महिला की इच्छा सर्वोपरि, जबरन गर्भ जारी रखना असंवैधानिक-सुप्रीम कोर्ट

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‘महिला को जबरन गर्भ जारी रखने को मजबूर नहीं किया जा सकता’: Supreme Court of India का अहम फैसला

पीठ ने कहा कि किसी भी महिला, विशेषकर नाबालिग, को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने 7 महीने से अधिक गर्भवती नाबालिग को गर्भपात की अनुमति दी। कहा—महिला की इच्छा सर्वोपरि, जबरन गर्भ जारी रखना असंवैधानिक।


नाबालिग को गर्भपात की अनुमति

Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 15 वर्षीय गर्भवती नाबालिग को सात महीने से अधिक की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति दी है।

‘जबरन गर्भ जारी रखना अस्वीकार्य’

न्यायमूर्ति B. V. Nagarathna और न्यायमूर्ति Ujjal Bhuyan की पीठ ने कहा कि किसी भी महिला, विशेषकर नाबालिग, को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि ऐसा करना “गंभीर मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक आघात” पहुंचा सकता है।

गरिमा और स्वायत्तता पर जोर

पीठ ने स्पष्ट किया कि अनचाहे गर्भ के मामलों में महिला की गरिमा, स्वायत्तता और दीर्घकालिक कल्याण सर्वोपरि है।

अदालत ने कहा कि यदि महिला को जबरन गर्भ जारी रखने के लिए बाध्य किया जाता है, तो यह उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।

कानून से ऊपर महिला की इच्छा

कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक अदालतों को ऐसे मामलों में Medical Termination of Pregnancy Act, 1971 (MTP Act) की प्रक्रियात्मक सीमाओं से आगे बढ़कर महिला के हित और उसकी इच्छा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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‘अनचाहा गर्भ बच्चे पर भी असर डालता है’

अदालत ने यह भी कहा कि अनचाही गर्भावस्था का असर केवल महिला पर ही नहीं, बल्कि जन्म लेने वाले बच्चे पर भी पड़ सकता है।

असुरक्षित गर्भपात का खतरा

पीठ ने चिंता जताई कि यदि अदालतें ऐसे मामलों में अनुमति देने से इनकार करती हैं, तो नाबालिग असुरक्षित और अवैध तरीकों का सहारा ले सकती हैं, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है।

गोद देने का विकल्प पर्याप्त नहीं

अदालत ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि बच्चे को जन्म के बाद गोद दिया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि महत्वपूर्ण यह है कि गर्भवती महिला बच्चे को जन्म देना चाहती है या नहीं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका नाबालिग की मां द्वारा दायर की गई थी, जिसमें Supreme Court of India से निर्धारित समय सीमा के बाद गर्भपात की अनुमति मांगी गई थी।

कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि गर्भावस्था दो नाबालिगों के बीच सहमति से बने संबंध का परिणाम थी और लड़की ने स्पष्ट रूप से गर्भ जारी रखने से इनकार किया था।

AIIMS में प्रक्रिया का निर्देश

अदालत ने निर्देश दिया कि नाबालिग का गर्भपात All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) में सभी आवश्यक चिकित्सीय सुरक्षा उपायों के साथ किया जाए।

कानून का दायरा

Medical Termination of Pregnancy Act, 1971 के तहत सामान्यतः 20 सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति है, जबकि विशेष परिस्थितियों में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

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