सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 22 के तहत क्लास-I वारिसों का प्राथमिक खरीद (Pre-emption) का अधिकार पैतृक कृषि भूमि पर भी लागू होगा। कोर्ट ने कहा कि बिक्री से पहले यह अधिकार जताने पर अलग से बिक्री विलेख को चुनौती देना आवश्यक नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट: पैतृक कृषि भूमि पर भी क्लास-I वारिसों का प्राथमिक खरीद अधिकार लागू, धारा 22 हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम पर बड़ा फैसला
मामले की पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने उस महत्वपूर्ण कानूनी विवाद का निपटारा किया, जिसमें यह प्रश्न था कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 22 के तहत क्लास-I उत्तराधिकारियों (Class I Heirs) को दिया गया प्राथमिक खरीद अधिकार (Preferential Right/Pre-emption) क्या पैतृक कृषि भूमि (Inherited Agricultural Land) पर भी लागू होता है।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने प्रथम अपीलीय न्यायालय और हाई कोर्ट के फैसलों को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि धारा 22 कृषि भूमि पर भी समान रूप से लागू होती है।
अदालत ने यह भी कहा कि Babu Ram v. Santokh Singh (2019) का फैसला सही कानून बताता है और उसे बड़ी पीठ के समक्ष भेजने की आवश्यकता नहीं है।
क्या था विवाद?
विवाद उन भाई-बहनों के बीच उत्पन्न हुआ जिन्होंने अपने पिता की मृत्यु के बाद हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत क्लास-I उत्तराधिकारी के रूप में कृषि भूमि विरासत में प्राप्त की थी।
प्रतिवादी भाई-बहनों ने 28 दिसंबर 2011 को अपनी हिस्सेदारी एक बाहरी व्यक्ति को बेच दी।
हालांकि, उससे पहले ही 8 दिसंबर 2011 को वादी ने अदालत में मुकदमा दायर कर धारा 22 के तहत अपने प्राथमिक खरीद अधिकार को लागू करने की मांग कर दी थी।
वादी का कहना था कि किसी बाहरी व्यक्ति को संपत्ति बेचने से पहले उसे, एक सह-उत्तराधिकारी होने के नाते, संपत्ति खरीदने का पहला अधिकार प्राप्त है।
निचली अदालतों का फैसला
सिविल कोर्ट ने वादी का दावा खारिज करते हुए कहा कि Atam Prakash v. State of Haryana (1986) के फैसले के अनुसार धारा 22 लागू नहीं होती।
इसके विपरीत प्रथम अपीलीय न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के Babu Ram v. Santokh Singh (2019) फैसले पर भरोसा करते हुए माना कि धारा 22 कृषि भूमि पर भी लागू होती है।
बाद में हाई कोर्ट ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रश्न थे—
- क्या धारा 22 पैतृक कृषि भूमि पर लागू होती है?
- क्या Atam Prakash के फैसले ने धारा 22 को अप्रभावी बना दिया था?
- क्या संसद को कृषि भूमि के संबंध में धारा 22 बनाने का अधिकार था?
- क्या बिक्री विलेख होने के बाद वादी को अलग से उसे चुनौती देना आवश्यक था?
धारा 22 का उद्देश्य क्या है?
अदालत ने कहा कि धारा 22 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी क्लास-I उत्तराधिकारी को विरासत में मिली संपत्ति का हिस्सा बेचना हो, तो सबसे पहले वह उसी परिवार के अन्य क्लास-I उत्तराधिकारियों को खरीदने का अवसर दे।
इस प्रावधान का उद्देश्य पारिवारिक संपत्ति को यथासंभव परिवार के भीतर बनाए रखना है।
Atam Prakash फैसले की गलत व्याख्या नहीं की जा सकती
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिविल कोर्ट ने Atam Prakash के निर्णय को गलत तरीके से लागू किया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उस मामले में केवल Punjab Pre-emption Act, 1913 की धारा 15 को संविधान के अनुच्छेद 14 के उल्लंघन के आधार पर असंवैधानिक घोषित किया गया था।
उस फैसले में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 22 की वैधता पर कोई विचार नहीं किया गया था।
पीठ ने कहा कि एक अलग कानून पर दिए गए निर्णय को दूसरे कानून पर लागू करना “न्यायिक अराजकता (Judicially Created Anarchy)” पैदा करेगा।
धारा 22 और पंजाब प्री-एम्प्शन एक्ट समान नहीं
अदालत ने कहा कि पंजाब प्री-एम्प्शन कानून और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 22 को समान (pari materia) नहीं माना जा सकता।
जहां पंजाब कानून में बड़ी संख्या में रिश्तेदारों को प्राथमिक खरीद का अधिकार दिया गया था, वहीं धारा 22 केवल क्लास-I उत्तराधिकारियों तक सीमित है और केवल विरासत में प्राप्त संपत्ति पर लागू होती है।
कृषि भूमि पर भी लागू होगी धारा 22
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि Babu Ram का निर्णय सही कानून है।
अदालत ने कहा कि संसद ने उत्तराधिकार के अधिकार के साथ यह शर्त जोड़ी है कि विरासत में मिली संपत्ति को बाहरी व्यक्ति को बेचने से पहले सह-उत्तराधिकारियों को खरीदने का अवसर दिया जाए।
इसलिए यह अधिकार कृषि भूमि पर भी लागू होगा।
संसद के पास कानून बनाने का अधिकार
अदालत ने कहा कि धारा 22 का संबंध मुख्य रूप से उत्तराधिकार (Succession) से है, न कि कृषि भूमि के हस्तांतरण (Transfer) से।
इसलिए संसद को संविधान की समवर्ती सूची (List III) की प्रविष्टि 5 (Entry 5) के तहत ऐसा कानून बनाने का पूरा अधिकार प्राप्त है।
न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह ने अपने सहमति वाले फैसले में कहा कि धारा 22 मूल रूप से उत्तराधिकार से जुड़ा अधिकार है और कृषि भूमि के हस्तांतरण को नियंत्रित करने वाला स्वतंत्र कानून नहीं है।
अलग से बिक्री विलेख को चुनौती देना आवश्यक नहीं
अदालत ने कहा कि वादी ने बिक्री विलेख निष्पादित होने से पहले ही धारा 22 के तहत अपना अधिकार अदालत में लागू करने की मांग कर दी थी।
ऐसी स्थिति में बिक्री होने के बाद अलग से बिक्री विलेख को चुनौती देने की आवश्यकता नहीं थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए प्रथम अपीलीय न्यायालय और हाई कोर्ट के फैसलों को बरकरार रखा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि—
- धारा 22 हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम पैतृक कृषि भूमि पर भी लागू होती है।
- Babu Ram v. Santokh Singh (2019) सही कानून है।
- Atam Prakash का फैसला धारा 22 को प्रभावित नहीं करता।
- संसद को धारा 22 बनाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
- यदि सह-उत्तराधिकारी ने बिक्री से पहले अपना प्राथमिक अधिकार जता दिया है, तो उसे अलग से बिक्री विलेख रद्द कराने की आवश्यकता नहीं होती।
मामला
Mahinder v. Puran Singh,
2026 INSC 698,
निर्णय दिनांक: 14 जुलाई 2026
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