इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश: लखनऊ जिला अदालत के पास बने अवैध वकील चैंबर होंगे ध्वस्त

Like to Share

इलाहाबाद हाई कोर्ट लखनऊ जिला एवं सत्र न्यायालय के पास अवैध वकील चैंबर

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लखनऊ जिला एवं सत्र न्यायालय के पास बने 72 अवैध वकील चैंबरों को हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण हटाने में बाधा डालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


लखनऊ में 72 अवैध वकील चैंबर हटाने का निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लखनऊ स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर के आसपास बने लगभग 72 अवैध वकील चैंबरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मार्ग पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाना आवश्यक है और इस अभियान में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


अतिक्रमण रोकने पर होगी कानूनी कार्रवाई

जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने कहा कि यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कोई व्यक्ति, विशेषकर संबंधित अतिक्रमणकारी या उनके समर्थक, बाधा उत्पन्न करते हैं या किसी अवैध गतिविधि में शामिल होते हैं, तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।


रविवार को चलाया जाए अभियान

अदालत ने निर्देश दिया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रविवार के दिन की जाए, ताकि न्यायालय के नियमित कामकाज पर कोई असर न पड़े। साथ ही, नगर निगम को निर्देश दिया गया कि अभियान की तिथि पहले से सभी अतिक्रमणकारियों को सूचित की जाए, ताकि वे स्वेच्छा से सहयोग कर सकें।


चैंबर खाली करने या वैध दावा पेश करने का मिलेगा अवसर

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन वकीलों के चैंबर अवैध बताए गए हैं, उन्हें एक अंतिम अवसर दिया जा सकता है। अदालत ने सभी 72 अतिक्रमणकारियों को एक सप्ताह के भीतर नया लिखित नोटिस जारी करने का निर्देश दिया, ताकि वे या तो अपने चैंबर खाली कर दें या फिर कब्जे का कोई वैध कानूनी दावा प्रस्तुत कर सकें।

Must Read -  ड्राइविंग लाइसेंस में जरा-सा भी गैप भर्ती के लिए घातक: सुप्रीम कोर्ट

मई में भी हुई थी कार्रवाई, वकीलों और पुलिस में हुआ था विवाद

इससे पहले मई महीने में लखनऊ के कैसरबाग क्षेत्र में अवैध चैंबरों को हटाने की कार्रवाई के दौरान जिला अदालत के वकीलों और उत्तर प्रदेश पुलिस के बीच झड़प हुई थी। यह कार्रवाई भी इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही थी।


सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण से लोगों को हो रही थी परेशानी

अप्रैल में पारित अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा था कि जिला एवं सत्र न्यायालय के पास सार्वजनिक मार्ग पर किए गए अवैध निर्माण और अतिक्रमण के कारण आम नागरिकों और न्यायालय आने वाले लोगों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए इस अतिक्रमण को हटाना जनहित में आवश्यक है।


नगर निगम ने कोर्ट को दी कार्रवाई की जानकारी

4 अगस्त को लखनऊ नगर निगम ने अदालत को बताया कि क्षेत्र में 100 से अधिक अवैध चैंबरों को पहले ही हटाया जा चुका है। नगर निगम के अनुसार, प्रारंभिक चरण में केवल 72 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें अधिकांश अधिवक्ता थे जिन्होंने वहां चैंबर या दुकानें बना रखी थीं।

हालांकि, नगर निगम के अधिवक्ता ने यह भी बताया कि नोटिस प्राप्त 72 चैंबरों या दुकानों में से अब तक केवल 14 को ही ध्वस्त किया जा सका है।


दोबारा अतिक्रमण का आरोप, प्रशासनिक सहयोग की मांग

अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह चौहान ने अदालत को बताया कि जिन 14 चैंबरों को पहले हटाया गया था, उन पर दोबारा अतिक्रमण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने की प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रशासन और पुलिस का पूरा सहयोग आवश्यक है।

Must Read -  बाल अभिरक्षा में सिर्फ ‘वेलफेयर’ ही नहीं निर्णायक, अन्य कारक भी अहम: सुप्रीम कोर्ट

पुलिस, जिला प्रशासन और नगर निगम करेंगे समन्वय

इस पर हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि लखनऊ के पुलिस आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त आपसी समन्वय के साथ आवश्यक कदम उठाएं, ताकि अतिक्रमण हटाने के दौरान कानून-व्यवस्था की कोई समस्या उत्पन्न न हो।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को निर्धारित की है।


Tags

#AllahabadHighCourt #Lucknow #IllegalChambers #LawyersChambers #Encroachment #LucknowDistrictCourt #MunicipalCorporation #LegalNews #HighCourtOrder #EncroachmentRemoval #इलाहाबाद_हाई_कोर्ट #लखनऊ #अवैध_चैंबर #वकील_चैंबर #अतिक्रमण #लखनऊ_जिला_न्यायालय #हाईकोर्ट_आदेश #कानूनी_खबर

Leave a Comment