गाजियाबाद कांड: Supreme Court of India ने SIT गठित की, पुलिस जांच पर उठाए सवाल

Like to Share

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद में 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म व हत्या मामले में 3 महिला अधिकारियों की SIT गठित की। अस्पतालों और पुलिस की भूमिका भी जांच के दायरे में।


सुप्रीम कोर्ट का सख्त हस्तक्षेप

Supreme Court of India ने गाजियाबाद में 4 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या मामले में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। अदालत ने इस अपराध को “राक्षसी” (diabolical) बताते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

तीन महिला अधिकारियों की SIT

मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि SIT में तीन महिला पुलिस अधिकारी शामिल होंगी।

इनमें एक अधिकारी कमिश्नर/आईजी स्तर की होगी (संभवतः उत्तर प्रदेश कैडर से लेकिन राज्य से प्रत्यक्ष जुड़ाव न हो), दूसरी अधिकारी एसपी या डीएसपी रैंक की और तीसरी डीएसपी या इंस्पेक्टर रैंक की होगी।

समयबद्ध गठन और जांच

अदालत ने निर्देश दिया कि SIT का गठन तुरंत किया जाए और अधिकतम 25 अप्रैल रात 11 बजे तक इसकी अधिसूचना जारी हो। इसके बाद टीम तुरंत जांच शुरू करेगी।

अस्पतालों की भूमिका भी जांच के दायरे में

अदालत ने SIT को यह भी निर्देश दिया कि वह उन निजी अस्पतालों की भूमिका की जांच करे, जिन्होंने कथित रूप से “गोल्डन आवर” के दौरान बच्ची को इलाज देने से मना कर दिया था।

इसके साथ ही जांच में उन अधिकारियों की भूमिका भी शामिल होगी, जिन पर जांच में लापरवाही या गड़बड़ी के आरोप हैं।

Must Read -  पटना हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ द्वारा बार के दिवंगत अधिवक्ताओं को किया जायेगा श्रद्धासुमन अर्पित

परिवार की चिंताओं पर ध्यान

पीठ ने कहा कि SIT पीड़िता के परिवार द्वारा उठाई गई सभी शिकायतों पर ध्यान दे और महत्वपूर्ण गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही स्थगित

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि SIT की पूरक रिपोर्ट आने तक कार्यवाही को स्थगित रखा जाए।

पहले भी जताई थी नाराजगी

इससे पहले 13 अप्रैल को Supreme Court of India ने गाजियाबाद पुलिस की जांच पर गंभीर संदेह जताया था।

पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi भी शामिल थे, ने कहा था कि पुलिस की जांच में “अनिच्छा” (reluctance) दिखाई दे रही है।

चार्जशीट पर कोर्ट की नजर

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल Aishwarya Bhati ने अदालत को बताया कि पुलिस ने नई चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें Bharatiya Nyaya Sanhita (पूर्व IPC) के तहत दुष्कर्म और Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 (POCSO) के तहत गंभीर यौन अपराध के आरोप जोड़े गए हैं।

आगे की जांच पर फैसला लंबित

हालांकि, अदालत ने पुलिस की भूमिका पर संदेह जताते हुए कहा कि वह पहले नई चार्जशीट की समीक्षा करेगी और फिर तय करेगी कि आगे जांच का उचित तरीका क्या होगा।

फैसले का महत्व

यह आदेश न्यायपालिका द्वारा संवेदनशील आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

SIT के गठन से यह संदेश गया है कि अदालत गंभीर अपराधों में जांच की पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता नहीं करेगी।

Must Read -  सुप्रीम कोर्ट ने ईशा फाउंडेशन के पर्यावरण स्वीकृति विवाद पर सुनवाई 28 फरवरी तक टाली

Tags

#SupremeCourt #GhaziabadCase #SITProbe #POCSO #ChildRights #CriminalLaw #LegalNewsIndia #न्यायपालिका #सुप्रीमकोर्ट #बालअधिकार

Leave a Comment