सुप्रीम कोर्ट की दो बड़ी टिप्पणियां: CBSE मूल्यांकन प्रणाली पर फटकार, NEET UG 2026 री-एग्जाम चुनौती खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली पर नाराजगी जताते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए। वहीं, NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, लेकिन NTA में संस्थागत सुधार की मांग पर सुनवाई का रास्ता खुला रखा।


सुप्रीम कोर्ट की शिक्षा से जुड़े दो बड़े फैसले: CBSE को फटकार, NEET UG 2026 री-एग्जाम चुनौती खारिज

देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट से छात्रों और अभिभावकों के लिए सोमवार को दो अहम घटनाक्रम सामने आए। एक ओर अदालत ने सीबीएसई (CBSE) की बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए बोर्ड को फटकार लगाई, वहीं दूसरी ओर NEET UG 2026 की दोबारा आयोजित परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। दोनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने शिक्षा जगत में व्यापक चर्चा छेड़ दी है।

CBSE की मूल्यांकन प्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग मूल्यांकन प्रणाली को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बोर्ड के रवैये पर नाराजगी जताई।

याचिका में बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन को अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा,

“जरा इन छोटे बच्चों की निराशा को देखिए।”

अदालत ने संकेत दिया कि उत्तर पुस्तिकाओं के गलत मूल्यांकन के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को मानसिक तनाव और अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

‘विरोधी रुख न अपनाएं’ : कोर्ट की CBSE को नसीहत

पीठ में शामिल न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने भी सीबीएसई को सलाह देते हुए कहा कि बोर्ड को इस मामले में अड़ियल या विरोधी रुख नहीं अपनाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि मूल्यांकन प्रणाली में कुछ गंभीर समस्याएं दिखाई देती हैं, जिनका समाधान आवश्यक है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी अदालत की सहायता करने का अनुरोध किया और मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी।

NEET UG 2026 री-एग्जाम के खिलाफ याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने NEET UG 2026 की दोबारा आयोजित परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी।

यह याचिका उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसके तहत पेपर लीक के बाद मई 2026 में आयोजित परीक्षा रद्द कर 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा कराई गई थी।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने याचिका को “निष्प्रभावी (Infructuous)” मानते हुए खारिज कर दिया।

‘जब परीक्षा हो चुकी है तो विवाद क्या बचा?’

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी दलीलें रखीं, लेकिन न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने कहा,

“नीट यूजी की दोबारा परीक्षा पहले ही हो चुकी है। अब इस मुद्दे पर विचार करने का कोई औचित्य नहीं बचता।”

अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा संपन्न हो जाने के बाद उसे रोकने या रद्द करने की मांग पर अब सुनवाई का कोई व्यावहारिक आधार नहीं है।

NTA में सुधार की मांग पर सुनवाई का रास्ता खुला

हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने स्पष्ट किया कि उनकी याचिका केवल दोबारा परीक्षा रोकने तक सीमित नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में व्यापक संस्थागत सुधार की मांग भी की गई थी।

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इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता चाहे तो वह NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और सुधारों से संबंधित लंबित याचिकाओं के समूह में शामिल होकर अपनी दलीलें रख सकता है।

दोबारा परीक्षा पर विवाद खत्म, सुधार की बहस जारी

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा को चुनौती देने वाला विवाद फिलहाल समाप्त हो गया है। हालांकि, NTA की परीक्षा प्रणाली, पारदर्शिता और संस्थागत सुधारों से जुड़े मुद्दों पर न्यायिक सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।


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