लखनऊ में अदालत और रजिस्ट्री कार्यालय के आसपास बने अवैध वकील चैंबरों के खिलाफ नगर निगम ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने 30 अगस्त तक 72 अवैध कक्ष हटाने का आदेश दिया था।
लखनऊ: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के निर्देश के बाद लखनऊ नगर निगम ने अदालत और रजिस्ट्री कार्यालय के आसपास सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए अवैध कक्षों के खिलाफ रविवार को बड़ा विध्वंस अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान आधे दर्जन से अधिक बुलडोजर लगाए गए और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा।
शाम करीब पांच बजे नगर निगम की टीम बुलडोजरों के साथ रजिस्ट्री कार्यालय पहुंची और चिन्हित अवैध निर्माणों को हटाना शुरू किया। इन संरचनाओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से वकीलों के चैंबर के रूप में किया जा रहा था।
हाई कोर्ट ने 72 अवैध चैंबर हटाने का दिया था निर्देश
मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने नगर निगम को अदालत परिसर के आसपास स्थित 72 अवैध कक्षों को 30 अगस्त तक हटाने का निर्देश दिया था।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद प्रभावित लोगों को अपने सामान और अन्य सामग्री हटाने के लिए समय दिया गया। नगर निगम ने पहले ही अतिक्रमणकारियों को स्वयं अवैध निर्माण हटाने का अवसर दिया था।
निर्धारित समय सीमा से पहले कई लोगों ने अपने चैंबरों से मेज-कुर्सियां, फाइलें, दस्तावेज, एयर कंडीशनर और अन्य सामान निकाल लिया था।
100 से अधिक चैंबरों को जारी किए गए थे नोटिस
विध्वंस अभियान से पहले लखनऊ नगर निगम ने डीएम कार्यालय, सत्र न्यायालय, पुराने हाई कोर्ट और रजिस्ट्री कार्यालय के आसपास स्थित 100 से अधिक चैंबरों और अन्य निर्माणों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए थे।
नगर निगम के अनुसार, कई संरचनाएं सड़क, फुटपाथ और नालियों की जमीन पर अतिक्रमण कर बनाई गई थीं। क्षेत्र में मौजूद कुछ दुकानों और अन्य निर्माणों को भी अवैध निर्माण के रूप में चिह्नित किया गया था।
नगर निगम ने कब्जेदारों को 29 अगस्त तक स्वयं अतिक्रमण हटाने का समय दिया था। समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रशासन ने मशीनरी के जरिए कार्रवाई शुरू की।
कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में वकील जुटे
रविवार को अभियान शुरू होने से पहले ही अदालत के आसपास बड़ी संख्या में वकील एकत्र हो गए थे। कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस की पर्याप्त तैनाती की गई।
इससे पहले मई में नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान भी वकीलों की ओर से विरोध किया गया था। उस दौरान विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था और पथराव की स्थिति पैदा हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
अवैध चैंबरों को हटाने का विवाद बाद में सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा था। हालांकि, वकीलों को वहां से भी तत्काल राहत नहीं मिली। इसके बाद नगर निगम ने हाई कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई की तैयारी पूरी की।
रविवार की कार्रवाई इसी न्यायिक आदेश के अनुपालन में की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हाई कोर्ट द्वारा चिन्हित अवैध ढांचों को हटाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई का व्यापक असर
यह मामला केवल वकीलों के चैंबर हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों और नालियों पर लंबे समय से किए गए अतिक्रमण को लेकर प्रशासन की कार्रवाई का हिस्सा है।
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम की कार्रवाई ने यह स्पष्ट किया है कि न्यायालय परिसर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी सार्वजनिक भूमि पर अनधिकृत निर्माण को केवल लंबे समय से मौजूद होने के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता। हालांकि, कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।
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