बॉम्बे उच्च न्यायलय का फैसला बिना सहमति के महिला के पैर छूना उसकी शील भंग करने जैसा अपराध-

औरंगाबाद बेंच – बॉम्बे हाईकोर्ट की ने रात में सोते समय एक महिला के पैर छूने के लिए एक पुरुष को दी गई सजा और एक साल की सजा को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा, “किसी महिला की सहमति के बिना उसके शरीर के किसी हिस्से को छूना वह भी रात के समय किसी अजनबी … Read more

फर्जी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी हिरासत में, नकली कागजात I.D. समेत पिस्तौल का लाइसेंस बरामद-

आरोपी लोविश को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे अवैध हथियार और फर्जी दस्तावेज मुहैया कराने वालों के बारे में पूछताछ की गई है. पता चला है कि इस पूछताछ के दौरान आरोपी ने कई लोगों के नाम पुलिस को बताए हैं. दिल्ली पुलिस ने एक नकली जज को गिरफ्तार किया है जो खुद … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय का फैसला पलटा, साथ ही साथ पति के परिजनों को आरोपी बनाने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की-

दहेज प्रताड़ना के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को पलटते हुए महिला व पुरुष के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी (FIR) में आकस्मिक रूप से नाम जोड़कर पति के परिजनों को वैवाहिक विवादों में आरोपी बनाने की प्रवृत्ति … Read more

मालेगांव ब्लास्ट केस: गवाह मुकरा अपने बयान से कहा- मुझ पर दबाव बनाया गया था-

चिर परिचित मालेगांव बम धमाके जो २००८ में हुआ था में एक गवाह ने मंगलवार को को विशेष एनआईए अदालत (NIA कोर्ट) को बताया की मामले की जांच एजेंसी ने उसे प्रताड़ित किया था। गवाह ने कोर्ट को यह भी बताया की ATS ने उन्हें योगी आदित्यनाथ और आरएसएस (RSS) के 4 अन्य लोगों के … Read more

सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण व्याख्या भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, और 477ए और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत-

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, और 477A और धारा 13(2) के साथ पठित धारा 13(2) (1)(डी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के के तहत दोषी ठहराए गए एक आरोपी द्वारा दायर अपील की अनुमति देते हुए ये टिप्पणियां कीं। 13 … Read more

मद्रास हाईकोर्ट: डिफ़ॉल्ट जमानत का अधिकार “ठीक उसी समय” चार्जशीट दाखिल करने से कभी भी समाप्त नहीं होता-

अदालत ने अभियुक्तों को डिफ़ॉल्ट जमानत के अधिकार का लाभ उठाने के लिए और अदालत के समक्ष चार्जशीट दाखिल करने के लिए जांच एजेंसी के लिए लागू समय की कमी के बारे में लंबे समय से चल रहे भ्रम को स्पष्ट किया है। एक फैसले में, मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने वैधानिक प्रावधानों और … Read more

राज्य को झकझोर देने वाली एक घटना में सुनवाई कर रहे ‘न्यायमूर्ति’ ने कहा सार्वजनिक आक्रोश और मीडिया की राय उसे न्याय प्रदान करने में प्रभावित नहीं करेगी-

न्यायाधीश ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, “यह तर्क न दें कि यह समाज के लिए एक संदेश है। उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है, यह सजा नहीं है, यह केवल जांच में सहायता करने के उद्देश्य से है। मैं किसी भी जनमत या मीडिया रिपोर्ट से प्रभावित नहीं होने वाला हूं। सैकड़ों मीडिया रिपोर्ट्स … Read more

उच्च न्यायालय: धारा 506 IPC संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है अतः कम्प्लेंट केस नहीं चलाया जा सकता-

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक की पेंशन में 10% कटौती को रद्द किया, कहा – "यह कदाचार नहीं है"

Allahabad High Court इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में अपना निर्णय देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य में, धारा 506 के तहत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती है, इसलिए इसे कम्प्लेंट केस के रूप में नहीं चलाया जा सकता है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने धारा 482 के तहत एक राकेश कुमार शुक्ला द्वारा … Read more

बलात्कार के मामलों में दोषसिद्धि फरियादी की एकमात्र गवाही पर परन्तु प्रमाणिकता पर मामला रद्द किया जा सकता-

“बचाव पक्ष का यह कर्तव्य नहीं है कि वह यह बताए कि कैसे और क्यों बलात्कार के मामले में पीड़िता और अन्य गवाहों ने आरोपी को झूठा फंसाया है। अभियोजन पक्ष को अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ता है और बचाव के मामले की कमजोरी से समर्थन नहीं ले सकता।” दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार … Read more

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दुर्घटना में मारे गये युवक के मामले में बीमा कंपनी को दिया 33 लाख 50 हजार रुपए मुआवजा देने का निर्देश-

अधिकरण ने दो लाख 30 हजार 400 रुपये आठ फीसदी ब्याज सहित मुआवजे के भुगतान का आदेश दिया था। मामले के तथ्यों के अनुसार 20 जुलाई 2004 को अभिषेक की दिल्ली-रायबरेली सड़क पर दुर्घटना में मौत हो गई। जिसके कारण मुआवजे का दावा किया गया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय Allahabad High Court ने एक युवक … Read more