है कि जांच किस चरण में है और SIT ने अब तक क्या प्रगति की है।

याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील दी गई कि SIT के गठन को 17 दिनों से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जांच में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है।

हालांकि, अदालत ने इस तर्क पर विस्तार से सुनवाई करने से इनकार किया और कहा कि इस विषय पर बहस का उचित समय बाद में आएगा।

पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा,

“अपनी ऊर्जा बचाकर रखिए, क्योंकि उसकी आवश्यकता आपको बाहर भी पड़ेगी। क्या आप नहीं चाहते कि हम कोई आदेश पारित करें?”

स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाएं

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का एक हिस्सा कथित रूप से नकद चढ़ावे की गणना और प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों द्वारा गबन किया गया।

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याचिकाकर्ताओं ने मामले की स्वतंत्र जांच, न्यायालय की निगरानी में जांच और वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

अगले सप्ताह होगी मामले की आगे की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करते हुए SIT की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। अब मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी, जब अदालत जांच की प्रगति और SIT की रिपोर्ट पर विचार करेगी।


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