NEET UG पेपर लीक शिवराज मोटेगांवकर जमानत
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के आरोपी शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने अपनी जमानत याचिका वापस ले ली। विशेष CBI अदालत ने याचिका को वापस ली गई मानते हुए खारिज कर दिया। CBI का आरोप है कि आरोपी ने परीक्षा से पहले केमिस्ट्री का प्रश्नपत्र लीक कराने की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई।
जमानत याचिका वापस ली
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के आरोपी शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने गुरुवार को अपनी जमानत याचिका वापस ले ली। इसके बाद विशेष CBI अदालत ने याचिका को वापस ली गई (Withdrawn) मानते हुए खारिज कर दिया।
यह मामला विशेष CBI न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था।
अदालत में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत में आवेदन देकर कहा कि शिवराज मोटेगांवकर फिलहाल अपनी जमानत याचिका पर बहस नहीं करना चाहते।
उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि याचिका को गुण-दोष के आधार पर निर्णय दिए बिना वापस ली गई मानकर खारिज किया जाए तथा भविष्य में नई जमानत याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी जाए।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आवेदन स्वीकार कर लिया।
विशेष न्यायाधीश ने आदेश में कहा—
“आरोपी के अधिवक्ता की दलीलों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान जमानत याचिका वापस ली गई मानते हुए खारिज की जाती है।”
CBI के आरोप क्या हैं?
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) का आरोप है कि शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर NEET-UG 2026 के केमिस्ट्री प्रश्नपत्र लीक करने की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल था।
जांच एजेंसी के अनुसार—
- शिवराज मोटेगांवकर महाराष्ट्र के लातूर में RCC Classes नामक कोचिंग संस्थान संचालित करता है।
- उसने कथित रूप से प्रह्लाद कुलकर्णी को 5 लाख रुपये दिए।
- प्रह्लाद कुलकर्णी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा नियुक्त केमिस्ट्री प्रश्नपत्र तैयार करने वालों में शामिल था।
प्रश्नपत्र लीक करने का आरोप
CBI का दावा है कि आरोपी को 23 अप्रैल 2026, यानी निर्धारित परीक्षा तिथि से पहले ही, केमिस्ट्री के प्रश्न और उत्तर प्राप्त हो गए थे।
जांच एजेंसी के अनुसार—
- आरोपी के मोबाइल फोन से कथित रूप से लीक हुआ प्रश्नपत्र और उसके उत्तर बरामद हुए।
- उसने यह प्रश्नपत्र और उत्तर कई अन्य व्यक्तियों को भी उपलब्ध कराए।
- इस पूरे घटनाक्रम में वह अन्य आरोपियों के साथ कथित साजिश का हिस्सा था।
वीडियो का भी दावा
सुनवाई के दौरान अदालत के एक प्रश्न के उत्तर में जांच अधिकारी ने बताया कि जांच एजेंसी के पास एक वीडियो भी है।
CBI के अनुसार, उस वीडियो में आरोपी कथित रूप से यह कहते हुए दिखाई देता है कि जिस प्रश्नपत्र को उसने छात्रों को दिया था, वही वास्तविक परीक्षा में आया।
हालांकि, यह CBI का आरोप है। अदालत ने अभी इन आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
अभी क्या स्थिति है?
फिलहाल शिवराज मोटेगांवकर की जमानत याचिका वापस ले ली गई है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और आरोपी को भविष्य में नई जमानत याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गई है।
उधर, CBI की जांच जारी है और एजेंसी पेपर लीक की कथित साजिश में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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