कोलेजियम सिस्टम और NJAC मामले में CJI की सख्त चेतावनी: कहा कि “मेरी अदालत में दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं”

Like to Share

CJI सूर्यकांत ने कहा कि रजिस्ट्री में ऐसी कोई याचिका दाखिल नहीं

सुप्रीम कोर्ट में कोलेजियम सिस्टम और NJAC बहाली की मांग को लेकर मेंशनिंग के दौरान CJI सूर्यकांत ने अधिवक्ता मैथ्यूज नेदुम्परा को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने बेबुनियाद दलीलों और अनुचित टिप्पणियों पर सख्त रुख दिखाया।


Supreme Court of India में आज उस समय तीखा घटनाक्रम देखने को मिला जब भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने अधिवक्ता Mathews Nedumpara को कथित तौर पर “बेबुनियाद और अनुचित” दलीलें रखने पर कड़ी फटकार लगाई। CJI ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वे इस प्रकार का आचरण जारी रखते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

मेंशनिंग के दौरान उठा NJAC का मुद्दा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेंशनिंग के समय नेदुम्परा ने कोलेजियम सिस्टम को चुनौती देने और National Judicial Appointments Commission case (NJAC) की पुनर्स्थापना की मांग से जुड़ी एक याचिका का उल्लेख किया।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि रजिस्ट्री में ऐसी कोई याचिका दाखिल नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस मामले का जिक्र किया जा रहा है, वह रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है।

“सावधान रहें, मेरी अदालत में…”

मामला तब और गरमा गया जब नेदुम्परा ने टिप्पणी की कि उद्योगपतियों से जुड़े मामलों के लिए संविधान पीठों का गठन किया जा रहा है, जबकि आम नागरिकों से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं हो रही।

Must Read -  सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट जज पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली पूर्व न्यायिक अधिकारी को किया बहाल-

इस पर CJI ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा,

“श्री नेदुम्परा, मेरी अदालत में आप क्या प्रस्तुत कर रहे हैं, इसे लेकर सावधान रहें। आपने मुझे चंडीगढ़ और दिल्ली में देखा है… मैं आपको चेतावनी दे रहा हूं, सतर्क रहें। यह मत समझिए कि आप अन्य पीठों की तरह यहां भी दुर्व्यवहार जारी रख पाएंगे।”

अदालत की टिप्पणी से स्पष्ट था कि वह व्यक्तिगत या राजनीतिक रंग लिए बयानों को न्यायिक कार्यवाही का हिस्सा बनने देने के पक्ष में नहीं है।

पहले भी हो चुकी है फटकार

साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने नेदुम्परा की याचिका को रजिस्टर करने से इनकार कर दिया था। रजिस्ट्री का कहना था कि जिस मुद्दे पर पहले ही NJAC मामले में संविधान पीठ फैसला दे चुकी है, उस पर नई रिट याचिका स्वीकार्य नहीं है।

पिछले वर्ष तत्कालीन CJI Sanjiv Khanna ने भी इसी तरह की मांग पर नेदुम्परा को फटकार लगाई थी और कहा था कि अदालत में “राजनीतिक भाषण” न दिए जाएं।

कोलेजियम बनाम NJAC बहस

NJAC को 2015 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था और कोलेजियम प्रणाली को बहाल रखा था। तब से समय-समय पर इस मुद्दे को लेकर बहस होती रही है, लेकिन अदालत का रुख स्पष्ट रहा है कि जब तक संसद नया कानून नहीं लाती या पूर्व निर्णय की समीक्षा नहीं होती, तब तक पुराना फैसला लागू रहेगा।

Must Read -  SC ने नाबालिग को मां की जाति पर SC प्रमाणपत्र देने की अनुमति दी, जाति निर्धारण के कानून पर नई बहस शुरू

आज की सुनवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि अदालत के भीतर अनुशासन और मर्यादा सर्वोपरि है। न्यायिक कार्यवाही के दौरान की गई टिप्पणियां यदि न्यायालय की गरिमा या प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती हैं, तो शीर्ष अदालत सख्त रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगी।

इस घटनाक्रम ने न केवल न्यायिक आचरण की सीमाओं को रेखांकित किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में मेंशनिंग के दौरान तथ्यों और प्रक्रिया की शुद्धता अनिवार्य है।


Tags

#SupremeCourt #CJI #SuryaKant #MathewsNedumpara #NJAC #CollegiumSystem #JudicialAppointments #सुप्रीमकोर्ट #मुख्यन्यायाधीश #एनजेएसी #कोलेजियम

Leave a Comment