राजस्थान हाई कोर्ट में लंबे समय से जारी कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल को अगला चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है। साथ ही उनका छत्तीसगढ़ से राजस्थान ट्रांसफर भी सुझाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने राजस्थान हाई कोर्ट में लंबे समय से चले आ रहे कार्यवाहक चीफ जस्टिस के कार्यकाल और उससे जुड़े विवाद के बीच जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाई कोर्ट का अगला चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की है। खास बात यह है कि कॉलेजियम ने उनकी नियुक्ति की सिफारिश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से राजस्थान हाई कोर्ट ट्रांसफर करने की अलग सिफारिश भी की है।
दोनों प्रस्ताव सोमवार शाम अलग-अलग प्रस्तावों के रूप में पारित किए गए। माना जा रहा है कि ट्रांसफर की अलग सिफारिश का तत्काल महत्व है, क्योंकि इससे जस्टिस अग्रवाल नियमित चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही राजस्थान पहुंच सकते हैं।
ट्रांसफर से पहले संभाल सकते हैं कार्यवाहक चीफ जस्टिस की जिम्मेदारी
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया में कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार की प्रक्रिया और निर्धारित परामर्श शामिल होते हैं। ऐसे में अंतिम नियुक्ति में समय लग सकता है।
इसके विपरीत, किसी मौजूदा हाई कोर्ट जज के ट्रांसफर की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल होती है। जस्टिस अग्रवाल के राजस्थान पहुंचने के बाद उनकी वरिष्ठता उन्हें कार्यवाहक चीफ जस्टिस बनने की स्थिति में ला सकती है।
इसका व्यावहारिक अर्थ यह होगा कि राजस्थान हाई कोर्ट को नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने तक मौजूदा कार्यवाहक चीफ जस्टिस जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के प्रशासनिक नेतृत्व में बने रहने की आवश्यकता नहीं होगी।
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर विवाद
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर अभूतपूर्व विवाद चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को CJI सूर्यकांत को लिखे तीन पत्रों में राजस्थान हाई कोर्ट के प्रशासनिक कामकाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें जस्टिस शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और पक्षपात जैसे आरोप लगाए गए थे तथा राजस्थान से बाहर के किसी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति की मांग की गई थी।
हालांकि इन आरोपों को अभी किसी संस्थागत प्रक्रिया में सिद्ध नहीं किया गया है। CJI सूर्यकांत ने 26 अगस्त को स्पष्ट किया था कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों का फैसला मीडिया के माध्यम से नहीं किया जा सकता और ऐसे मामलों को निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के तहत ही देखा जाना चाहिए।
जस्टिस शर्मा का कार्यवाहक कार्यकाल 10 महीने से अधिक
जस्टिस शर्मा सितंबर 2025 से राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह स्थिति जस्टिस एस. श्रीराम के सेवानिवृत्त होने के बाद बनी थी।
जस्टिस शर्मा 26 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनके लंबे कार्यवाहक कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, क्योंकि कार्यवाहक चीफ जस्टिस के पास नियमित चीफ जस्टिस की तरह महत्वपूर्ण प्रशासनिक शक्तियां होती हैं।
विवाद के बीच राजस्थान के वकीलों में भी विरोध देखने को मिला है। जयपुर और जोधपुर में वकीलों ने जस्टिस शर्मा को प्रशासनिक जिम्मेदारी से हटाने की मांग की है। राजस्थान हाई कोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन ने 6 सितंबर तक पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया है और CJI तथा राष्ट्रपति को प्रतिनिधित्व भेजने का निर्णय लिया है।
इसी बीच सोमवार को जस्टिस शर्मा ने न्यायिक कार्य से खुद को अलग कर लिया और संशोधित रोस्टर के जरिए उनके सामने सूचीबद्ध मामलों को अन्य पीठों को आवंटित किया गया।
कॉलेजियम के फैसले का दोहरा प्रभाव
कॉलेजियम की दोनों सिफारिशों को साथ पढ़ने पर इसका महत्व और स्पष्ट होता है।
पहली सिफारिश: जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाई कोर्ट का नियमित चीफ जस्टिस बनाया जाए।
दूसरी सिफारिश: जस्टिस अग्रवाल का छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से राजस्थान हाई कोर्ट ट्रांसफर किया जाए।
इससे कॉलेजियम ने एक ओर राजस्थान के लिए स्थायी चीफ जस्टिस नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है, वहीं दूसरी ओर संभावित उत्तराधिकारी को जल्द राजस्थान पहुंचाने का रास्ता भी तैयार किया है।
यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि केवल चीफ जस्टिस की नियुक्ति की सिफारिश की जाती, तो अंतिम नियुक्ति अधिसूचित होने तक जस्टिस शर्मा कार्यवाहक चीफ जस्टिस बने रह सकते थे। ट्रांसफर की सिफारिश इस अंतराल को कम करने का रास्ता खोलती है।
पंजाब-हरियाणा का उदाहरण भी महत्वपूर्ण
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति में लगने वाले समय का एक उदाहरण पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त 2026 को तत्कालीन कार्यवाहक चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को नियमित चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार दो सप्ताह से अधिक समय बाद भी पंजाब सरकार ने उस सिफारिश पर अपनी राय नहीं भेजी थी।
मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर में हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति के मामलों में राज्य सरकार को अपनी राय देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है, हालांकि चीफ जस्टिस की नियुक्ति के लिए कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं है।
यही कारण है कि राजस्थान में जस्टिस अग्रवाल का अलग से ट्रांसफर तत्काल प्रशासनिक समाधान के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल कौन हैं?
जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल वर्तमान में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जज हैं। उन्हें सितंबर 2013 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया था और मार्च 2016 में वे स्थायी जज बने।
कॉलेजियम की ताजा सिफारिश लागू होने पर वे पहले ट्रांसफर के जरिए राजस्थान हाई कोर्ट पहुंच सकते हैं और वरिष्ठता के आधार पर कार्यवाहक चीफ जस्टिस की भूमिका संभाल सकते हैं। इसके बाद केंद्र सरकार की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने पर वे राजस्थान हाई कोर्ट के नियमित चीफ जस्टिस के रूप में कार्यभार संभाल सकते हैं।
जस्टिस संदीप मेहता की एक मांग अभी बाकी
हालांकि कॉलेजियम की सिफारिश से राजस्थान हाई कोर्ट में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता साफ होता दिख रहा है, लेकिन जस्टिस संदीप मेहता की एक प्रमुख मांग अभी पूरी होती दिखाई नहीं देती।
जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में जस्टिस शर्मा को राजस्थान से बाहर ट्रांसफर करने की मांग भी की थी। कॉलेजियम के ताजा प्रस्तावों में जस्टिस अग्रवाल के राजस्थान ट्रांसफर और उनके चीफ जस्टिस बनाए जाने की सिफारिश तो है, लेकिन जस्टिस शर्मा के ट्रांसफर का कोई उल्लेख नहीं है।
इसलिए फिलहाल कॉलेजियम का कदम मुख्यतः राजस्थान हाई कोर्ट में नेतृत्व परिवर्तन और लंबे समय से चले आ रहे कार्यवाहक व्यवस्था के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण संस्थागत कदम के रूप में देखा जा सकता है।
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