मद्रास हाई कोर्ट ने महिलाओं को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अंतरंग फोटो-वीडियो साझा करते समय सतर्क रहने की सलाह दी। कोर्ट ने गैर-सहमति से रिकॉर्डिंग कर ब्लैकमेल करने वाले दोषी की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग महिलाओं के शोषण का बड़ा माध्यम बन रहा है।
अंतरंग फोटो-वीडियो साझा करते समय सावधानी बरतें, भरोसे का दुरुपयोग कर ब्लैकमेल किया जा सकता है: मद्रास हाई कोर्ट
मद्रास हाई कोर्ट ने युवा महिलाओं को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अंतरंग (Intimate) फोटो या वीडियो साझा करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा है कि प्रेम, विश्वास और गोपनीयता के आश्वासन के बावजूद ऐसी सामग्री का दुरुपयोग किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश और न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने महिलाओं की गैर-सहमति से रिकॉर्डिंग कर उन्हें ब्लैकमेल और यौन शोषण करने वाले आरोपी की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
डिजिटल युग ने निजता की सुरक्षा को चुनौती दी
हाई कोर्ट ने कहा कि डिजिटल युग ने निजता की पारंपरिक सुरक्षा को लगभग समाप्त कर दिया है। अब न्यायाधीशों को केवल अपराध का विवरण पढ़ने तक सीमित नहीं रहना पड़ता, बल्कि कई मामलों में अपराध से जुड़े स्पष्ट (Explicit) वीडियो और तस्वीरें भी देखनी पड़ती हैं।
अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था में कार्यरत अधिकारियों, वकीलों और न्यायाधीशों को मशीन की तरह नहीं देखा जा सकता। यदि डिजिटल युग के ऐसे मामलों से उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की अनदेखी की गई, तो जांच अधिकारी, अधिवक्ता और न्यायाधीश मानसिक रूप से थकान, आघात और भावनात्मक संवेदनहीनता का शिकार हो सकते हैं।
महिला जांच अधिकारी को देखने पड़े 60 अश्लील वीडियो
अदालत ने कहा कि इस मामले में जांच कर रही महिला पुलिस अधिकारी को पीड़िता से संबंधित एक वीडियो खोजने के लिए लगभग 60 अत्यंत अश्लील और विकृत वीडियो फाइलें देखनी पड़ीं।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में आपराधिक न्याय प्रणाली स्वयं अपने अधिकारियों को किसी व्यक्ति की गरिमा के गंभीर उल्लंघन से जुड़े दृश्य देखने के लिए मजबूर कर रही है।
निजता और मर्यादा मानव गरिमा का अभिन्न हिस्सा
पीठ ने कहा कि मानव सभ्यता की शुरुआत से ही निजता और मर्यादा (Modesty) को मानव गरिमा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
अदालत ने बाइबिल में वर्णित आदम और हव्वा (Adam and Eve) की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी नग्नता का एहसास होने पर उन्होंने स्वयं को पत्तों से ढक लिया था। यह इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य में अपनी निजता और मर्यादा की रक्षा करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है।
क्या था मामला?
आरोपी के खिलाफ वर्ष 2020 में साइबर अपराध का एक मामला दर्ज हुआ था। जांच के दौरान उसके पास से बरामद iPhone 11 और बाद में उसके पिता के लैपटॉप की जांच में बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री मिली।
मामले की जांच बाद में क्राइम ब्रांच-सीआईडी (CB-CID) को सौंप दी गई।
जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई गई और 25 जनवरी 2021 को आरोपपत्र दाखिल किया गया।
ट्रायल कोर्ट ने किन अपराधों में दोषी ठहराया?
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को निम्न अपराधों का दोषी ठहराया—
- बार-बार दुष्कर्म (Repeated Rape)
- धोखाधड़ी
- यौन उत्पीड़न
- अश्लील शब्दों का प्रयोग
- वॉयरिज्म (Voyeurism)
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत निजता का उल्लंघन
आरोपी ने इन सभी आरोपों को झूठा बताते हुए हाई कोर्ट में सजा को चुनौती दी थी।
आरोपी की दलील
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पीड़िता पर जांच एजेंसी ने दबाव डालकर शिकायत दर्ज कराई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि अभियोजन की कहानी को पूरी तरह स्वीकार भी कर लिया जाए, तब भी उपलब्ध साक्ष्य से यही प्रतीत होता है कि दोनों के बीच संबंध सहमति से था और तस्वीरें एवं वीडियो भी पीड़िता की सहमति से रिकॉर्ड किए गए थे। इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए।
अभियोजन पक्ष का पक्ष
अतिरिक्त लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि पीड़िता पूरे समय आरोपी की धमकियों और भय के साए में रही।
उन्होंने कहा कि आरोपी ने केवल इस पीड़िता ही नहीं बल्कि अन्य महिलाओं को भी धमकाया था। इसके बावजूद पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई और लंबी जिरह के दौरान भी अपने बयान पर कायम रही।
अभियोजन ने यह भी बताया कि ट्रायल कोर्ट ने माना था कि यौन उत्पीड़न के दौरान पीड़िता को शारीरिक चोटें भी आई थीं।
355 नग्न वीडियो और 1000 से अधिक अश्लील तस्वीरें बरामद
ट्रायल कोर्ट ने जांच के दौरान बरामद सामग्री को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।
जांच में आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से—
- 355 नग्न और अर्धनग्न वीडियो
- 1,000 से अधिक अश्लील तस्वीरें
बरामद हुईं, जिनमें कथित तौर पर सैकड़ों युवा महिलाएं दिखाई गई थीं।
हाई कोर्ट ने सजा बरकरार रखी
हाई कोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों की शिकायत दर्ज कराने में देरी होना अस्वाभाविक नहीं है। भय, सामाजिक बदनामी, मानसिक आघात और शर्मिंदगी के कारण पीड़ित अक्सर तुरंत शिकायत दर्ज नहीं करा पाते।
अदालत ने कहा कि आरोपी ने नौकरी और प्रेम का झूठा झांसा देकर महिलाओं का विश्वास जीता, फिर उनकी गैर-सहमति से अंतरंग तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल किया। उसका आचरण सुनियोजित, क्रूर और नैतिक रूप से अत्यंत निंदनीय है।
ऐसी परिस्थितियों में सजा कम करने का कोई आधार नहीं बनता।
डिजिटल अपराधों पर अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल संचार ने जहां लोगों के बीच संवाद को आसान बनाया है, वहीं इसके जरिए धोखा, भावनात्मक शोषण, दबाव, गैर-सहमति से अंतरंग तस्वीरों की रिकॉर्डिंग और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी जैसे अपराध भी तेजी से बढ़े हैं।
अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधों से बचने के लिए जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत दर्ज कराना बेहद आवश्यक है। साथ ही न्यायालयों का दायित्व है कि वे यौन अपराधों के पीड़ितों को प्रभावी कानूनी संरक्षण प्रदान करें और आधुनिक तकनीक के माध्यम से होने वाले अपराधों पर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
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